Alpha Movie Review in Hindi: आलिया भट्ट, शरवरी, अनिल कपूर और बॉबी देओल के अभिनय और एक्शन से सजी फिल्म ‘अल्फा’ रिलीज हो चुकी है। यहां बिना वक्त बर्बाद करिए जानिए कैसी है यह फिल्म..
फिल्म ‘धुरंधर’ के रिलीज होने के बाद बॉलीवुड में एक चीज तो बेहतर हो गई है। अब जो भी बैनर एक्शन फिल्में बना रहा है तो बहुत सोच समझकर बना रहा है। यशराज जैसे बड़े बैनर की हालिया रिलीज ‘अल्फा’ में भी इसका असर देखने को मिला।
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जब से इस फिल्म का टीजर रिलीज हुआ तभी से लोग इस फिल्म और फिल्म की अभिनेत्री आलिया भट्ट को ट्रोल करने में लगे हुए थे। जब ट्रेलर रिलीज हुआ तो एक वक्त को मुझे भी लगा कि मेकर्स ने ट्रेलर में ही सबकुछ दिखा दिया, अब फिल्म में बचा क्या?
पर हैरानी की बात है कि यह फिल्म अच्छी निकली। कम से कम यशराज बैनर के स्पाई यूनिवर्स की पिछली फिल्मों से तो बेहतर ही निकली। यहां पढ़िए क्यों खास है ‘अल्फा’?
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अल्फा मूवी रिव्यू
- फोटो : X
कहानी
फिल्म की शुरुआत 24 जुलाई 1999 से होती है। करगिल युद्ध में कर्नल विक्रांत काैल (अनिल कपूर) ने अपने कई फौजी खो दिए। उनके साथी कर्नल फतेह सिंह लखावत (बॉबी देओल) अपने खोए हुए साथियों का बदला लेने के लिए विक्रांत को अपने सीक्रेट प्रोग्राम अल्फा के बारे में बताते हैं।
फतेह, विक्रांत से कहता है कि वो भारत सरकार से इस प्रोग्राम को पास करवाने में उसकी मदद करें। अल्फा एक ऐसा प्रोग्राम है जिसमें फौजियों को ताकतवर बनाने के लिए उनकी बॉडी में अल्फा सीरम डाला जाएगा। यह सीरम उनके शरीर में रिएक्ट करने की क्षमता बढ़ जाती और घाव खुद-ब-खुद भरने की ताकत मिलती है। फतेह का मानना है कि इस सीरम की मदद से भारतीय फौजियों को हराना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो जाएगा।
इसी बीच विक्रांत काे पता चलता है कि उसकी पत्नी (दीया मिर्जा) प्रेग्नेंट है पर उसका जिंदा बचना मुश्किल है। विक्रांत चुपके से अपनी पत्नी को अल्फा सीरम दे देता है। इससे वो बच तो जाती है पर बेटी के पैदा होने के बाद वह दम तोड़ देती है।
जब फतेह को इस बारे में पता चलता है तो वह विक्रांत से कहता है सीरम उसने देश के लिए बनाया था ना कि व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए। फतेह, विक्रांत से उसकी बेटी सीता (आलिया भट्ट) छीनकर देश के नाम कर देता है।
वह विक्रांत को झूठ बोलकर यकीन दिलाता है कि उसकी बेटी मर गई है और चुपके से उसे ट्रेनिंग देकर तैयार करता है। दूसरी तरफ उसका अल्फा प्रोग्राम फेल हो जाता है और भारतीय सेना उसे चेरापूंजी में पोस्टिंग दे देती है।
आगे क्या हाेता है? क्या सीता कभी अपने पिता विक्रांत से मिल पाएगी? कौन है दुर्गा (शरवरी) जो इस काम में उसकी मदद करती है? यह सब जानने के लिए आप फिल्म देख सकते हैं।
अल्फा मूवी रिव्यू
- फोटो : X
अभिनय
फिल्म में अभिनय किसी का भी कमजोर नहीं है। आलिया ने एक्शन और एक्सप्रेशन दोनों ही कमाल दिए हैं। उनकी मेहनत इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर हिट करवा सकती है। शरवरी पूरी फिल्म में क्यूट लगी हैं पर जैसे ही एक्शन करने उतरती हैं, उनको देखकर मजा आता है।
अनिल कपूर हमेशा की तरह सधे हुए नजर आए हैं। बाॅबी देओल ने यहां थोड़ा निराश किया है। उनका काम तो अच्छा है पर बार-बार उनके मुंह से हरियाणवी सुनकर आपको बेहद अटपटा लगता है दिव्येंदु का काम तो हमेशा बढ़िया ही रहता है।
इन पांचों के अलावा फिल्म में ऋतिक रोशन का जो कैमियो है उसे देखकर आप खुश हो जाएंगे। पांच मिनट की उस झलक में ऋतिक एक्शन करते भी नजर आए।
अल्फा मूवी रिव्यू
- फोटो : X
निर्देशन
शिव रवैल ने इस फिल्म की कहानी प्रेडिक्टेबल होने के बाद भी इसे अच्छे से संभाला है। आमतौर पर हमने यशराज की स्पाई यूनिवर्स फिल्मों में काफी तमाशे, बिकनी शॉट्स, मेलोड्रामा और लव एंगल सब कुछ देखा।
यहां निर्देशक ने इन सभी चीजों को फिल्म से दूर रखा है। यहां तक कि गाना भी एक दो ही रखे हैं ताकि फिल्म की सीरियसनेस बनी रहे। फिल्म की लेंथ (2 घंटे 20 मिनट) भी कम ही रखी गई है।
हां, कहानी पर थोड़ा और काम किया जा सकता था। बॉबी देओल की बैक स्टोरी जो फिल्म में दिखाई गई है, वो चर्चा और विवाद की वजह भी बन सकती है। वहीं ऋतिक रोशन का एक्शन सीन बहुत ही कमजोर रह गया। गोलियाों को हाथ से पकड़ना और फिर वापस फेंक देना थोड़ा बचकाना हो गया। ऐसे कुछ और सीन भी बेहतर किए जा सकते थे।
अल्फा मूवी रिव्यू
- फोटो : वीडियो ग्रैब
क्या अच्छा?
फिल्म के एक्शन सीन अच्छे हैं।
कैमरा वर्क कुछ सीन में नए एंगल पेश करता है।
आलिया और शरवरी की जोड़ी फिल्म की खूबसूरती बनाए रखती है।
कबीर के रोल में जब ऋतिक रोशन की एंट्री होती है, वह सीन भी बेहद खास है।
एक्शन सीन में बैकग्राउंड म्यूजिक बढ़िया है।
अल्फा टीजर
- फोटो : सोशल मीडिया
क्या बुरा?
बॉबी देओल का हरियाणवी बोलना कई जगह खटकता है।
बॉबी के किरदार की बैक स्टोरी भी कुछ जगह अनरियलिस्टिक लगती है।
फिल्म की कहानी बेहद प्रेडिक्टिबल है।
ऐसी कहानी को बेहतर एडिटिंग से छिपाया भी जा सकता था।
देखें या नहीं?
फिल्म एक बार तो थिएटर में देख सकते हैं। अगर आपको टाइगर 3 और वॉर 2 पसंद आई थी तो यह फिल्म तो आ ही जाएगी। मजेदार बात यह है कि कहानी प्रेडिक्टेबल हाेने के बाद भी यह आपको बांधे रखती है। यह उनती बुरी भी नहीं जितना रिलीज होने से पहले ट्रोल की जा रही है।