दूरदर्शन वाले दिनों यानी कि असल भारत की कहानी कहती सीरीज तारा फ्रॉम सातारा की कहानी स्थापित हो चुकी है। एक नृत्य शिक्षक की बेटी तारा अपने खिलंदड़ स्वभाव के चलते परेशानी का सबब बन चुकी है। बड़ी बहन अपने पिता की अर्जुन है औऱ तारा एकलव्य। दोनों की शख्सीयत का टकराव दरअसल नई सदी के युवाओं की सोच भी दर्शाता है। नई पीढ़ी भले माता पिता की सीखों को सुनने को तैयार न हो लेकिन वह जिम्मेदार है और अपने सपने पूरे करने के लिए सही रास्ता चुनना भी जानती है।
तारा फ्रॉम सातारा का सबसे मजबूत विभाग है इसके कलाकारों की अदाकारी। उपेंद्र लिमये जैसे अभिनेता को हिंदी टेलीविजन पर देखना ही सुख देता है। रोशनी वालिया की अपनी फैन फॉलोइंग रही है और इस बार उन्होंने ग्लैमर का मेकअप उतार जमीनी हकीकत की मिट्टी को मजबूती से थामा है। अमिता खोपेकर और उर्वशी परदेशी ने सीरियल की कहानी को मजबूत कंधे दिए हैं।
अदाकारी के अलावा सीरीज तारा फ्रॉम सातारा अपनी ताजगी और कहानी कहने के अनोखे अंदाज के लिए भी देखी जा सकती है। सुधार की गुंजाइश हर जगह होती है, वैसी ही यहां भी है। थोड़ा बैकग्राउंड म्यूजिक बेहतर हो सकता है और थोड़ा प्रकाश संयोजन में मेहनत की जरूरत है। महीने भर का हो चुका ये शो आपकी दिन भर की थकान दूर करने का बिल्कुल सही इंतजाम है।