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Bhabiji Ghar Par Hain Movie Review: नॉस्टैल्जिया मजबूत पर टीवी वाले फॉर्मूला से बाहर नहीं निकल पाती यह फिल्म

सार

Bhabiji Ghar Par Hain Fun On The Run Movie Review: टीवी के चर्चित सीरियल ‘भाबीजी घर पर हैं’ फिल्म की शक्ल में दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए सिनेमाघरों में रिलीज हुई। जानिए, कैसी है यह कॉमेडी फिल्म? पढ़िए फिल्म ‘भाबीजी घर पर हैं’ का रिव्यू। 
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फिल्म 'भाबीजी घर पर हैं: फन ऑन द रन' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
भाबीजी घर पर हैं: फन ऑन द रन
कलाकार
आशिफ शेख , रोहिताश गौर , शुभांगी अत्रे , विदिशा श्रीवास्तव , सानंद वर्मा , योगेश त्रिपाठी , दिनेश लाल यादव (निरहुआ) , मुकेश तिवारी , रवि किशन और बृजेंद्र काला
लेखक
शशांक बाली , संजय कोहली , विहान कोहली और रघुवीर शेखावत
निर्देशक
शशांक बाली
निर्माता
संजय कोहली और बीनिफेर कोहली
रिलीज
6 फरवरी 2026
रेटिंग
2.5/5

विस्तार
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फिल्म ‘भाबीजी घर पर हैं : फन ऑन द रन’ टीवी के सुपरहिट शो ‘भाबीजी घर पर हैं’ की उसी दुनिया को बड़े पर्दे पर लेकर आता है, जहां पड़ोसियों की तकरार, गलतफहमियां और हल्की-फुल्की कॉमेडी हमेशा ऑडियंस का एंटरटेन करती है।

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फिल्म में वही पुराने किरदार, वही जाने-पहचाने मुहावरे और वही शरारत मौजूद है, जो शो को घर-घर में पॉपुलर बनाती है। बड़े पर्दे पर आकर फिल्म एक नॉस्टेल्जिक कोशिश तो लगती है लेकिन अपनी सिनेमाई मजबूती स्थापित करने में थोड़ा कमजोर साबित होती है।
निर्देशक शशांक बाली जो टीवी कॉमेडी में महारत रखते हैं, फिल्म में वही टोन ले आते हैं। फिल्म फॉर्मेट की कसावट यहां ज्यादा महसूस नहीं होती है।

कहानी

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फिल्म की कहानी विभूति मिश्रा और मनमोहन तिवारी के परिवारों की एक रोड ट्रिप से शुरू होती है। शुरुआत तो सामान्य लगती है, लेकिन धीरे-धीरे यह यात्रा कई गलतफहमियों, भागदौड़, गैंगस्टर ट्रैक और हल्के हॉरर ट्विस्ट में तब्दील हो जाती है।
अंगूरी भाभी को लेकर पैदा हुआ 'हॉरर' एंगल फिल्म में अचानक रोमांच जोड़ता है। वहीं विभूति और तिवारी की लगातार टकराहट ह्यूमर को गति देती रहती है। रास्ते में मिलने वाले नए किरदार, बदलते हालात और कई मजेदार परिस्थितियां कहानी में हल्का-फुल्का मनोरंजन जोड़ती हैं।
लेकिन स्क्रिप्ट का ढीलापन और कहानी का बिखराव इसे एक अच्छी वाली फिल्म बनने से रोक देता है।


 

फिल्म 'भाबीजी घर पर हैं: फन ऑन द रन' रिव्यू - फोटो : एक्स (ट्विटर)

अभिनय
फिल्म की असली ताकत इसका अभिनय है। टीवी शो के मुख्य कलाकार आशिफ शेख (विभूति), रोहिताश गौर (तिवारी), शुभांगी अत्रे (अंगूरी) और विदिशा श्रीवास्तव (अनीता) अपने पुराने अंदाज में ही नजर आते हैं। अपने-अपने किरदारों में पूरी सहजता और चुटकियों वाली कॉमिक टाइमिंग डालते हैं।
साथ ही इस फिल्म में मूल शो के कई किरदारों की मजेदार वापसी भी देखने को मिलती है। सानंद वर्मा अपने ‘सक्सेना’ अवतार में फिर वही I Like It वाले डायलाॅग की एनर्जी लेकर आते हैं। योगेश त्रिपाठी दारोगा हैप्पू सिंह के रूप में अपनी ट्रेडमार्क कॉमिक स्टाइल से हंसी पैदा करते हैं।
सोमा राठौड़ रामकली तिवारी के रूप में ओवर-द-टॉप घरेलू हास्य फिर से स्क्रीन में डालती हैं। फिल्मी कास्ट भी दमदार है। मुकेश तिवारी अपने टफ, दबंग रंग में कहानी को पेस देते हैं। दिनेश लाल यादव (निरहुआ) देसी अंदाज और अपनी कॉमिक टाइमिंग से मजेदार सीन्स बनाते हैं।
रवि किशन अपनी हाई एनर्जी से फिल्म में मसालेदार असर जोड़ते हैं। वहीं बृजेंद्र काला अपनी सटल कॉमेडी से कई सीनों में जान डाल देते हैं। 

फिल्म 'भाबीजी घर पर हैं: फन ऑन द रन' रिव्यू - फोटो : एक्स (ट्विटर)

निर्देशन
निर्देशक शशांक बाली टीवी कॉमेडी का अंदाज अच्छी तरह जानते हैं, लेकिन फिल्म के फॉर्मेट में वही स्टाइल उतना असरदार नहीं हो पाता। फिल्म में साफ दिखता है कि स्क्रिप्ट टाइट नहीं है, एडिटिंग कई जगह ढीली लगती है। कई सीन बस जरूरत से ज्यादा खींचे हुए महसूस होते हैं। 
विजुअल्स छोटे पैमाने पर हैं, हॉरर-गैंगस्टर-कॉमेडी का मिलाप थोड़ा बेमेल दिखता है। टीवी का फास्ट और चुटकीदार ह्यूमर तो मजेदार होता है। लेकिन लगभग दो घंटे की फिल्म को संभालने के लिए जिस गहराई और सिनेमाई जुड़ाव की जरूरत होती है, वह यहां कम पड़ जाता है। 

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फिल्म 'भाबीजी घर पर हैं: फन ऑन द रन' रिव्यू - फोटो : एक्स (ट्विटर)
देखें या नहीं?
अगर आप शो ‘भाबीजी घर पर हैं’ के पुराने फैन हैं, उसके जाने-पहचाने किरदारों और हल्की-फुल्की कॉमेडी का मजा फिर से लेना चाहते हैं, तो यह फिल्म एक बार देखने लायक है। इसमें वही पुराने मजेदार पल मिल जाते हैं जो शो को पसंदीदा बनाते हैं।
लेकिन आप एक मजबूत कहानी, साफ-सुथरी स्क्रिप्ट और फिल्म जैसा बड़ा अनुभव ढूंढ रहे हैं, तो यह फिल्म आपको उतनी खास नहीं लगेगी। इसका एक्जीक्यूशन बहुत ही कमजोर है।

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