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Blurr Movie Review: तापसी पन्नू ने फिर दिखाया ओटीटी पर अपना दम, थ्रिलर फिल्मों के शौकीनों के लिए जी5 का तोहफा

सार

फिल्म 'ब्लर' स्पेनिश साइकोलॉजिकल थ्रिलर 'जूलियाज आइज' की हिंदी रीमेक है, जिसकी कहानी  नैनीताल की पृष्ठभूमि पर आधारित है। जहां गौतमी (तापसी पन्नू) और गायत्री (तापसी पन्नू) नामक दो जुड़वा बहने रहती हैं।
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ब्लर रिव्यूू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
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Movie Review
ब्लर
कलाकार
तापसी पन्नू , गुलशन देवैया और कृतिका देसाई
लेखक
अजय बहल और पवन सोनी
निर्देशक
अजय बहल
निर्माता
तापसी पन्नू , विशाल राणा और प्रांजल और मानव दुर्गा
ओटीटी
जी5
रिलीज डेट
9 दिसंबर 2022
रेटिंग
3/5

विस्तार
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तापसी पन्नू पिछले कुछ वर्षों से थ्रिलर स्पेशलिस्ट बन गई हैं। 'बदला', 'गेम ओवर', 'हसीन दिलरुबा', 'लूप लपेटा' और 'दोबारा', जैसी थ्रिलर फिल्में के बाद अब 'ब्लर' ओटीटी पर रिलीज हो रही है। इस साल 'लूप लपेटा', 'दोबारा', 'शाबाश मिट्ठू' के बाद तापसी पन्नू की 'ब्लर' चौथी फिल्म है। 'ब्लर' को तापसी पन्नू अपने तरीके से बनाना चाह रही थी इसलिए उन्होंने फिल्म का निर्माण खुद ही किया है। यह फिल्म स्पेनिश साइकोलॉजिकल थ्रिलर 'जूलियाज आइज' की हिंदी रीमेक है। फिल्म में तापसी पन्नू ने दो जुड़वा बहनों का किरदार निभाया है।

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ब्लर रिव्यूू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
नैनीताल की वादियों की कहानी
फिल्म 'ब्लर' की कहानी  नैनीताल की पृष्ठभूमि पर आधारित है। जहां गौतमी (तापसी पन्नू) और गायत्री (तापसी पन्नू) नामक दो जुड़वा बहने रहती हैं। इसी बीच एक दिन गायत्री अपने पति नील  (गुलशन देवैया) के साथ अपनी बहन के घर पहुंचती है, तो उसका फंदे से लटकता हुआ शव पाती है। दोनों पुलिस को सूचित करते हैं। पुलिस को  जांच के बाद मामला खुदकुशी का केस लगता है। लेकिन गायत्री को भरोसा नहीं, वह अपनी बहन की मौत की वजह के  तलाश में लग जाती है। इसी बीच गायत्री पर जानलेवा हमला होता है, लेकिन वह बच जाती है। इसके बाद उसका पति एक राज बताता है, जिसे सुनकर वह आग बबूला हो जाती है। इतनी सारी समस्याओं के बीच गायत्री अपनी बहन गौतमी की मौत का रहस्य से पर्दा उठा पाने में सफल होती है।

ब्लर रिव्यूू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

रोमांच के टूटते धागे
थ्रिलर फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि फिल्म से दर्शकों का रोमांच अंत तक बना रहता है। लेकिन 'ब्लर' देखने के बाद ऐसा रोमांच नही रहता है। तापसी पन्नू ने जुड़वा बहन का किरदार निभाया है, दोनों किरदार में काफी समानता है। गायत्री अपनी बहन की  मौत का पता लगाते लगाते अपनी आंखों की रोशनी खो देती हैं और अपनी बहन की तरह अंधी हो जाती है, यहां यह लॉजिक समझ में नहीं आता कि गायत्री अपनी बहन गौतमी की तरह अंधी क्यों हो जाती है? जुड़वा बहन होने के नाते यह जरूरी नहीं कि जो बीमारी एक बहन को हो वह बीमारी दूसरी भी बहन को हो।

