पिछले साल बधाई हो और अंधाधुंध जैसी हिट फिल्में देने के बाद आयुष्मान खुराना इस साल अपनी पहली फिल्म आर्टिकल 15 लेकर आ रहे हैं। इस फिल्म के टीजर को देखकर यही लगता है कि आयुष्मान अपनी फिल्मों की कहानियों को लेकर काफी सजग रहते हैं। विकी डोनर, दम लगा के हइशा, बरेली की बर्फी और बधाई हो जैसी आयुषमान की फिल्में सामाजिक मुद्दों पर चोट करती दिखती हैं। इसी कड़ी को आगे बढ़ाती फिल्म है आर्टिकल 15।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 से जुड़े सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्म आर्टिकल 15 के टीजर के शुरू में ही फिल्म का फोकस बता दिया गया है, समता का अधिकार। इसके बाद टीजर में आर्टिकल 15 की व्याख्या की गई है कि धर्म, जाति, नस्ल और जन्मस्थान इनमें से किसी भी आधार पर राज्य अपने किसी भी नागरिक से भेदभाव नहीं करेगा।
इस दौरान पृष्ठभूमि में चल रही सामाजिक हिंसा दिखाती है कि फिल्म धर्म, जाति और राज्य के नाम पर हो रही हिंसा के मुद्दों से प्रेरित है। करीब 27 सेकंड बाद पुलिस की वर्दी में आयुष्मान नजर आते हैं। फिर अगले ही दृश्य में आयुष्मान कुर्सी पर बैठ दीवार पर टंगी महात्मा गांधी की तस्वीर निहारते दिखते हैं और "फर्क बहुत कर लिया, अब फर्क लाएंगे" संवाद के साथ टीजर खत्म होता है।
फिल्म आर्टिकल 15 का टीजर दर्शकों के बीच उत्सुकता उत्पन्न करने में कामयाब रहा है। फिल्म के निर्देशक अनुभव सिन्हा की पिछली फिल्म मुल्क अपने विषय को लेकर काफी चर्चित रही थी और इस फिल्म से ही अनुभव सिन्हा रा वन के बाद वापस निर्देशन में लौटे थे। अनुभव ने अपने अनुभवों से सबक लिए हैं और कहानियों को अपनी फिल्मों का हीरो बनाना शुरू किया है। रा वन में उन पर शाहरुख खान जैसे सुपरस्टार का कद बढ़ाने की जिम्मेदारी थी, जिसमें वह विफल रहे। इस बार दांव पर आयुष्मान खुराना का स्टारडम है।