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एक्शन जैक्सनः एक्शन के साथ एडल्ट कॉमेडी भी

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आपमें हर हफ्ते फिल्मों से डेटिंग करने का कीड़ा है तो आपको कोई नहीं रोक सकेगा। उस पर आज तक आपकी अजय देवगन की फिल्मों से डेटिंग चली आई है, तब कंट्रोल कर पाना असंभव है। ऐसा नहीं है तो एक्शन जैक्सन के हॉल में जाने से पहले जरूर थोड़ा सोचें।
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जरूरी नहीं कि इस फिल्म का कीड़ा आपको कुर्सी पर आराम से बैठने दे। अजय की फिल्में पारिवारिक-मनोरंजक मानी जाती हैं। हल्के-फुल्के मजाक, साफ-सुथरा रोमांस और मजेदार मार-पीट।

लेकिन यहां ऐसा नहीं है। फिल्म में खून-खराबे के लंबे सीन बच्चों के लिए नहीं हो सकते। कॉमेडी भी ऐसी कि एडल्ट शरमा जाएं।

सोनाक्षी के जिम्मे क्या?

नायिका खुशी (सोनाक्षी सिन्हा) का लक बड़ा ‘बैड’ है। हर कोई हैरान रह जाता है जब वह हीरो को बिना अंडरवीयर के देखती है और उसका लक ‘गुड’ में बदल जाता है! अब गुड लक पाने के लिए खुशी बार-बार हीरो को बिना अंडरवीयर के देखना चाहती है। सेंसर ने फिल्म को यू/ए प्रमाणपत्र दिया है।

अजय देवगन यहां डबल रोल में हैं। पहला मुंबई में दो नंबरी काम करके जिंदगी बिताने वाला विशी और दूसरा हांगकांग के अंडरवर्ल्ड डॉन जेवियर फोंसेका (रेमो फर्नांडिज) का दायां हाथ, एजे। एजे को जेवियर की बिगड़ैल बहन मरीना (मनस्वी ममगई) पसंद करती है और हर हाल में पाना चाहती है। मगर एजे की प्रेमिका है अनुष्का (यामी गौतम)। दोनों शादी करने वाले हैं।

मरीना की खुशी के लिए जेवियर अनुष्का की जान लेने की कोशिश करता है और एजी के साथ उसकी दुश्मनी हो जाती है। अनुष्का और होने वाले बच्चे की खातिर एजे अंडरवर्ल्ड को त्याग देता है, मगर जेवियर उसे ढूंढता है। एजे अंततः उसकी निगाह से बच नहीं पाता। मुंबई में एजे और विशी साथ-साथ हैं और यहां से शुरू होता है हमशक्लों का ड्रामा।

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बासी फार्मूलों पर टिकी फिल्म

145 मिनट की यह फिल्म बासी फार्मूलों के आधार पर बिना तर्कों के बेसिर-पैर अंदाज में बढ़ती है। जहां निर्देशक कहानी का तर्क समझाता है, वहां दर्शकों हंसी आती है। ऐसी फिल्में आपका मनोरंजन करती हैं तो अवश्य जाएं। अजय पुराने अंदाज में हैं। नया यह कि इस बार उनके हाथ में तलवार है। एक्शन दृश्यों पर निर्देशक प्रभुदेवा ने खूब मेहनत की है।

कंप्यूटर ग्राफिक्स की मदद से उन्हें आकर्षक बनाने में वक्त भी लगाया गया है। जबकि कहानी के मामले में वे उतने ही लचर साबित हुए। खास तौर पर पहला हिस्सा बेहद जड़ है। सोनाक्षी की कॉमिक टाइमिंग अच्छी है। यही बात कुणाल रॉय कपूर पर लागू होती है।

यामी सुंदर-सुशील वाला फील देती हैं। मनस्वी ममगई ने अपनी पहली फिल्म में ‘हॉट’ दिखने के लिए बिकनी पहनी है तो टॉप उतारा है। परंतु मुद्दा ऐक्टिंग का है, जिस पर उन्हें मेहनत करनी होगी। फिल्म का संगीत कर्णप्रिय है, लेकिन गानों का स्तर गिर रहा है।

सिने-संगीत में सैंया पारंपरिक रूप से छैला, छबीला और छलिया रहा है। यहां एक गाने में सैंया ‘छिछोरा’ हो गया है। फिल्म में अजय देवगन का संवाद है, ‘पसंद आया तो दिल में, नहीं तो दिमाग में भी नहीं आता।’ फिल्म न दिल में आती है, न दिमाग में।
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