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Aspirants Season 2 Review: अपूर्व कर्की के निर्देशन का नया रंग, सनी भैया व अभिलाष की ‘दुश्मनी’ में जान है

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एस्पिरेंट्स सीजन 2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
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Movie Review
एस्पिरेंट्स सीजन 2
कलाकार
नवीन कस्तूरिया , अभिलाष थपलियाल , शिवांकित सिंह परिहार , सनी हिंदुजा , नमिता दुबे , टेंगम सेलाइन और हरीश छाबड़ा
लेखक
दीपेश सुमित्र जगदीश और आशुतोष पंकज
निर्देशक
अपूर्व सिंह कर्की
निर्माता
अरुणाभ कुमार
रिलीज डेट
25 अक्तूबर 2023
रेटिंग
4/5

तो मेन चैप्टर पर आने से पहले थोड़ा रिवीजन कर लें? अभिलाष शर्मा का सिविल सर्विसेज की परीक्षाओं में बैठने का आखिरी मौका था। उसके दो दोस्त थे, श्वेतकेतु यानी एसके और गुरप्रीत सिंह यानी गुरी। एक खूबसूरत सी कॉमन दोस्त धैर्या। सब ओआरएन (ओल्ड राजेंद्र नगर) में रहकर आईएएस बनने के सपने देखा करते थे। सब के सब पदालिभाषी यानी एस्पिरेंट्स। आईएएस की तैयारी करने वाले एक दूसरे को यही कहकर बुलाते हैं और कितने लोग तैयारी करते हैं हर साल इस देश में आईएएस बनने की? कोई अंदाजा है! कोई 1100 पदों के लिए 10 लाख से ज्यादा उम्मीदवार यानी एक-एक पद के लिए एक-एक हजार युवाओं के बीच होती है गलाकाट प्रतिस्पर्धा। और, अगर इस प्रतिस्पर्धा के मानवीय, सामाजिक और अंतर्वैयक्तिक रिश्तों को कोई खोज निकाले, उस पर कहानी लिखे और उस पर सीरीज भी बना डाले तो कम से कम कितने लोग उसे देखेंगे? ये 10 लाख, इन 10 लाख के दोस्त और इन 10 लाख परिवारवाले तो शर्तिया ही देखेंगे। जी हां, वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स’ का पहला सीजन जब दो साल पहले यूट्यूब पर आया तो उसका पहला एपीसोड 56 मिलियन यानी करीब 5.60 करोड़ लोगों ने देखा। अब बारी दूसरे सीजन की है, लेकिन इस बार चौपाल जमी है अमेजन प्राइम वीडियो पर।

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एस्पिरेंट्स सीजन 2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर द वायरल फीवर यानी टीवीएफ अधिकतर इंजीनियरिंग पढ़कर आए युवाओं की कंपनी रही है। मनोरंजन सामग्री को बनाने का उनका अपना अलग नजरिया रहा है। टीम हालांकि अब काफी बिखर चुकी है। इसी कंपनी से अलग होकर एक और ऐसी ही कंपनी पोशम पा पिक्चर्स खुल चुकी है। लेकिन, कहते हैं कि किसी कंपनी की तरक्की इसी में है जब उससे निकले लोग वैसी ही एक दो कंपनियां तो और खोल ही लें। इस मायने में टीवीएफ नए भारत की मनोरंजन सामग्री की बुलंद तस्वीर है। और, इसकी चर्चित वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स’ का दूसरा सीजन उस भारत की तस्वीर दिखाने निकला है, जहां इथेनॉल को पेट्रोल का विकल्प बनाने पर बहुत ज्यादा जोर है। गन्ने के रस से बनने वाला ये एथेनॉल देश की तकदीर बदल सकता है, इस बहुत ही गूढ़ लेकिन महत्वपूर्ण बात को आगे बढ़ाते चलती है टीवीएफ की वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स 2’। टीवीएफ की एक और वेब सीरीज ‘परमानेंट रूम मेट्स’ भी प्राइम वीडियो पर ही हाल में रिलीज हुई है। ‘पंचायत’ का अगला सीजन भी आने वाला है और बताते हैं कि उसमें भी नए भारत की कुछ और भावी तस्वीरों पर बातें होने वाली हैं। टीवीएफ की वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स 2’ के दो स्पिन ऑफ भी पहले और दूसरे सीजन के बीच में आ चुके हैं, ‘एस के सर की क्लास’ और ‘सन्नी भैया’।

