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Short Film Review: निर्देशक राजीव बर्नवाल के हुनर का कैनवस बनी शॉर्ट फिल्म मास्टरपीस

Wed, 26 Jun 2019 05:41 PM IST
Avinash Pal मुंबई डेस्क, अमर उजाला

सार

डिजिटल रिव्यू: मास्टरपीस (शॉर्ट फिल्म)
कलाकार: अक्षय ओबेरॉय, सिमरत कौर, आकृति सिन्हा, कृपांशु द्विवेदी, माही कोहली आदि
निर्देशक: राजीव बर्नवाल
यूट्यूब चैनल: लार्जशॉर्ट फिल्म्स
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शॉर्ट फिल्म मास्टरपीस का एक सीन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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फिल्म निर्देशक अभिनव सिंह कश्यप को ‘टू सर विद लव’  के कैप्शन के साथ समर्पित चर्चित लेखक राजीव बर्नवाल की पहली शॉर्ट फिल्म मास्टरपीस कहानियां कहने की उनकी अनूठी कला की छोटी सी बानगी है। अपनी कहानियों को लेकर दिन रात मेहनत करने वाले राजीव में निर्देशन का ऐसा भी कौशल है, यह हिंदी सिनेमा को 19 मिनट 28 सेकंड की इस शॉर्ट फिल्म से अब जाकर पता चला है। फिल्म वाकई दिलचस्प है।

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मास्टरपीस कहानी है कॉफी शॉप में बैठकर खूबसूरत लड़कियों के स्केचेज बनाने वाले पेंटर अभीक की। बानी नाम की लड़की उसे अपने स्केचेज बनाते देखती है तो गुस्सा होती है। लेकिन गुस्सा प्यार में बदलता है और रिश्ता जिस रात एहसासों के उनवान पर होता है। अभीक को अपनी मास्टरपीस पेटिंग बनाने का मौका मिल जाता है। एक मकसद पूरा होता है तो अभीक निकल पड़ता है अपनी अगली मास्टरपीस में दिख सकने वाली नई लड़की की तलाश में।

राजीव बर्नवाल ने इस फिल्म को आज के दौर की दिलचस्प, रोमांचक और मनोरंजक फिल्में पसंद करने वाले दर्शकों को ध्यान में रखकर लिखा है। उनकी लिखी रणबीर कपूर स्टारर फिल्म बेशरम की मूल पटकथा जिन्होंने पढ़ी है, उन्हें पता है कि अभिनव अगर राजीव की स्क्रिप्ट पर ईमानदारी से टिके रहते तो फिल्म का नतीजा कुछ और होता। ये बात राजीव ने ये शॉर्ट फिल्म बनाकर साबित भी की है। 
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तकनीकी रूप से भी मास्टरपीस अच्छी फिल्म बन पड़ी है। छाया और प्रकाश के संयोजन में निर्देशकीय कौशल दिखता है। इसका बैकग्राउंड म्यूजिक भी उम्दा है और कहानी के क्लाइमेक्स से ठीक पहले आया आस्था का लिखा और सुजीत का गाया गाना भी। हां, गाना अगर रेडियो ऑन करते ही बजना शुरू हो जाता तो इसका असर बेहतर हो सकता था। फिल्म की फोटोग्राफी उम्दा है बस शुरू के दृश्यों में कलर करेक्शन्स थोड़ा ज्यादा हो गए हैं। दफ्तर के लंच ब्रेक में या फिर किसी आधे घंटे के सफर में ये फिल्म आपको जरूर देखनी चाहिए।
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