कुछ दिन वाकई नियति के द्वारा निर्धारित होते हैं। एक तरफ देश की एक अदालत बलात्कार के अब तक के सबसे जघन्य मामले में दोषियों को सजा सुना रही है, दूसरी तरफ ऐसी फिल्म रिलीज हो रही है जिसमें महिलाएं सिर्फ और सिर्फ ‘सेक्स ऑब्जेक्ट’ हैं। एक साथ लोग कैंडिल वाले जुलूस में भी शामिल हैं और फिल्म के टिकट की कतारों में भी हैं। विडंबना इसी को कहते हैं।
रचनात्मकता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर देश में कोई बंदिश नहीं है इसलिए ‘ग्रेंड मस्ती’ बनाने/देखने की छूट सबको है। फिल्म में लड़कियां ‘साडा हक एथे रख’ का नारा बुलंद करते हुए कॉलेज प्रिंसिपल की कुटाई करती हैं, जो उन्हें प्रेम-गतिविधियों में शामिल होने से रोकता है।
फिल्म देखना हक है आपका। मर्जी है आपकी। अगर आपमें केले को सिर्फ केला और दूध को सिर्फ दूध समझने की मासूमियत है तो आप इसे एक ‘समाज सुधारक’ फिल्म की तरह भी देख सकते हैं। अगर ऐसा नहीं है तो फिर यह केले और दूध का अश्लील मिक्स है।
जिसमें तीन मनचले पति अंततः यह समझ जाते हैं कि पत्नियों से बेवफाई करके वे गलत रास्ते पर चल रहे हैं। अगर आप नैतिकताओं और पूर्वाग्रहों को परे रख कर इसे देख सकें तो यह फिल्म ठहाके लगवाती है।
वर्ना आधे घंटे के अंदर ही कुर्सी के स्प्रिंग आपको सीट छोड़ने के मजबूर कर देते हैं। बॉलीवुड में अब तक गिनती की बनी ‘वयस्क कॉमेडी’ फिल्मों से तुलना करें तो ‘ग्रेंड मस्ती’ सबको पछाड़ देती है।
‘ग्रेंड मस्ती’ कॉलेज के तीन ऐसे नवयुवकों (विवेक ओबेराय, रितेश देशमुख, आफताब शिवदासानी) की कहानी है जिन्होंने कॉलेज में आकर एबीसी के एडल्ट अर्थ पढ़े और अब जिंदगी में आगे बढ़ रहे हैं।
तीनों की शादी हो चुकी है, लेकिन उनकी पत्नियां अलग-अलग कारणों से उन्हें समय नहीं दे पा रही हैं। तीनों परेशान हैं कि क्या करें? तभी पता चलता है कि उनके कॉलेज में री-यूनियन हो रहा है।
बीते दिनों की रंगीनियों को याद करते हुए वे उसमें हिस्सा लेने जाते हैं। लेकिन तस्वीर बदल चुकी है। कॉलेज में सख्त प्रिसिंपल (प्रदीप रावत) आ चुका है। कॉलेज में लड़कियों को बुरी नजर से देखने वाले लड़कों को वह ऐसी खतरनाक सजा देता है कि लड़के किताब में राखी लिए घूमते हैं।
अगर लड़की उन्हें प्रेम पत्र दे तो वे उससे राखी बांधने का आग्रह करते हैं! ऐसे माहौल में तीनों दोस्तों की मुलाकात प्रिंसिपल की पत्नी, बहन और बेटी से होती है। क्रमशः जिनका नाम है ‘रोज’ ‘मैरी’ ‘मार्लो’।
इन सबकी ‘ग्रेंड मस्ती’ खतरनाक प्रिंसिपल की निगाहों से बच नहीं पाती और वह सबको सजा देने की ठान लेता है। इसमें संदेह नहीं कि फिल्म में आए अश्लील प्रसंगों को बहुत ठहर कर गढ़ा गया है। लेकिन कई जगह दृश्य जरूरत से ज्यादा खींचे गए हैं। इसी प्रकार कुछ घटनाओं का दोहराव फिल्म की कसावट को खत्म करता है। सभी ऐक्टरों ने वैसा काम किया है, जैसा डायरेक्टर ने चाहा है।
शब्दों और संवादों के दोहरे अर्थ पहले से आखिरी दृश्य तक यहां हैं। फिल्म की भाषा का अंदाजा आप इसके उस दृश्य से लगा सकते हैं जिसमें एक न्यूज चैनल पर रिपोर्टर सनसनीखेज अंदाज में चीख रहा है, ‘इन दिनों एक गैंग ने देश भर में दहशत का माहौल पैदा कर रखा है।
गैंग के मेंबर देश में लोगों के घरों में घुस कर... नंगे... अपने कपड़े उतार कर... नंगे होकर... सोती हुई महिलाओं के साथ रात भर बलात्कार करते हैं... और सुबह होते ही कहीं गायब हो जाते हैं... इस गैंग के बारे में और जानने के लिए देखते रहिए यही चैनल... ऑन योर टीवी... अगर आपको प्यारी है अपनी बहन बेटी और बीवी की इज्जत।’ फिल्म के बारे में कोई इसके उलट भी कह सकता है।