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कुछ हिस्सों में डरा भी देती है हॉरर स्टोरी

Sat, 14 Sep 2013 03:13 PM IST
रवि बुले/अमर उजाला मुंबई
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एक समय की बात है। सात दोस्त थे। एक रात वे बार में पार्टी कर रहे थे। तभी भूत-प्रेत की चर्चा चल पड़ी। किसी ने कहा कि भूत होते हैं, किसी ने कहा नहीं होते। बातों-बातों में हुआ कि चलो देख ही लेते हैं, सचमुच भूत होते हैं या नहीं।
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शहर में एक विशाल होटल खाली पड़ा था, जिसके बारे में लोग कहते थे कि वहां भूत है। सातों कार में बैठकर होटल जा पहुंचे। अंदर गए तो सन्नाटा था, अंधेरा था। थोड़ी देर के हंसी-मजाक और चुहलबाजी के बीच लगा कि कुछ गड़बड़ है।

.और धीरे-धीरे हंसी-मजाक चीखने-चिल्लाने में बदल गई। एक-एक कर दोस्त मारे जाने लगे। होटल में एक भूत है। एक लड़की का भूत। कौन है वह लड़की और क्या चाहती है...? क्या दोस्तों में से कोई बच सकेगा या सबकी कब्र वहीं बन जाएगी...?
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निर्देशक आयुश रैना की फिल्म ‘हॉरर स्टोरी’ पर्दे पर रहस्य और रोमांच को रचती है। निर्देशक कुछ मौकों पर डराने में भी कामयाब हैं। हालांकि कई बार अभिनेताओं की कमजोरी के कारण सीन में वह बात नहीं आ पाती, जो उभरनी चाहिए। साथ ही कुछ ऐसे दृश्य भी हैं जो आप पहले कई फिल्मों में देख चुके हैं।

दरवाजे का अपने आप बंद होना। अचानक पीछे से हाथ आना। जहां भूत की संभावना दिखे, वहां भूत का न निकलना। वैसे फिल्म में जलती-बुझती लाइटों और संगीत का खूबसूरती से इस्तेमाल किया गया है। कुछ दृश्य वाकई सिरहन पैदा करते हैं।

लेकिन यह डर ऐसा नहीं है कि आपके दिमाग में बैठ जाए और सिनेमाहॉल से निकल कर घर तक आए। जिन लोगों को डरावनी फिल्में देखने में मजा आता है, हॉरर स्टोरी उनके लिए है। निर्देशक ने कहानी को कुशलता से कहा है। हालांकि इसे कुछ और कसा जा सकता था।
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