एस्पिरेंट्स सीजन 2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
दीपेश और आशुतोष की जुगलबंदी एसके सर की कोचिंग चल रही है। गुरी उसके साथ मिलकर एक नई कोचिंग का वादा भी कर चुका है। लगता है कि अभिलाष रामपुर का डीएम बनने के बाद भी उनके लिए जान हथेली पर लिए हाजिर मिलेगा। गुरी का काम मंदा है। बैंक का कर्ज बढ़ रहा है। अभिलाष चाहे तो उसके टेंडर पलक झपकते मंजूर हो सकते हैं। धैर्या के एनजीओ को बड़े वैश्विक पुरस्कार के लिए नामांकन हासिल हुआ है। लेकिन, ये कमबख्त ‘मर्फीज लॉ’। सब जानते हैं कि ये वैज्ञानिक नियम नहीं है। लेकिन, सब जब भी मुश्किल में आते हैं तो इसका जिक्र तो करते ही हैं ना। जिंदगी भी ऐसी ही है, वैज्ञानिक हों या न हो, इसके नियम इंसान मानने को मजबूर होता ही रहता है। वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स 2’ की कहानी दो अलग अलग काल खंडों में चल रही है। एक वहां रामपुर में, जहां अभिलाष को अपनी डीएम की पहली पोस्टिंग में पूरे नंबर पाने हैं, और एक वहां ओल्ड राजेंद्र नगर में, जहां चर्चित ‘ट्राइपॉड’ की कहानी बन बिगड़ रही है। साथ में कुछ नए दोस्त भी हैं। दीपा में अभिलाष की अभिलाषा झलक रही है। राधा राजेश के तरीकों में भी अभिलाष न्यूटन का तीसरा नियम तलाश रहा है। दीपेश और आशुतोष की लिखाई सीरीज की पहली जीत है।

एस्पिरेंट्स सीजन 2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अपूर्व सिंह कर्की का कमाल निर्देशन खैर, पूरी कहानी यहीं लिख देंगे तो फिर आपको सीरीज देखने का मजा भी कैसे आएगा। आराम से देखने वाली सीरीज है वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स 2’। इस साल की कमाल फिल्म ‘सिर्फ एक बंदा काफी है’ बनाने वाले अपूर्व सिंह कर्की पर इस बार जिम्मेदारी ज्यादा है। पिछला सीजन लोगों ने अरुणाभ कुमार के नाम की वजह से देखा। इस बार का सीजन उनके नाम है। दोनों सीजन के बीच में अपूर्व का कद सीरीज के बाकी सारे लोगों से कहीं बड़ा हो चुका है। लेकिन, बतौर निर्देशक उनके पैर जमीन पर हैं। वह अब भी शॉट्स को जमाने में यकीन रखते हैं। लाइब्रेरी में सनी भैया और एसके वाले सीन की लाइटिंग भी गजब है। एक और सीन है। कोचिंग क्लास में आने के लिए भारत के राष्ट्रपति की सिफारिश मांगी जाती है तो उनके कलाकार और लेखक वह भी ले आते हैं और बस इस एक सीन से अपूर्व के निर्देशन की बानगी भी मिल जाती है। अपूर्व का निर्देशन इस वेब सीरीज की जान पहले सीजन में भी था, इस सीजन में भी है और फिल्म ‘भैयाजी’ रिलीज होने के बाद तीसरे सीजन में भी बनी रहेगा, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।

