फिल्म 'भाबीजी घर पर हैं: फन ऑन द रन' रिव्यू
- फोटो : एक्स (ट्विटर)
अभिनय
फिल्म की असली ताकत इसका अभिनय है। टीवी शो के मुख्य कलाकार आशिफ शेख (विभूति), रोहिताश गौर (तिवारी), शुभांगी अत्रे (अंगूरी) और विदिशा श्रीवास्तव (अनीता) अपने पुराने अंदाज में ही नजर आते हैं। अपने-अपने किरदारों में पूरी सहजता और चुटकियों वाली कॉमिक टाइमिंग डालते हैं।
साथ ही इस फिल्म में मूल शो के कई किरदारों की मजेदार वापसी भी देखने को मिलती है। सानंद वर्मा अपने ‘सक्सेना’ अवतार में फिर वही I Like It वाले डायलाॅग की एनर्जी लेकर आते हैं। योगेश त्रिपाठी दारोगा हैप्पू सिंह के रूप में अपनी ट्रेडमार्क कॉमिक स्टाइल से हंसी पैदा करते हैं।
सोमा राठौड़ रामकली तिवारी के रूप में ओवर-द-टॉप घरेलू हास्य फिर से स्क्रीन में डालती हैं। फिल्मी कास्ट भी दमदार है। मुकेश तिवारी अपने टफ, दबंग रंग में कहानी को पेस देते हैं। दिनेश लाल यादव (निरहुआ) देसी अंदाज और अपनी कॉमिक टाइमिंग से मजेदार सीन्स बनाते हैं।
रवि किशन अपनी हाई एनर्जी से फिल्म में मसालेदार असर जोड़ते हैं। वहीं बृजेंद्र काला अपनी सटल कॉमेडी से कई सीनों में जान डाल देते हैं।
फिल्म 'भाबीजी घर पर हैं: फन ऑन द रन' रिव्यू
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निर्देशन
निर्देशक शशांक बाली टीवी कॉमेडी का अंदाज अच्छी तरह जानते हैं, लेकिन फिल्म के फॉर्मेट में वही स्टाइल उतना असरदार नहीं हो पाता। फिल्म में साफ दिखता है कि स्क्रिप्ट टाइट नहीं है, एडिटिंग कई जगह ढीली लगती है। कई सीन बस जरूरत से ज्यादा खींचे हुए महसूस होते हैं।
विजुअल्स छोटे पैमाने पर हैं, हॉरर-गैंगस्टर-कॉमेडी का मिलाप थोड़ा बेमेल दिखता है। टीवी का फास्ट और चुटकीदार ह्यूमर तो मजेदार होता है। लेकिन लगभग दो घंटे की फिल्म को संभालने के लिए जिस गहराई और सिनेमाई जुड़ाव की जरूरत होती है, वह यहां कम पड़ जाता है।
फिल्म 'भाबीजी घर पर हैं: फन ऑन द रन' रिव्यू
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देखें या नहीं?
अगर आप शो ‘भाबीजी घर पर हैं’ के पुराने फैन हैं, उसके जाने-पहचाने किरदारों और हल्की-फुल्की कॉमेडी का मजा फिर से लेना चाहते हैं, तो यह फिल्म एक बार देखने लायक है। इसमें वही पुराने मजेदार पल मिल जाते हैं जो शो को पसंदीदा बनाते हैं।
लेकिन आप एक मजबूत कहानी, साफ-सुथरी स्क्रिप्ट और फिल्म जैसा बड़ा अनुभव ढूंढ रहे हैं, तो यह फिल्म आपको उतनी खास नहीं लगेगी। इसका एक्जीक्यूशन बहुत ही कमजोर है।