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Daaku Maharaaj Review: 64 साल के बालैया की हीरो बनने की एक और कोशिश नाकाम, ‘डाकू महाराज’ का इसलिए हुआ सरेंडर

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डाकू महाराज फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
डाकू महाराज (हिंदी)
कलाकार
नंदमुरि बालकृष्ण , बॉबी देओल , रवि किशन , प्रज्ञा जायसवाल , श्रद्धा श्रीनाथ , सचिन खेडेकर , प्रदीप रावत , रवि काले और उर्वशी रौतेला आदि
लेखक
बॉबी कोल्ली , के चक्रवर्ती रेड्डी , हरिमोहन कृष्ण और विनीत पोतलुरी
निर्देशक
बॉबी कोल्ली
निर्माता
साई सौजन्या और सूर्यदेवरा नागा वामसी
रिलीज:
24 जनवरी 2025
रेटिंग
2/5

अगर आपको सिनेमा के अलावा सियासत में भी दिलचस्पी है तो साउथ के दिग्गज अभिनेता व नेता एन टी रामाराव का नाम तो आपने सुना ही होगा। उनके पोते जूनियर एनटीआर को भी आप जानते ही होंगे। उनकी पिछली फिल्म ‘देवरा’ भले फ्लॉप रही लेकिन ‘वॉर 2’ अभी आनी बाकी है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि नंदमूरि बालकृष्ण उनके सगे चाचा हैं। यानी कि जूनियर एनटीआर के पिता नंदमुरी हरिकृष्ण के भाई। तेलुगू देशम पार्टी के बड़े नेता हैं। दो बार विधायक रह चुके हैं। अपने घर आए फिल्म निर्माताओं को कथित रूप से गोली मार चुके हैं और अब ‘डाकू महाराज’ के रूप में बड़े परदे पर हैं। ये उनकी 109वीं फिल्म है। नंदमुरी बालकृष्ण चलता फिरता सिनेमा हैं। पहली बार उनकी कोई फिल्म हिंदी में डब होकर सिनेमाघरों तक पहुंची है, हालांकि मूल फिल्म की रिलीज के साथ ही ऐसा नहीं हो पाया। 

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डाकू महाराज फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सौ करोड़ रुपये में बनी फिल्म साउथ में 108 करोड़ रुपये कमाकर हिंदी पट्टी के सिनेमाघरों में पहुंचे तो उत्सुकता होना लाजिमी है। कहानी ये एक ऐसे महाराज की है जो अपराधियों को खत्म करने के लिए अपराध का सहारा लेता है। चाय बागान के मालिक कृष्णमूर्ति और उनकी नातिन वैष्णवी को केंद्र में रखकर बुनी गई कहानी के पहिये की हर तीली तानी तो यही सोचकर गई है कि दर्शक इससे चौंकेंगे लेकिन मामला जम नहीं पाता है क्योंकि हिंदी सिनेमा के दर्शक इस तरह की फिल्में पचास साल पहले से देख रहे हैं। खदान मजदूरों का शोषण, किसानों को खेत के लिए पानी मिलने की दिक्कतें, बांध बनने के आड़े आने वाले ठाकुर, शोषकों के घर में ब्याही गई सरकारी अफसर, ये सब ऐसे टेंटपोल हैं जिनकी कहानियां हिंदी फिल्मों के दर्शक भर भरकर देख चुके हैं। हां, एक इंजीनियर को डाकू महाराज का तमगा मिलने वाला पूरा सीक्वेंस जरूर प्रभावित करता है लेकिन 64 साल के हो चुके नंदमुरी बालकृष्ण उर्फ बालैया का तिलिस्म अब कमजोर हो चला है। 

डाकू महाराज फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘डाकू महाराज’ की कहानी इसकी सबसे कमजोर कड़ी है और इसकी पटकथा तमाम हिंदी फिल्मों के कॉकटेल की तरह है। अच्छी बात ये है कि फिल्म लिखने वालों ने इसमें कुछ अच्छे महिला पात्र गढ़ने की कोशिश की है। नंदिनी के किरदार में श्रद्धा श्रीनाथ इस पूरी फिल्म का वह उत्प्रेरक तत्व हैं, जिनकी कोशिशों से ही ये फिल्म दो घंटे से अधिक समय तक दर्शकों को बांधे रखती है। प्रज्ञा जायसवाल ने भी अच्छा काम किया है। उर्वशी रौतेला फिल्म की दूसरी सबसे कमजोर कड़ी हैं। उनके सोशल मीडिया को देखो तो लगता है कि वही फिल्म की असली हीरोइन हैं, लेकिन ढोल दूर के ही सुहाने होते हैं, ये फिल्म देखकर समझ आता है।

डाकू महाराज फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
नंदमूरि बालकृष्ण की बतौर हीरो इस फिल्म में उनको देखना ही सबसे बड़ी चुनौती है। उनके साथ साथी कलाकारों की लंबी चौड़ी फौज है जिनमें से सचिन खेडेकर साउथ सिनेमा में अपनी जगह पक्की कर चुके हैं। प्रदीप रावत बरसों से ऐसे किरदार करते आ रहे हैं। फिल्म में सरप्राइज आइटम हैं बॉबी देओल और रवि किशन। बॉबी देओल ने बताते हैं कि ये फिल्म ‘एनिमल’ से पहले साइन की थी। उन्होंने जोर हालांकि फिल्म में वैसा ही लगाया है। मामला उनका जमा नहीं हैं। उनसे बेहतर काम रवि किशन का है। रवि जितनी देर परदे पर रहते हैं, रंग जमाए रहते हैं।
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डाकू महाराज फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म का तकनीकी पक्ष बहुत सुस्त है। बॉबी कोली का निर्देशन साधारण है। उनकी निर्देशन क्षमता भी सीमित दिखती है। ऐसा कुछ वह फिल्म में रचते नहीं है जो दर्शकों को टकटकी बांधकर फिल्म देखने को विवश कर दे। गाने ठीक ठाक से ही है। एस तमन का संगीत जितनी कोशिश करता है हिंदी पट्टी के लोगों को लुभाने की, उतना ही उसके बोल गानों को कर्कश बनाते रहते हैं। हां, विजय कन्नन की सिनेमैटोग्राफी अच्छी है। वेंकट के ने एक्शन दृश्यों में भी रोमांच भरने की कोशिश बढ़िया की है। लेकिन, फिल्म की एडिटिंग कमजोर है। प्रचार फिल्म का माशा अल्ला है। हिंदी संस्करण कब रिलीज हुआ, कहां रिलीज हुआ, दर्शकों को पता ही नहीं है। 
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