'फॉलो कर लो यार' रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
उर्फी जावेद को ब्रांड बनाने की हल्की कोशिश
वेब सीरीज ‘फॉलो कर लो यार’ को अगर उर्फी जावेद का स्तुति गान (हैजियोग्राफी) बनाने की बजाय कोरोना संक्रमण काल के समय उनमें आए शोहरत के इस ज्वार के कारणों की तहकीकात के रूप में बनाया गया होता तो ये देश के युवाओं की बदली मानसिकता का एक ऐसा दस्तावेज होती, जिसे सदियों तक एक संदर्भ बिंदु के रूप में देखा जाता। लेकिन, देसी ओटीटी जी5 ने जैसे चर्चा में आने के लिए सनी लिओनी की बायोपिक का सहारा लिया, वैसा ही कुछ कुछ प्राइम वीडियो अपने डाउनलोड बढ़ाने के लिए कर रहा है। प्राइम वीडियो की हालिया रिलीज सीरीज ‘द एंग्री यंग मेन’ के चर्चे बहुत हैं, लेकिन चूंकि सीरीज की भाषा अधिकतर अंग्रेजी है, लिहाजा ‘मासेज’ तक पहुंचने के लिए उनको भी उर्फी जावेद का ही सहारा है।
'फॉलो कर लो यार' रिव्यू
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मेहनत से पलायन करती पीढ़ी की दास्तां
प्राइम वीडियो की मातृ कंपनी अमेजन को सहारा देने के लिए वेब सीरीज ‘फॉलो कर लो यार’ उन्हें कितनी मदद कर पाएगी, इस पर फैसला होने में समय लगेगा। सनी लिओनी ने जी5 को फायदा नहीं पहुंचाया। ‘सेक्रेड गेम्स’ ने नेटफ्लिक्स को बहुत नुकसान पहुंचाया और अब प्राइम वीडियो की ब्रांड वैल्यू उर्फी जावेद पर कुर्बान है। सीरीज की कहानी ज्यादा कुछ खास नहीं है। लखनवी तहजीब से भागी एक किशोरी टेलीविजन धारावाहिकों में आधा दशक तक काम करने के बाद भी जब सुर्खियों में नहीं आ पाता ही तो वह खुद को नंगा करना शुरू कर देती है। अभिनय में मेहनत लगती है, रिहर्सल करने पड़ते हैं, अपने हुनर को मांजने के लिए थियेटर करना पड़ता है लेकिन उर्फी ने शोहरत का शॉर्टकट चुना। मासिक फीस पर काम करने वाले पैपराजी उनका सहारा बने और लोग जल्द ही ये जानने की कोशिश करने लगे कि आखिर ये उर्फी है कौन?
'फॉलो कर लो यार' रिव्यू
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प्राइम वीडियो की ब्रांड वैल्यू पर सीधी चोट
जैसा कि सीरीज में उर्फी की बहन खुद कहती हैं, उनका परिवार एक क्रेजी फैमिली है। मां साफ कहती हैं कि हमारा घर उर्फी की कमाई से चलता है। लेकिन, उर्फी की बहनों का नजरिया भी यहां समझने लायक है। सोशल मीडिया से ही सितारे बने ओरी भी यहां हैं और अपनी स्टैंड अप कॉमेडी की मेहनत से स्टार बने मुनव्वर फारुकी भी। सबका मकसद यहां एक है और वह है उर्फ जावेद की शख्सीयत के कुछ ऐसे पहलू दर्शकों के सामने पेश करने का कि उर्फी को देश की ‘किम कार्दाशियां’ के रूप में स्वीकार कर लिया जाए। लेकिन, ये पूरी कोशिश इतनी हास्यास्पद है कि प्राइम वीडियो का सब्सक्रिप्शन खत्म करने का मन करने लगता है। दिक्कत बस ये है कि इसी सब्सक्रिप्शन से घर का सामान भी मंगाना होता है। प्राइम वीडियो की ब्रांड वैल्यू से अमेजन की ई कॉमर्स वेबसाइट का सीधा नाता जो है।
'फॉलो कर लो यार' रिव्यू
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आओ, तुम्हें चांद पर ले जाएं..
द अदर सर्कल और कलेक्टिव जैसी दो चर्चित एजेंसियों की इस साझा कोशिश का सीधा मकसद जो समझ आता है वो ये भी है कि ये दोनों एजेंसियां अपना अपना प्रचार भी कर रही हैं और नई पीढ़ी की मोटी जेब वालों को न्यौता भी दे रही हैं कि आओ हम तुम्हें किम कार्दाशियां न सही उर्फी जावेद तो बना ही सकते हैं। प्राइम वीडियो के पास वैसे भी वही घिसे पिटे शोज हैं। सीजन दर सीजन च्यूइंग गम की तरह खिंचती कहानियां हैं। फिल्में भी कभी कभार ही इस पर ढंग की दिख पाती हैं। हिंदी में मनोरंजन सामग्री बहुत कुछ खास है नहीं इसके पास। तो, अगर आपको दूसरों की निजी जिंदगी में झांकने में मजा आता है या फिर स्क्रिप्टेड शोज को आप रियलिटी शो मान लेते हैं तभी वेब सीरीज ‘फॉलो कर लो यार’ देखें, नहीं तो ये सीरीज आपका अच्छा खासा समय तो बर्बाद करेगी ही, मनोवैज्ञानिक रूप से भी आपको बहुत परेशान कर सकती है।