गजेंद्र वर्मा का नाम हिंदी संगीत के सुधी प्रेमियों की जुबान पर अब तक भी नहीं चढ़ पाया हो तो इसमें घाटा गजेंद्र वर्मा का ही इसलिए है क्योंकि उनके संगीत में ठहराव कम और जल्दबाजी ज्यादा है। डिजिटल में अपनी कला और हुनर के प्रचार-प्रसार के अपने अलग तौर तरीके हैं। भला हो नेहा कक्कड़ का जिनके गाए गजेंद्र के पिछले साल के हिट गाने तेरा घाटा के कवर वर्जन ने गजेंद्र वर्मा के यू ट्यूब चैनल की तरफ तमाम लोगों को मोड़ा है।
यूट्यूब क्रिएटर्स के पैमाने से देखें तो गजेंद्र वर्मा के इस चैनल के बीस लाख के करीब सब्सक्राइबर्स हैं, जो डिजिटल दुनिया में सम्मानजनक संख्या मानी जाती है। लेकिन, चैनल के कंटेंट पर नज़र डालें तो यहां अभी तक पिछले साल का गाना तेरा घाटा ही अलग अलग तरीकों से परोसा जा रहा है। इस साल अब तक इस चैनल पर एक ही गाना अपलोड हुआ है, खेलेगी क्या। गजेंद्र वर्मा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। खुद ही लिखते हैं। खुद ही धुनें बनाते हैं और गाते भी खुद ही हैं। जाहिर है कि संगीत के ये तीनों अहम हिस्से एक इंसान ही संभाल सकता हो तो उसके लिए दिल से दाद ही निकलती है।
तेरा घाटा ने गजेंद्र वर्मा को शोहरत का जो प्लेटफॉर्म मुहैया कराया है, उसके सही इस्तेमाल में ही उनका मुनाफा है। खेलेगी क्या अच्छा म्यूजिक सिंगल है। इसके बोल आज की पीढी के हिसाब से हैं। लेकिन बोलों में मिठास न हो, कहने को कोई बात न हो और याद रह जाने लायक कोई बात न हो तो गाने की उम्र बस म्यूजिक वीडियो की लंबाई जितनी ही होती है। ये बात गजेंद्र वर्मा जितनी जल्दी समझ सकें, इसमें उतना ही उनका कम घाटा है।