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एक आशिक के जुनून की कहानी है 'जब तक है जान'

Tue, 13 Nov 2012 03:06 PM IST
अनुराधा गोयल
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हैलो फ्रेंड्स! दीवाली के मौके पर आज दो फिल्में रिलीज हो रही हैं, एक कॉमेडी जॉनर की है तो दूसरी है रोमांस से भरपूर। तो चलिए आपको बताते हैं इश्क और जुनून से सराबोर यश चापेड़ा की आखिरी फिल्म ‘जब तक है जान’ के बारे में। 
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यूं तो शाहरूख हर रोमांटिक रोल में बेहद रोमांटिक लगते हैं लेकिन इस बार शाहरूख के रोमांस में मैच्योरिटी और जुनून दोनों ही शामिल थे। 
कहानी
मेजर समर आनंद (शाहरूख खान) इंडियन आर्मी में बेहद निडर और अकडू ऑफिसर है। जो हमेशा अकेले और चुपचाप रहता है लेकिन अपनी जिंदगी को जोखिम में डालना उसे खूब भाता है। मेजर आनंद किसी भी बॉम्ब को बिना सेफ्टी जैकेट पहने आराम से डिफ्यूज कर सकता है। 21 साल की अकीरा (अनुष्का शर्मा) दिल्ली की रहने वाली है जो लंदन में डिस्कवरी चैनल में जॉब पाने के लिए कई जोखिम भरे काम करती है, इसी दौरान अकीरा की मुलाकात मेजर आनंद से होती है, जहां मेजर की डायरी अकीरा के हाथ लग जाती है और फिल्म फ्लैश बैक में चली जाती है। 
समर मेजर बनने के पहले 28 साल की उम्र में लंदन में छोटे-मोटे काम कर और गाना गाकर अपना गुजारा कर रहा होता है जहां उसे 21 साल की बेहद अमीर लड़की मीरा (कैटरीना कैफ) से प्यार हो जाता है। मीरा भगवान के भरोसे रहती है और अपने हर काम के लिए भगवान से दुआएं मांगना उसका काम है। एक सिचुएशन में मीरा को समर के भले के लिए उससे दूर होने की दुआ मांगनी पड़ती है जिससे कहानी में ट्विस्ट आता है। 
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समर को मीरा मिली या नहीं, अकीरा की जॉब का क्या हुआ, अकीरा और समर में प्यार हुआ या नहीं, ये सब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी। 
अभिनय
शाहरूख एक रोमांटिक हीरो और मेजर के किरदार में इंप्रेस करने में कामयाब हुए हैं। शाहरूख के प्यार करने के तरीके और लव स्टाइल में काफी मैच्योरिटी झलक रही थी। वहीं कैटरीना ने डांस परफॉर्मेंस अच्छी दी। अनुष्का शर्मा सब पर भारी पड़ी। अनुष्का ने बेहद नैचुरल एक्टिंग की है। फिर चाहे वो बबली परफॉर्मेंस देना हो या लव-शव करना हो। अनुष्का एक दिल्ली वाली कूल लड़की का किरदार निभाने में कामयाब हुई हैं। नीतू सिंह और ऋषि कपूर गेस्ट परफॉर्मेंस के दौरान अपनी छाप छोड़ते हैं। 
संगीत
फिल्म के गाने बहुत अच्छे हैं फिर 'छल्ला', 'इश्क शावा', अनुष्का पर बेस्ड 'जिया रे', 'जब तक है जान' सभी गाने फिल्म में जान डालते हैं। फिल्म में संगीत पर बहुत ध्यान दिया गया है। ऐसे में फिल्म म्यूजिकल भी लगने लगी थी। 
निर्देशनयश जी के बैनर तले बनी उनकी आखिरी फिल्म में रोमांस का तड़का खूब है, बेशक कहानी में काफी ट्विस्ट और कई मोड़ थे लेकिन यश जी अपनी फिल्म में लव ट्राइंगल और फ्लैश बैक दिखाने से भी अछूते नहीं रहे। फिल्म की एंडिंग उनकी हर फिल्म की तरह हैप्पी ही रही लेकिन फिल्म के फर्स्ट पार्ट के बजाय सेकेंड पार्ट ज्यादा प्रभावी है। घटनाएं पहले पार्ट से ज्यादा सेकेंड पार्ट में है। पहले पार्ट को डवलेप करने के दौरान फिल्म काफी लंबी हो गई। हालांकि लद्दाख और लंदन की अच्छी लोकेशन है। यानी यश जी फिल्म में रोमांस के फॉर्मूले को भुनाने में सफल हुए हैं।  क्यों देखें
यदि आप शाहरूख के रोमांटिक स्टाइल के फैन है ये फिल्म आपके लिए है। आपको रोमांटिक फिल्में देखना पसंद है तो भी आप ये फिल्म देख सकते हैं। क्यों ना देखें
आपको ट्राइंगल लव समझ नहीं आता है तो ये फिल्म आपके लिए नहीं है। यदि आप एक धीमी रोमांटिक स्टोरी को एन्जॉय करने में इंटरस्टेड नहीं है तो फिल्म आपके लिए नहीं है।
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