करीब 22 साल के रहे होंगे अभिनेता एडी मर्फी जब पहली बार साल 1984 में वह अपने चिर परिचित किरदार एक्सेल फोले के रूप में बड़े परदे पर चमके। फिल्म थी, ‘बेवरली हिल्स कॉप’ और उन दिनों हॉलीवुड फिल्में इतनी बड़ी तादाद में तो भारत में रिलीज नहीं होती थीं, लेकिन इसके वीएसएच की मांग उन दिनों बहुत हुआ करती थी। अब इस फिल्म फ्रेंचाइजी की चौथी कड़ी सीधे ओटीटी पर रिलीज हुई है। फिल्म देखने के बाद इसे एक बार फिर से बड़े परदे पर देखने का मन भी करता है और कहा जा सकात है कि इस फ्रेंचाइजी की पहली फिल्म के बाद अपनी राह से भटकी बीच की दोनों फिल्मों के बाद ये फिल्म एक्सेल फोले नामक किरदार की जानदार और शानदार वापसी है।
बेवरली हिल्स कॉप-एक्सेल एफ
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सीक्वेल के सीजन का सितारा
फिल्म ‘बेवरली हिल्स कॉप’ की तीसरी कड़ी 1994 में आई और इसकी सीक्वल अब जाकर 2024 में। जी हां, किसी फिल्म का 30 साल बाद सीक्वल बनाना हिम्मत का काम है। लेकिन, निर्माता जेरी ब्रकहीमर जैसा काबिल कारोबारी हो तो उनका तो बस नाम ही काफी है। जेरी की खासियत ये है कि वह पुरानी हिट फिल्मों के सीक्वल बनाने में इतने निपुण हो चुके हैं, कि कब, कहां, कैसे और कौन सी फिल्म में किस सितारे को लेकर सीक्वल बनानी है, इसका उन्हें पूर्वानुमान जैसा होता रहता है, ‘टॉप गन मैवेरिक’ के बाद ‘बेवरली हिल्स कॉप एक्सेल एफ’ में उनकी इस काबिलियत की फिर से पुष्टि होती भी है।
बेवरली हिल्स कॉप-एक्सेल एफ
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अपनी धुन में मगन एडी मर्फी
फिल्म ‘बेवरली हिल्स कॉप एक्सेल एफ’ की सबसे बड़ी खासियत है इसमें एडी मर्फी का अपने नैसर्गिक अभिनय के साथ अपने चाहने वालों के सामने वापस लौटना। न वह अपने किरदार के साथ कोई ज्यादती करने की कोशिश करते हैं और न ही उनका ये किरदार खुद को निभा रहे कलाकार पर जरूरत से ज्यादा ही निर्भर होता है। एक लोकप्रिय किरदार की कहानी को आगे बढ़ाने का यही सबसे सही जरिया है। फिल्म ‘बैड बॉयज 4’ को नया करंट देने वाले विल बिएल यहां भी हैं। विल ने लंबे समय तक पुलिस विभाग में नौकरी की है और ऐसी फिल्मों में जान फूंकने के वह स्पेशलिस्ट बनते जा रहे है। मार्क मोलॉय की बतौर निर्देशक ये डेब्यू फीचर फिल्म है सो उन्होंने भी अपना सब कुछ इस फिल्म में झोंक दिया है।
बेवरली हिल्स कॉप-एक्सेल एफ
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
शुरू से ही रेस लगाती फिल्म
मार्क मोलॉय और फिल्म की राइटिंग टीम ने फिल्म ‘बेवरली हिल्स कॉप एक्सेल एफ’ को पहले फ्रेम से ही इसकी अपनी खास पहचान के हिसाब से बुना है। एक्सेल की परदे पर तीन दशक बाद वापसी हो रही है और फिल्म के पहले सीन से ही इस नॉस्ताल्जिया को बहुत चतुराई से दर्शकों से रिश्ता जोड़ते हुए उनके सामने परोसा गया है। कहानी का सिरा मार्क और उनकी टीम सीधे वहीं से पकड़ती है जहां से वह एक्सेल को एक्शन के बीचोबीच पहुंचा सकते थे। आइस हॉकी का मैच, डकैती की कोई योजना, लुटेरों का पीछा और फिर शहर के बीचो बीच जेसीबी, बाइक और कार चेज। और, इसके बाद फिल्म में दर्शकों को अपना रक्तचाप वापस सामान्य तक लाने में मदद कम ही मिलती है। फिल्म बनी बड़े परदे के हिसाब से है लिहाजा इसे बड़े टीवी तक तो देखना फिर भी ठीक है, मोबाइल और लैपटॉप पर इसका असर पूरा जाता रहता है।
बेवरली हिल्स कॉप-एक्सेल एफ
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बाप-बेटी के रिश्तों की इमोशनल कहानी
फिल्म ‘बेवरली हिल्स कॉप एक्सेल एफ’ में पुराने परिचितों के साथ एक्सेल फोले का जज्बाती रिश्ता तो बार बार सामने आता ही है, इस बार उसका सीधा खून का रिश्ता भी उसके किरदार को मजबूत बनाने में मदद करता है। उसका अपनी बेटी जेन सांडर्स से बना 36 का आंकड़ा बदलकर 63 जैसा हो पाए, इसके लिए एक्सेल काफी मेहनत और काफी एक्शन करता है। मामला जमता दिखता भी है लेकिन पुलिस की कहानी हो, बदमाशों की जुबानी हो और रवानी अपराध की न आए ऐसा भला कहां हो सकता है तो कहानी में टिवस्ट्स भी हैं, साजिशें भी हैं और आखिर तक फिल्म दर्शकों को कुछ न कुछ तिकड़म लगाकर बांधे रहती है। एडी मर्फी और उनके पुराने साथियों के पुनर्मिलन जैसी फिल्म ‘बेवरली हिल्स कॉप एक्सेल एफ’ इस सप्ताहांत सुकून से घर के सोफे में बैठकर पॉपकॉर्न खाते हुए देखी जा सकने वाली फिल्म है, जिनकी उम्र पचास के अरते परते हैं, उनको अपनी जवानी के दिनों का ये हीरो खूब भाएगा।