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Chandu Champion Review: रणवीर के बाद कबीर ने अब कार्तिक से कराई कमाल अदाकारी, कलात्मक फिल्म का भविष्य संकट में

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चंदू चैंपियन रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
चंदू चैंपियन
कलाकार
कार्तिक आर्यन, भाग्यश्री बोरसे, भुवन अरोड़ा, यशपाल शर्मा, विजय राज, राजपाल यादव, श्रेयस तलपदे, सोनाली कुलकर्णी आदि
लेखक
कबीर खान, सुमित अरोड़ा, सुदीप्तो सरकार
निर्देशक
कबीर खान
निर्माता
साजिद नाडियाडवाला
रिलीज
14 जून 2024
रेटिंग
3/5

कोई इंसान इतना मशहूर हो कि लोग उसके बारे में करीब करीब सब जानते हो तो भला उस पर बनी फिल्म देखने कोई क्यों ही जाएगा? उदाहरण के लिए चाहें तो ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ और ‘मैं अटल हूं’, ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’, ‘थलाइवी’, ‘इंदु सरकार’, ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ को गिन सकते हैं। और, अगर किसी इंसान के बारे में लोगों ने कभी कुछ सुना ही न हो तो क्या उसकी बायोपिक देखने को भीड़ सिनेमाघरों में उमडेंगी? इस सवाल का जवाब पाने के लिए ‘सिर्फ एक बंदा काफी है’, ‘महाराज’ आदि फिल्मों के नाम गिन सकते हैं। ये दोनों फिल्में सीधे ओटीटी की राह पर रहीं। हिंदी सिनेमा में बायोपिक फिल्म बनाना अपने आप में एक बड़ी चुनौती रहा है। अधिकतर फिल्में बायोपिक की बजाय हैजियोग्राफी (स्तुति गान) बनकर रह जाती हैं। ‘भाग मिल्खा भाग’, ‘12वीं फेल’ जैसी फिल्में उम्मीदें जगाती हैं लेकिन इन दोनों फिल्मों में जो एक खास बात रही, वह ये कि ये कहानियां किताबों में रही हैं। और, वहां से फिल्मी पर्दे पर पहुंची। कार्तिक आर्यन के करियर की पहली बायोपिक ‘चंदू चैंपियन’ इन्हीं सारी पंक्तियों के बीच में कहीं खोई एक फिल्म है।

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Kartik Aaryan Interview: उन्होंने मुझे करियर की पहली फिल्म, पहली हिट दी, उनकी एक आवाज पर मैं हाजिर मिलूंगा
 

चंदू चैंपियन के सेट पर कार्तिक आर्यन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सिर्फ कार्तिक आर्यन की फिल्म
‘चंदू चैंपियन’ कार्तिक आर्यन की फिल्म है। जी हां, ये सिर्फ कार्तिक आर्यन की ही फिल्म है। वह उन मुरलीकांत पेटेकर के किरदार में हैं जिन्होंने घर वालों से छुपकर दंगल सीखा। अखाड़े में गांव के दामाद को हराया तो गांव से भागना पड़ा। भागते भागते फौजी बने। फौज में भरती हुए ओलंपिक का गोल्ड मेडल जीतने का सपना लेकर और जब गोल्ड मेडल मिला, तब तक उनके जिस्म में नौ गोलियां पैबस्त हो चुकी थीं। वह लंबे समय तक कोमा में रह चुके थे। कमर के नीचे का हिस्सा पूरी तरह बेकार हो चुका था। आत्महत्या की कोशिश कर चुके थे और, जिस रतन खत्री की बायोपिक ‘मटका किंग’ दो दिन पहले प्राइम वीडियो के लिए नागराज मंजुले ने बनानी शुरू की, उसके जुए के धंधे यानी मटका पर सट्टा भी लगा चुके थे। मुरलीकांत पेटकर की ये कहानी सुनने में वाकई बहुत रोचक है। कहानी फिल्म में वहां से शुरू होती है जहां बुजुर्ग मुरलीकांत थाने में भारत के राष्ट्रपति के खिलाफ ‘एफआईआर’ कराने पहुंचे हैं। भारत के किसी भी थाने या अदालत में भारत के राष्ट्रपति के खिलाफ मुकदमा न लिखा जा सकता है और न ही चलाया जा सकता है। ये एक सम्मान है भारत के संविधान का अपने राष्ट्रपति के लिए। फिल्म हालांकि मौजूदा राष्ट्रपति के बजाय पूर्व राष्ट्रपतियों के नामों के साथ शुरू होती है। लेकिन, फिल्म का ये टेकऑफ इसकी पहली बड़ी गलती है।

