नया साल, नया सुपर हीरो, नई कहानी, नई सी दिखने वाली मार्वल की सिनेमाई दुनिया। केविन फाइगी के मार्वल स्टूडियोज से ऐसी नई नई उम्मीदें मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स (एमसीयू) देखते देखते बड़े हुए बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों को हर साल की शुरुआत में रहती हैं। इस साल एमसीयू की एक और फीमेल सुपरहीरो परदे पर है। पहली बार तो नहीं क्योंकि ये किरदार दर्शक इसके पहले ‘हॉकआई’ में देख चुके हैं। न सुन पाना उसकी कमजोरी दुनिया को लगती है, लेकिन जो वह सुन सकती है, वह किसी और के बूते की बात नहीं। शरीर भी उसका पूरा साथ नहीं है लेकिन जो बात उसके भागने में बाधा बन सकती थी, उसी बात को वह अपनी शक्ति बना लेती है। आपदा में अवसर शायद इसी को कहते हैं। ये कहानी है ईको यानी माया लोपेज की जिससे दर्शक एमसीयू की वेब सीरीज ‘हॉकआई’ में मिल चुके हैं। इस बार कहानी सिर्फ माया की है और जिसका नाम ही माया हो, उसकी कहानी का विस्तार कहां कहां तक और कैसा कैसा होगा, सिनेमा के दर्शक अंदाजा लगा ही सकते हैं।
वेब सीरीज 'ईको'
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अतीत की प्रतिध्वनि
पांच एपिसोड की ये तयशुदा सीरीज ‘ईको’ की कहानी ‘डेयरडेविल’ सीरीज में दिखे खलनायक फ्रिस्क से जुड़ी है। एमसीयू की कहानियों के किरदारों की अलग अलग कहानियां उनके अतीत, वर्तमान और भविष्य की कल्पनाओं से समेटकर बताने की कोशिशें मार्वल स्टूडियोज की ज्यादा सफल नहीं रही हैं। फिर भी वेब सीरीज ‘ईको’ से, जैसा कि इसके नाम का अर्थ है, प्रतिध्वनि ये सुनाई देती है कि एमसीयू के कर्ताधर्ता बीते कुछ साल में बेतरतीब तरीके से फैल चुके रायते को अब समेटने की कोशिश में हैं। एनाहाइम में ‘डेयरडेविल’ की वापसी का एलान होने के बाद से चार्ली कॉक्स का एमसीयू की कहानियों में दिखना शुरू ही हो चुका है। इस सीरीज में वह अपनी सीरीज की सीक्वल का आधार बनाते दिखते हैं। मार्वल प्रबंधन ने एक काम और किया है वेब सीरीज ‘ईको’ में और वह ये कि वह अपनी कहानियों का प्रस्तुतीकरण ‘डेयरडेविल’ और मार्वल की दूसरी शुरुआती सीरीज के आसपास ले जाने की सराहनीय कोशिशें कर रहा है।
वेब सीरीज 'ईको'
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माया का मायावी संसार
माया लोपेज की कहानी यहां उसके अतीत से लेकर वर्तमान के किस्सों को बताती है। अपने पिता के साथ अपना घर-परिवार सब छोड़कर न्यूयॉर्क में आ बसा उसका बचपन ही उसके किरदार की शुरुआत नहीं है। माया की कहानी सदियों पीछे जाती है। इतना पीछे कि वहां की कहानियों के किरदार आज की कहानी से आ मिलते हैं। इसी से पता चलता है कि आखिर वह इतनी शक्तिशाली और फुर्तीली कैसे हैं। हाथों के निश्चित इशारों से की जाने वाली बातचीत की भाषा (साइन लैंग्वेज) उसका दुनिया से संवाद करने का इकलौता तरीका है और जब वह जुबान कम और लातें ज्यादा चलाती है, तो उसका द्वंद्व कौशल देखने लायक होता है। एक खास विचारधारा, समुदाय या कहें कि संप्रदाय के इतिहास को खंगालती ये वेब सीरीज माया लोपेज के किरदार को एमसीयू में स्थापित तो कर देती है लेकिन अनगिनत किरदारों की कहानियों की पहेलियों में खोते जा रहे एमसीयू को अब अपनी हर सीरीज और कहानी से पहले अपने पूरे एमसीयू का एक रीकैप जरूर चलाना चाहिए।
वेब सीरीज 'ईको'
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सिडनी फ्रीलैंड का नया सा निर्देशन
वेब सीरीज ‘ईको’ को इसकी अलग और असल पहचान दी है निर्देशक सिडनी फ्रीलैंड ने। इसमें उन्हें अपनी रचयिता मैरियन डायर और उनकी टीम की एमी रार्डिन जैसे लेखकों की खूब मदद मिली है। माया के अतीत को चॉकटाव कबीलों से जोड़ते हुए ये कहानी 13वीं शताब्दी से लेकर 21वीं शताब्दी तक सिर्फ पांच एपिसोड में जिस तरह सफर करती है, वह थोड़ा थकाऊ तो है लेकिन इस कहानी का प्रस्तुतिकरण दर्शकों को लगातार कहानी से बांधे रखता है। ये सीरीज सिनेमा के छात्रों को इस नजरिये से भी देखनी चाहिए कि दृश्य और श्रव्य माध्यम में किसी किरदार को जब इन गुणों से ही हीन किया जाता है, तो उसके किरदार को कितने अलहदा तरीके से मौजूदा तकनीकी विकास के सहारे पेश किया जा सकता है।
वेब सीरीज 'ईको'
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पिक्चर अभी बाकी है..
माया लोपेज की कहानी जहां फ्रिस्क से जुड़ती है, वहीं एमसीयू का ये सिरा डेयरडेविल तक जा पहुंचता है। फ्रिस्क के किरदार में विन्सेंट डीओनोफ्रियो एमसीयू के शुरुआती खलनायकों में शुमार रहे हैं। उनका भी अपना एक अलग फैनबेस एमसीयू के दर्शकों के बीच रहा है। वह शैतानी खलनायक के बजाय एक इंसानी खलनायक है और यही बात उसे इस काल्पनिक दुनिया के दूसरे खलनायकों से अलग स्थापित करती है। विन्सेंट का अभिनय शुरू से लाजवाब रहा है। उनके चेहरे के भावों का उनकी दैहिक भाषा के साथ कमाल का समन्वय रहा है। और, फ्रिस्क के इस किरदार के सहारे ही फ्रीलैंड को मदद मिलती है माया को एक ऐसे किरदार के रूप में पेश करने की जो खलनायक न होकर इस सीरीज में प्रतिनायक के रूप मे स्थापित हो जाता है।
वेब सीरीज 'ईको'
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
एलेक्वा कॉक्स का करिश्मा
माया लोपेज के किरदार में एलेक्वा कॉक्स का अभिनय इस सीरीज का सबसे दर्शनीय पहलू है। जिन दृश्यों में सौ फीसदी सन्नाटा रचकर सिडफील्ड इस किरदार को उसके नैसर्गिक रूप में प्रस्तुत करने की कोशिशें करते हैं, वे दृश्य इस सीरीज की जान हैं। एलेक्वा ने सीरीज के एक्शन दृश्यों में भी कमाल दिखाया है। अपनी कमियों को अपनी खूबियां बनाकर जब माया लड़ती है तो उन एक्शन दृश्यों को फिल्मेकिंग के संदर्भबिंदु बनते देखना खासा रुचिकर है।