ब्लर रिव्यूू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

कसौटी तर्क की
डॉक्टर गायत्री को सलाह देते है कि अगर आंख का  जल्द ऑपरेशन नहीं हुआ, तो उसकी आंखों की रोशनी कभी भी जा सकती है। इतना ही नहीं प्रकाश उसकी आंखों के लिए जहर की तरह है। अपनी व्यक्तिगत समस्या से जूझती गायत्री अलग-अलग लोगों से जाकर मिलती है। अपनी बहन के बारे में पूछताछ करती है। इस दौरान कोई शख्स उसका पीछा करने लगता है, इन सबसे बेपरवाह गायत्री को पता चलता है कि उसकी बहन का एक बॉयफ्रेंड भी था। गायत्री के साथ भी वैसी ही घटनाएं घटने लगती है, जैसी घटनाएं उसकी बहन के साथ घटी थी।  

ब्लर रिव्यूू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

खास लोगों को लक्षित फिल्म
पूरी फिल्म की कहानी गौतमी की हत्या किसने की, इसी के इर्द गिर्द घूमती है। कहीं उसकी हत्या में गायत्री के पति नील का हाथ तो नहीं है? इस तरह से कहानी आगे बढ़ती रहती है और महसूस होता है कि ऐसी कहानियां तो दर्शक पहले भी कई बार फिल्मों में देख चुके हैं।  फिल्म की कहानी सिर्फ तीन चार किरदारों के ही इर्द गिर्द घूमती और दर्शकों को यह समझते देर नहीं लगती कि गायत्री की बहन की हत्या किसने की होगी। तापसी पन्नू मानती है कि थ्रिलर फिल्में देखने का एक खास वर्ग है और उन्होंने 'ब्लर' का निर्माण उन्हीं खास वर्ग के दर्शकों को ध्यान में रखकर किया है। 

ब्लर रिव्यूू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

तापसी पन्नू के कंधों पर जिम्मेदारी
पूरी फिल्म तापसी पन्नू के कंधे पर ही टिकी हुई है, ऐसी स्थिति में तापसी पन्नू की जिम्मेदारी काफी बढ जाती है, लेकिन फिल्म में वह सिर्फ तापसी पन्नू ही नजर आईं, उन्हें अपने कंफर्ट जोन से निकलने की जरूरत है। फिल्म की कहानी तापसी पन्नू को पसंद आई और फिल्म 'ब्लर' को अपने तरीके बना सके, इसलिए उन्होंने फिल्म का निर्माण खुद ही किया। स्ट्रेसफुल किरदार में दर्शक तापसी पन्नू को काफी समय से देखते आ रहे हैं और अब उन्हें इससे हटकर कुछ अलग किस्म के किरदार निभाने चाहिए। तापसी पन्नू के अलावा फिल्म में गुलशन देवैया मजबूत कड़ी हो सकते थे, लेकिन उनको स्क्रीनस्पेस बहुत कम मिला, फिल्म के बाकी कलाकारों का भी अभिनय सामान्य है।

ब्लर रिव्यूू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अजय बहल का सुस्त निर्देशन
'बीए पास', और 'सेक्शन 375' जैसी फिल्में निर्देशित कर चुके अजय बहल इस बार 'ब्लर' में थोड़ा कमजोर पड़ गए, थ्रिलर फिल्मों की खासियत यह होती है कि दर्शक फिल्म से आखिरी तक जुड़े रहें, लेकिन फिल्म शुरु होने के पांच मिनट के बाद अपनी पकड़ खो देती है। अमूमन ऐसी फिल्मों की खासियत यह होनी चाहिए कि दर्शकों की उत्सुकता शुरू से लेकर अंतिम तक बनी रहे। फिल्म की खासियत सिर्फ इतनी सी है कि अंधी हो जाने के बाद भी एक लड़की किस तरह से अपनी बहन की  मौत के रहस्य का पता लगाने के पीछे अपनी जान तक की परवाह नहीं करती है।

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ब्लर रिव्यूू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

तकनीकी टीम ने दिखाया कमाल
फिल्म 'ब्लर' की शूटिंग नैनीताल में हुई है। सुधीर चौधरी की सिनेमैटोग्राफी आंखो को सुकून देती है। नैनीताल की खूबसूरत वादियों को सुधीर चौधरी ने बहुत खूबसूरती से पेश किया है। फिल्म के कुछ दृश्य लंबे है जिन्हें थोडी सी एडिट करने की जरुरत थी। फिल्म का गीत संगीत सामान्य है।  फिल्म की खासियत यह है कि फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक अच्छा है जो सीन को बांधे रखता है। इसका पूरा श्रेय केतन सोधा को जाता है।

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