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Rautu Ka Raaz Review: नवाजुद्दीन अब बस नवाजुद्दीन हैं, ऊपर से पूर्व सीईओ शारिक पटेल राइटर हों तो फिर तो...

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रौतू का राज - फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
रौतू का राज
कलाकार
नवाजुद्दीन सिद्दकी , राजेश कुमार , अतुल तिवारी , अनूप त्रिवेदी और समृद्धि चंदोला आदि
लेखक
शारिक पटेल और आनंद सुरपुर
निर्देशक
आनंद सुरपुर
निर्माता
उमेश बंसल , आनंद सुरपुर और चिंटू श्रीवास्तव
रिलीज:
28 जून 2024
रेटिंग
1/5

बीते साल गोवा में हुए भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में ‘रौतू की बेली’ नाम की जिस फिल्म का प्रीमियर हुआ, वह फिल्म अब जाकर ओटीटी जी5 ‘रौतू का राज’ नाम से रिलीज हो पाई है। सिनेमाघरों में इसे रिलीज करने की जी स्टूडियोज की हिम्मत नहीं हुई। वैसे भी जी स्टूडियोज में इन दिनों उथल पुथल काफी दिख रही है। पुराने सीआईओ शारिक पटेल अपनी कुर्सी गंवाने के बाद इस फिल्म में लेखक के रूप में नजर आए हैं। नए सीईओ उमेश बंसल का नाम फिल्म निर्माताओं की लिस्ट में छप चुका है। उधर, एक और लेखक निर्देशक प्रवेश भारद्वाज की फेसबुक पोस्ट पढ़ने से पता चलता है कि ये कहानी तो उन्होंने आनंद सुरपुर के लिए दादर के एक ब्लाइंड स्कूल की पृष्ठभूमि में लिखी थी, जिसे आनंद ने अब ले जाकर उत्तराखंड में सेट कर दिया है।

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रौतू का राज - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सेटिंग और गेटिंग के हिंदी सिनेमा में चलने वाले खेल में जो जितना उस्ताद है, उसकी उतनी ही फिल्में बनती भी हैं और रिलीज भी हो जाती हैं। कुछ नहीं भी होती हों तो फिल्म मे काम करने वालों पर क्या ही फर्क पड़ता है। ऐसा ही कुछ फिलहाल नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ हो रहा है। अदाकारी दिखाने वाली फिल्मों का कोटा वह कब का पूरा कर चुके है। अब वह बस तिजोरी भरने वाली फिल्में कर रहे हैं। आपको याद है आपने आखिरी पार टिकट लेकर सिनेमा हॉल में नवाजुद्दीन सिद्दीकी की कौन सी फिल्म देखी थी? बहुत जोर देना पड़ेगा दिमाग पर। और बहुत मानसिक तैयारी करनी पड़ती है इन दिनों उनकी फिल्में ओटीटी पर देखने के लिए भी। नवाजुद्दीन की फिल्में अधिकतर अब ओटीटी पर ही आती हैं और अमजेन प्राइम वीडियो व नेटफ्लिक्स पर भले इनकी संख्या उतनी न हो जितनी ओटीटी जी5 पर नजर आती है। बाजार में हल्ला है कि जी5 में नई फिल्मों की बाईंग बंद है, और फिल्म ‘रौतू का राज’ देखकर ये बात सही भी लगती है कि ये ओटीटी फिलहाल अपनी पुरानी खरीद को बाजार में खर्च करने में जुटा है।

रौतू का राज - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘रौतू का राज’ उस तरह की फिल्म है जिस तरह की फिल्में कभी दूरदर्शन पर देर रात आया करती थीं। नाम सस्पेंस का, नतीजा सिफर। यहां कहानी का केंद्र नवाजुद्दीन सिद्दीकी है। जमाना पुराना कहानी है और जमाना पुराने गांव रौतू की पृष्ठभूमि में हैं। गांव भी ऐसा जिसमें अपराध नाम की चिड़िया तक दाना चुगने नहीं आती। लेकिन, ध्यान ये रखना है कि ये कहानी प्रवेश ने दादर के ब्लाइंड स्कूल में हुई एक मौत की पृष्ठभूमि में लिखी थी सो यहां इसी रौतू गांव में एक ब्लाइंड स्कूल की संरचना भी कर दी जाती है। अपराध नहीं है तो पुलिस भी नाम मात्र को ही होनी चाहिए थी। लेकिन यहां तीन स्टार पुलिस कोतवाल से लेकर नीचे के मेल-फीमेल स्टाफ तक पूरा थाना है। फिल्म का अपराध एक हॉस्टल वार्डन की मौत का और इस फिल्मी पुलिस को रोते रोते रौतू का ये क्राइम सीन दर्शकों को घुमाते रहना है।

रौतू का राज - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कभी गौर किया आपने कि पहाड़ों पर ये सस्पेंस फिल्में खूब सेट की जाती है। राइटर मुंबई की चिल्ल पौं से निकलकर कुछ पल चैन के बिताने पहाड़ों पर जाता है और वहीं एक फिल्म का बीज बोकर लौट आता है। फिल्म ‘रौतू का राज’ का बीज शायद कुछ ज्यादा ही पहले बो दिया गया था क्योंकि फिल्म देखकर इसमे किसी तरह की ताजगी वाला पौधा नजर नहीं आता बल्कि जटिल यादव के गांव के बरगद जैसी दिखती है फिल्म। नवाजुद्दीन सिद्दीकी को आप किरदार कोई भी दे दीजिए, वह विजय राज की तरह उसे अपने जैसा बनाने की पूरी मेहनत में लग जाते हैं। इन दिनों हाल फिलहाल की उनकी फिल्में देखिए तो कोरोना संक्रमण काल की पहली फिल्म ‘घूमकेतु’ के आसपास ही खड़ी मिलती हैं।
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रौतू का राज - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
नवाजुद्दीन सिद्दीकी बतौर अभिनेता चुक चुके हैं, उन्हें अपने पुनर्जन्म के लिए एक ऐसा निर्माता या निर्देशक चाहिए जो उनके भीतर से नवाजुद्दीन सिद्दीकी होने का गुमान निकाल सके। फिल्म ‘रौतू का राज’ जैसी फिल्मों में उनके आसपास दिखने वाले कलाकार तक उनके आभामंडल में ही गोते लगाते दिखते हैं। राजेश कुमार कहने को अच्छे कलाकार हैं। लेकिन पिन बोर्ड पर क्राइम सीन के किरदारों को लेकर ताने बाने को जैसे ही वह स्कॉटलैंड पुलिस से जोड़ते हैं, 'सैक्रेड गेम्स' से लेकर 2024 में अब तक की  क्राइम फिल्में और सीरीज देख देखकर पक चुका दर्शक माथा पीट लेता है। बाकी किरदार भी फिल्म के बस जैसे हैं, वैसे ही हैं। मैंने ये फिल्म किस्तों किस्तों में करके कोई पांच बार में पूरी की है। इसे एक सिटिंग में ही पूरा देखने वालों को जी5 की तरफ से एक साल का सब्सक्रिप्शन इनाम के तौर पर मिलना चाहिए। फिल्म की तकनीकी डिटेल जानने में मेरी कोई दिलचस्पी ही नहीं हुई। फिल्म देखने के बाद आपकी भी नहीं होगी, इसकी गारंटी मैं लेता हूं। 
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