एस्पिरेंट्स सीजन 2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
मानवीय रिश्तों की टूटती जुड़ती कड़ियां वेब सारीज ‘एस्पिरेंट्स 2’ की लिखाई आसान नहीं है। इसे समझने के लिए दर्शक के पहलू में एक सा दर्द तो होना ही चाहिए जो उसने सरकारी नौकरियों की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारियां करते पाला हो। रिटेन निकाल लेना एक तरह की कला है। एक बार ये फॉर्मूला क्रैक हो जाए तो कंपटीशन की तैयारियां करने वाले हर इंट्रेस निकालते जाते हैं। असल गोटी फंसती है इंटरव्यू और बाकी सारी चीजों में। यहां कहानी तीन दोस्तों के बनते बिगड़ते समीकरणों की है जहां एक को डीएम का एहसान लेना अपना हक लगता है और दूसरे को लगता है कि कहीं वह कुछ उल्टा सीधा न बोल दे। जिनको अभिलाष सनी भैया बोलता रहा, वह अब उसके अधीन काम कर रहा है। आईएएस और पीसीएस का अच्छा द्वंद्व इस कहानी में निखरकर सामने आया है।

एस्पिरेंट्स सीजन 2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कलाकारों ने खूब जमाई चौकड़ी कहानी, निर्देशन के बाद कलाकारों के अभिनय का जांचने का नंबर आता है तो पता चलता है वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स 2’ बनाने वालों ने सारे किरदार ऐसे सजाकर परोसे हैं जैसे आखिर में लिखा हो कोई भी पांच कलाकार (सवालों के जवाब) जांच लो। अभिलाष के किरदार में नवीन कस्तूरिया फिर कहर हैं। चूंकि रामपुर में मैंने अपनी रिपोर्टिंग के शुरुआती दिन ब्यूरो चीफ के तौर पर गुजारे हैं तो वहां की आबोहवा को समझने में नवीन की मेहनत समझी जा सकती है। डिस्टलरी मालिकों के आगे प्रशासन इसलिए कुछ मायने नहीं रखता क्योंकि उनका उठना बैठना उनके आकाओं क साथ होता है। दिल्ली में बीच डिनर से भागा डीएम जब रामपुर के लिए निकलेगा तो पहले मुरादाबाद में बैठे कमिश्नर के सामने हाजिरी भी लगाएगा। कालखंड मंडलायुक्त कार्यालय में नेहरू और अंबेडकर की तस्वीरों वाला है। मजदूरों की राजनीति के चक्कर में फंसे अभिलाष और संदीप के अहं का टकराव, दोनों का प्रशासनिक दांव पेंचों में अनजाने ही एक दूसरे के खिलाफ खड़े होते जाना और इस सब के बीच में एसके और गुरी की कहानी के साथ साथ दीपा और धैर्या की मनोदशाओं ने भी सीरीज को अच्छा संभाला है।
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एस्पिरेंट्स सीजन 2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
बिंज वॉच के लिए परफेक्ट सीरीज वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स 2’ की सिनेमैटोग्राफी असली भारत दिखाती है। दिन के उजालों की दृश्यावलियां चमकदार हैं तो रात के दृश्य भी रोशन दिखते हैं। चेहरों पर चार्ज करते कैमरे की गति का संगीत के साथ सामंजस्य बिठाने में इसकी संपादन टीम ने कमाल की मेहनत की है। तीसरे एपिसोड के खत्म होते वक्त ड्रामा बिल्डअप करने में सिनेमैटोग्राफर शिव प्रकाश, एडिटर प्रशांत रामचंद्रन और संगीतकार जोड़ी संगीत और सिद्धार्थ हल्दीपुर ने जो कमाल की हारमोनी दिखाई है, वही टीवीएफ की असली ताकत है। पोस्ट प्रोडक्शन टीम को भी इसके लिए पूरे नंबर मिलते हैं। सहायक कलाकारों को तलाशने और उन्हें किरदारों के हिसाब से परखने का काम कास्टिंग डायरेक्टर तरण बजाज ने बढ़िया किया है। प्रोडक्शन डिजाइनर बीवा महाजन और कॉस्ट्यूम स्टाइलिस्ट याशिका कक्कड़ ने मिलकर सीरीज का हुलिया बहुत आकर्षक बनाए रखा है। इस सप्ताहांत के लिए ये सीरीज परफेक्ट बिंज वॉच है। हां, कभी कंपटीशन एग्जाम की तैयारी की है तो मजा डबल हो जाएगा।

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