जैकी श्रॉफ हिंदी सिनेमा के उन चंद सितारों में से हैं जो हमेशा सकारात्मक बातें ही करते दिखते हैं। कहीं किसी तरह का घमंड नहीं, किसी बात का आबंडर नहीं। जो दिल में है, वह कहते हैं और कभी किसी खेमे का हिस्सा नहीं बनते। बीती सदी के शो मैन रहे सुभाष घई ने उनको फिल्म ‘हीरो’ में हीरो का मौका दिया। जैकी श्रॉफ का शुरू से यही मानना रहा है कि जिंदगी खूबसूरत होती है और जिंदगी के हर एक एक पल को शिद्दत से जीना चाहिए। लेकिन कोई क्या करे, जब उसके जीवन में ऐसा भी समय आए कि उसे जीने का मन ही न करे। जब जिंदगी उसे बोझ सी लगनी लगे। फिल्म ‘लाइफ इज गुड’ इसी का उत्तर तलाशने की कोशिश करती है। कोई चार साल पहले ये फिल्म रिलीज होने वाली थी और तब से खिसकते खिसकते 2022 के आखिर तक आ पहुंची है। हाल ही में सम्पन्न हुए भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में भी इस फिल्म की काफी चर्चा रही।
जो भी है बस यही इक पल है..
'लाइफ इज गुड' की कहानी एक ऐसे इंसान रामेश्वर की है, जो अपनी मां की मौत के बाद अकेला हो जाता है और अपनी जीवन लीला समाप्त करना चाहता है। रामेश्वर अपनी मां से बहुत प्यार करता है, उसे लगता है कि मां के मौत के बाद उसकी खुशियां खत्म हो गई और मां के बिना जीने का कोई औचित्य नहीं। वह मां के साये को महसूस करता है, मानो कोई साया उसके पीछे-पीछे चल रहा हो। रामेश्वर धीरे-धीरे अपनी दुनिया को अपनी उंगलियों से फिसलता हुआ महसूस करता है और उस पर अवसाद हावी हो जाता है। उसे ऐसा लगता है जैसे उसके पास जीने के लिए कुछ भी नहीं है, जैसे वह जीवन के चक्रव्यूह में खो गया हो। वह इसे पूरी तरह से समाप्त करने पर विचार करता है। तभी छह साल की बच्ची मिष्टी, रामेश्वर के जीवन में आती है और रामेश्वर को फिर जिंदगी जीने का एक अवसर मिलता है।