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Bhooth Bangla Review: न पूरी तरह मजेदार, न पूरी तरह खराब; फिर कहां अटकी अक्षय-प्रियदर्शन की ‘भूत बंगला’?

सार

Bhooth Bangla Movie Review: हॉरर कॉमेडी फिल्म 'भूत बंगला' आज 17 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी यह फिल्म कैसी है? यहां पढ़िए रिव्यू
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'भूत बंगला' मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
भूत बंगला
कलाकार
अक्षय कुमार , तब्बू , वामिका गब्बी , राजपाल यादव , परेश रावल , मनोज जोशी , असरानी और मिथिला पालकर
लेखक
आकाश कौशिक , अभिलाष नायर और प्रियदर्शन
निर्देशक
प्रियदर्शन
निर्माता
एकता कपूर, शोभा कपूर, अक्षय कुमार
रिलीज डेट:
17 अप्रैल 2026
रेटिंग
2.5/5

विस्तार
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प्रियदर्शन और अक्षय कुमार की जोड़ी के साथ दिक्कत यही है कि आप चाहकर भी उम्मीद कम नहीं रख सकते। हेरा फेरी, फिर हेरा फेरी, भागम भाग, गरम मसाला, दे दना दन… ये सिर्फ फिल्में नहीं हैं, ये एक तरह का बेंचमार्क हैं। और ‘भूत बंगला’ देखते वक्त बार-बार यही लगता है कि फिल्म उस बेंचमार्क तक पहुंचने की कोशिश भी नहीं कर रही… बस उसके आसपास घूम रही है।

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'भूत बंगला' मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
कहानी
अर्जुन (अक्षय कुमार) लंदन से मंगलपुर अपने पुश्तैनी महल में आता है, बहन मीरा (मिथिला पालकर) की शादी कराने। लोकेशन कोई आम नहीं है। यह वही महल है, जिसके बारे में गांव वाले पहले से कहानियां सुनाते हैं। लेकिन शादी यहीं होगी, क्योंकि होनी है।
यहीं से फिल्म आपको टेस्ट करती है। आप मान लेते हैं तो आगे बढ़िए, वरना यहीं अटक जाएंगे। शादी की तैयारियों के साथ-साथ महल भी एक्टिव हो जाता है। अजीब हरकतें, अनचाहे हादसे, रहस्यमय मंदिर… सब कुछ होता है, लेकिन फिल्म इन्हें डराने के लिए नहीं, माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल करती है।
बीच में वामिका गब्बी का किरदार आता है, जो सब जानती भी है और कुछ छुपाती भी है। फिर दूसरे हिस्से में तब्बू आती हैं और कहानी को अतीत से जोड़ने की कोशिश होती है। समस्या यह नहीं है कि कहानी कमजोर है। समस्या यह है कि फिल्म खुद तय नहीं कर पाती कि इसे हल्का रखना है या गंभीर बनाना है। और सबसे बड़ा सवाल यही रह जाता है...'क्या हो रहा है', यह तो दिखता है लेकिन 'क्यों हो रहा है', यह ठीक से समझ नहीं आता।

'भूत बंगला' मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
अभिनय
अक्षय कुमार

अक्षय कुमार इस फिल्म को खींचते हैं, धकेलते हैं और कई बार बचाते भी हैं। जहां सीन कमजोर लगता है, वहां वह कुछ न कुछ कर देते हैं। लेकिन सच यह भी है कि यह उनका जाना-पहचाना जोन है। आपको सरप्राइज नहीं मिलता, बस भरोसा मिलता है।

राजपाल यादव
राजपाल फिल्म में आते ही बताते हैं कि नैचुरल कॉमेडी क्या होती है। उनके सीन लिखे हुए नहीं लगते, होते हुए लगते हैं। और ईमानदारी से कहें तो, कई बार वही फिल्म को पटरी पर रखते हैं जब बाकी चीजें डगमगाती हैं।

वामिका गब्बी
वामिका गब्बी अच्छी लगती हैं, सहज भी हैं, लेकिन फिल्म उन्हें ठीक से इस्तेमाल ही नहीं करती।
वह कहानी में हैं, लेकिन कहानी उन पर टिकी नहीं है।

तब्बू
तब्बू आती हैं और फिल्म अचानक सीरियस हो जाती है। वह अपने हिस्से को ईमानदारी से निभाती हैं, लेकिन स्क्रिप्ट उन्हें उतना स्पेस नहीं देती कि वह असर छोड़ सकें।

सपोर्टिंग कास्ट
परेश रावल और मनोज जोशी जैसे कलाकार हैं, लेकिन इस बार उनके पास करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है।
और फिर असरानी...उन्हें देखकर फिल्म थोड़ी देर के लिए बेहतर लगने लगती है। यह उनकी आखिरी फिल्म है और उनके कुछ सीन आपको सच में मुस्कुरा देंगे। शायद इसलिए भी कि उनमें वो पुरानी गर्माहट है, जो बाकी फिल्म में मिसिंग है।

'भूत बंगला' मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
निर्देशन
प्रियदर्शन यहां पूरी तरह गलत नहीं हैं, लेकिन पूरी तरह सही भी नहीं हैं। कुछ सीन में उनकी पकड़ दिखती है, फिर अचानक सब ढीला पड़ जाता है। फिल्म एक लय नहीं पकड़ती और यही सबसे बड़ी दिक्कत है

'भूत बंगला' मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
स्क्रीनप्ले
यहीं फिल्म हारती है। एक ही तरह का स्लैपस्टिक बार-बार दोहराया जाता है। शुरुआत में हंसी आती है लेकिन फिर बाद में दोहराव लगता है।  दूसरे हिस्से में कॉमेडी लगभग गायब हो जाती है और फिल्म सीरियस हो जाती है...लेकिन वहां भी उतनी पकड़ नहीं बनती।

'भूत बंगला' मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
लेखन
डायलॉग ठीक हैं, लेकिन टिकते नहीं...कॉमेडी कई जगह जबरदस्ती बनाई हुई लगती है, अपने आप निकलते हुए नहीं.. और यही वो जगह है जहां पुराने दौर की याद आती है। जब नीरज वीरा जैसे लेखक हालात को इस तरह लिखते थे कि हंसी अपने आप निकलती थी जैसे हेरा फेरी, फिर हेरा फेरी।
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भूत बंगला - फोटो : अमर उजाला
देखें या नहीं 
अगर आप पुराने प्रियदर्शन और अक्षय कुमार वाली कॉमेडी की उम्मीद लेकर जाएंगे, तो फिल्म आपके उम्मीद पर खरी नहीं उतरती।  हां, अगर आप हल्के मूड में, बिना ज्यादा सोच के सिर्फ टाइमपास के लिए जा रहे हैं, तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है। अक्षय कुमार, राजपाल यादव और असरानी के सीन आपको निराश नहीं करेंगे।  भूत बंगला पूरी तरह खराब फिल्म नहीं है, लेकिन उतनी अच्छी भी नहीं है, जितनी हो सकती थी।

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