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गांधी का चंपारणः मौका मिले तो जरूर देखें ये डॉक्यूमेंट्री

Fri, 02 Oct 2015 08:02 PM IST
राहुल सांकृत्यायन/अमर उजाला, दिल्ली
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महात्मा गांधी के स्वतंत्रता संग्राम की असली शुरुआत बिहार राज्य के चंपारण से हुई थी। वहीं से उन्होंने पहली बार किसानों के खिलाफ होने वाले ब्रिटिश सरकार के अत्याचार के खिलाफ सत्याग्रह की आवाज उठाई। उसके बाद यह आवाज देश की आजादी की लड़ाई में तब्दील हो गई। इतना तो लगभग हम सभी जानते हैं।
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कुछ चीजें किताबों में हैं और कुछ इतिहासकारों की जुबान पर, लेकिन वो चीजें जो हम न किताबों में पढ़ सकते हैं और न ही इतिहासकारों की जुबां से सुन सकते हैं, उन्हें दिखाया है युवा फिल्मकार विश्वजीत मुखर्जी ने अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म, 'गांधी का चंपारण' में।

57 मिनट की इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म में गांधी के चंपारण की वो हकीकत दिखाई गई है जो हम वहां जाकर ही देख सकते हैं। डॉक्यूमेंट्री के पहले हिस्से में गांधी के चंपारण प्रवास के दौरान उनके कार्यों को दिखाती है। इसी बीच राजकुमार शुक्ला के गांधी जी को चंपारण लाने में जद्दोजहद और बत्तख मियां की चौंकाने वाली सच्चाई भी सामने आती है।
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डॉक्यूमेंट्री के मुताबिक ब्रितानी सरकार ने गांधी जी को जहर देकर मारने की कोशिश की थी, लेकिन चंपारण के बत्तख मियां नाम के शख्स ने इस कोशिश को नाकाम कर दिया। इन सब ऐतिहासिक घटनओं से आगे बढ़ती फिल्म उस मोड़ पर पहुंचती है, जिसे जानकार आपको विश्वास नहीं होगी।

जिस जगह को गांधी ने अपनी कर्मभूमि बनाई, जो जमीन गांधी के अथक मेहनत की साक्षी बनी, उसी जगह पर बनें गांधी स्मारक आज अपनी आखिरी सांसें गिन रहे हैं। वे स्कूल जो गांधी जी ने अपने चंपारण प्रवास के दौरान खोले थे, अब भी चल तो रहे हैं, लेकिन उन्हीं स्कूल के बच्चों गांधी की तस्वीर दिखाकर उनका नाम पुछने पर सच्चाई सामने आ जाती है।



निर्देशक ने एक दृश्य में गांधी के खोले गए बच्चों से पूछा कि मोदी को कौन हैं, तो जवाब मिला 'सरकार' और जब पूछा महात्मा गांधी कौन हैं, तो वे चुप रहे। उन्हें पता ही नहीं था कि महात्मा गांधी कौन थे? गांधी जिस घर में रहकर चर्खा चलाते थे, वहां अब कचरा फैला हुआ है। यही नहीं, वहां लगे गांधी स्मारक को कपड़ा सुखाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।



इस डॉक्यूमेंट्री को देखने के दौरान आप खुद को चंपारण में होने का एहसास कर पाएंगे। जैसा कि गुरुवार को आईआईएमसी के ऑडोरियम फिल्म के स्क्रीनिंग के दौरन हुआ। इस दौरान ऑडोटोरियम में मौजूद सैकड़ों दर्शकों बिश्वजीत की मेहनत की तारीफ की।



हालांकि डॉक्यूमेंट्री निर्माण में संसाधनों की कमी साफ झलक जाती है। बावजूद इसके गांधी के बारे में इतना कुछ बताना बड़ी बात है। फिल्म को जल्द ही यू-ट्यूब पर रिलीज किया जाएगा। मौका मिले तो यह डॉक्यूमेंट्री जरूर देखिएगा।
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