भाग्यश्री बोरसे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सही पटकथा गढ़ने में चूके कबीर
फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ की कहानी ऐसी है जिसे फिल्मों मे दिलचस्पी रखने वालों को तो छोड़िए, महाराष्ट्र की शख्सियतों के बारे में जानकारी रखने वालों को भी कम ही पता होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समाज के अनजान लेकिन विलक्षण कार्य करने वाली शख्सियतों को पद्मश्री देने की मुहिम के दौरान ही मुरलीकांत पेटकर को पद्मश्री पुरस्कार तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों मिला और निर्देशक कबीर खान ने भी ये फिल्म उसके बाद ही बनाने की तरफ ध्यान दिया। इस कहानी का ताल्लुक आम दर्शक से सीधे इसलिए नहीं जुड़ता है क्योंकि ये एक व्यक्ति की अपनी जिद को पूरा करने और उसके लिए जी जान लगा देने की कहानी है। ये एक वैयक्तिक विकास की कहानी है जिसमें समाज के लिए ज्यादा कुछ है नहीं। खेल पत्रकार नयनतारा के रूप जाल में भटकने के चलते बॉक्सिंग का फाइनल हारने वाला अध्याय इस फिल्म में मुरलीकांत का टर्निंग प्वाइंट हो सकता था, लेकिन उस लम्हे को और बाद में उसी लम्हे को टाइगर अली के साथ दोहराने के हाईलाइट प्वाइंट रचने में कबीर अली पूरी तरह चूक गए।

चंदू चैंपियन रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कार्तिक की अब तक की बेहतरीन फिल्म
फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ देखने के जो गिनती के तीन कारण है और जिनकी वजह ये फिल्म थ्री स्टार रेटिंग भी पा सकती है, उनमें सबसे पहला कारण है कार्तिक आर्यन की अदाकारी। कार्तिक ने अब तक बॉय नेक्स्ट डोर जैसे किरदार खूब किए हैं। ‘धमाका’ में उन्होंने कुछ नया करने की कोशिश की और बुरी तरह विफल रहे। ‘फ्रेडी’ में उनका अभिनय कमाल का रहा लेकिन इसे देखने वाले ही गिनती के रहे। करण जौहर ने जब उन्हें ‘दोस्ताना’ से निकाला था तो निर्माता साजिद नाडियाडवाला ने उन्हें संभाला था। ‘सत्यप्रेम की कथा’ के बाद साजिद के साथ कार्तिक की ये दूसरी फिल्म है। और, कार्तिक ने इस फिल्म के लिए वाकई बहुत मेहनत की है। सोशल मीडिया पर तैरती फोटोशॉप फोटो पर न भी जाएं तो भी फिल्म में कार्तिक की मेहनत नजर आती है। दिक्कत बस ये है कि फिल्म में उन्हें सहारा देने वाला कोई दूसरा दमदार कलाकार नहीं है। ये फिल्म सिर्फ कार्तिक आर्यन की है।

चंदू चैंपियन रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
साथी कलाकारों से नहीं मिला सहारा
कहने को फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ में विजय राज, राजपाल यादव, भुवन अरोड़ा, यशपाल शर्मा, श्रेयस तलपदे और सोनाली कुलकर्णी जैसे मंजे हुए कलाकारों की पूरी फौज है लेकिन इन कलाकारों का फिल्म में ‘एपिसोडिक’ इस्तेमाल इन्हें फिल्म के मददगार के रूप में स्थापित नहीं होने देता। विजय राज की कास्टिंग भी यहां इसलिए ठीक नहीं कही जा सकती क्योंकि वह इसके पहले फिल्म ‘शाबाश मिठू’ में तापसी पन्नू के कोच का किरदार निभा चुके हैं। उन्हें कार्तिक आर्यन के कोच की भूमिका में देखने पर बार बार वह फिल्म याद आती रहती है। विजय राज के साथ दिक्कत ये भी है कि उनका एक खास किस्म का खुद पर गुरूर उन्हें खुद को किरदार में खोने नहीं देता। वह किरदार को ओढ़ने की बजाय किरदार को विजय राज ओढ़ा देते हैं। और, ये किसी भी कलाकार के लिए खतरे की निशानी से कम नहीं है। फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ देखने का जो दूसरा कारण है, वह ये साथी कलाकार नहीं बल्कि फिल्म की शूटिंग में की गई इसकी प्रोडक्शन डिजाइन टीम की मेहनत है और तीसरा कारण है कबीर खान का निर्देशन।
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चंदू चैंपियन रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

रेशम सी फिसलती हकीकत कबीर के सिनेमा की
निर्देशक के तौर पर कबीर खान की पिछली फिल्म ‘83’ की खूब तारीफ हुई थी। फिल्म में रणवीर सिंह ने कमाल की अदाकारी भी की। लेकिन, फिल्म नहीं चली। कबीर खान ने शायद इसकी विफलता दर्शकों की मानसिकता पर डालकर ही ‘चंदू चैंपियन’ बनाने का काम शुरू किया होगा, लेकिन कायमगंज, फर्रुखाबाद की अपनी जड़ों की तरफ कबीर कभी लौट सके तो उनकी फिल्ममेकिंग में किरदारों की हकीकत बेहतर तरीके से चमक सकेगी। उनकी फिल्मों से कहानी के सूती से ज्यादा रेशम के करीब होने का एहसास झलकने लगा है। किरदारों पर मौसम की मार इसलिए भी शायद नजर नहीं आती क्योंकि वह अपने कलाकारों से धूप में मेहनत नहीं कराते हैं। यशराज फिल्म्स से शुरू हुआ कबीर खान की फिल्मों का सिलसिला ‘बजरंगी भाईजान’ के बाद से ही डोलता रहा है। इसके बावजूद कार्तिक आर्यन जैसे उभरते सितारे उन पर आगे भी भरोसा करते रहें, इसके लिए उन्हें अपने सिनेमा को थोड़ा और कल्पनाशील, थोड़ा और जिंदगी के करीब रखना ही होगा।

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