विनय पाठक की वजह से देखी गई फिल्म ‘420 आईपीसी’ की भी यही कहानी है। यहां उनका किरदार संदेहों के घेरे में हैं। सरकारी वकील सावक जमशेदजी के किरदार में रणवीर शौरी हैं। नौसिखिया वकील का किरदार रोहन मेहरा को मिला है। और, कुछ कुछ हिंदी फिल्म ‘जॉली एलएलबी’ जैसा मामला सजाने की कोशिश इसके लेखक निर्देशक मनीष गुप्ता करते हैं। फिल्म ‘420 आईपीसी’ की सबसे कमजोर कड़ी भी फिल्म की कथा, पटकथा और निर्देशन ही है। संवाद कहीं से भी किसी कानून पर आधारित फिल्म जैसे चुस्त, चुटीले और चंट नहीं दिखते और कहानी शुरू होती ही भरभरा कर गिर जाती है जब रणवीर शौरी पूरी तरह से ‘जॉली एलएलबी’ के बोमन ईरानी बनने की कोशिश करते नजर आते हैं।
फिल्म अभिनय के लिहाज से भी काफी कमजोर फिल्म कही जा सकती है क्योंकि इसमें विनय पाठक को छोड़कर किसी ने भी खास दिलचस्पी के साथ काम किया भी नहीं है। विनय पाठक से पिछली मुलाकात उनकी ही वेब सीरीज ‘स्पेशल ऑप्स’ के दौरान हुई। उनका चीजों को परखने, समझने का अपना एक अलग अंदाज है। टिप्पणियां भी वह यही सोचकर करते हैं कि इससे सामने बैठा शख्स उनको एक पढ़ा लिखा और कढ़ा हुआ अभिनेता समझे। जो कि वह हैं भी, बस कहानियों को चुनने में उनका ये अनुभव काम क्यों नहीं आता, गूढ़ प्रश्न है। अपनी तरफ से विनय पाठक ने अपने किरदार में पूरा जोर लगाया है लेकिन उनके बरसों पुराने साथी रणवीर शौरी फिल्म में तो हैं, पर इस बार उनकी टीम में नहीं हैं।
फिल्म ‘420 आईपीसी’ तकनीकी रूप से भी काफी कमजोर फिल्म है। एक कोर्ट रूम ड्रामा के लिए जिस तरह का शॉट डिवीजन और कैमरा मूवमेंट जरूरी होता है। राज चक्रवर्ती वैसा करने से चूक गए हैं। कानून पर आधारित फिल्मों में कैमरा दरअसल दर्शक की आंख बनना चाहता है। दर्शक चाहता है कि वह खुद कहानी की तफ्तीश करे और कैमरा यहां उसकी मदद करता है। लेकिन, फिल्म ‘420 आईपीसी’ में सिर्फ कैमरा ही नहीं बल्कि, इसका संपादन और इसका संगीत विभाग भी फिल्म के साथ न्याय नहीं कर पाता है। ये फिल्म देखना विशुद्ध रूप से समय की बर्बादी है। अगर आपको घर बैठे ही सिनेमा देखना है तो इंतजार कीजिए तीन हफ्तों को नेटफ्लिक्स पर जल्द ही ‘चंडीगढ करे आशिकी’ रिलीज होने वाली है।