गोल्ड मेडलिस्ट हैं मालिनी अवस्थी
मालिनी अवस्थी का जन्म 11 फरवरी 1967 को उत्तर प्रदेश के कन्नौज में हुआ। मालिनी अवस्थी हिंदी और अवधी गानों के अलावा ठुमरी और कजरी की भी प्रस्तुति देती हैं। लोकगायिका ने भातखंडे विश्वविद्यालय, लखनऊ से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। मालिनी अवस्थी पढ़ाई में बहुत होशियार रही हैं। वे हिंदुस्तानी क्लासिकल म्यूजिक में गोल्ड मेडलिस्ट भी हैं।
मालिनी अवस्थी-अवनीश कुमार अवस्थी
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पद्मश्री से हो चुकी हैं सम्मानित
इसके अलावा मालिनी अवस्थी ने लखनऊ यूनिवर्सिटी में मॉर्डन हिस्ट्री में एमए भी किया और फिर से गोल्ड मेडल हासिल किया। वे बनारस घराने की महान हिंदुस्तानी क्लासिकल गायिका पद्मा विभूषण विदुषी गिरिजा देवी की शिष्या रहीं। मालिनी भोजपुरी के अलावा अवधीऔर हिंदी भाषा में भी गाती हैं। गायन के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए भारत सरकार उन्हें साल 2016 में देश के बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित कर चुकी है। उन्हें सहारा अवध सम्मान (2003), यश भारती यूपी सरकार (2006), नारी गौरव (2000) और कालिदास सम्मान सहित कई और पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
मालिनी अवस्थी का परिवार
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आईएएस से रचाई शादी
मालिनी अवस्थी की निजी जिंदगी की बात करें तो उनका विवाह आईएएस अवनीश कुमार अवस्थी से हुआ, जो यूपी सरकार के प्रमुख सचिव के रूप में रिटायर हुए। मालिनी अवस्थी के दो बच्चे-बेटा अद्वतीय और बेटी अनन्या हैं।
मालिनी अवस्थी के फिल्मी गाने
मालिना अवस्थी ने कई फिल्मों के गाने भी गाए हैं। मालिनी अवस्थी ने फिल्मों में पार्श्वगायिका के रूप में पहला गाना फिल्म 'भोले शंकर' में गाया है। उन्हें पार्श्व गायन में ये पहला ब्रेक फिल्म के निर्देशक पंकज शुक्ल ने दिया। इसके अलावा उन्होंने 'दम लगा के हईशा' फिल्म का सुंदर सुशील गाना गाया, जिसमें अनु मलिक ने म्यूजिक दिया था। इसके अलावा वो 'बम बम बोले', 'एजेंट विनोद', 'इश्क' जैसी बॉलीवुड फिल्मों के लिए भी गाने गा चुकी हैं। मालिनी अवस्थी ने बतौर लेखिका सफर शुरू किया है। उनकी पहली किताब 'चंदन किवाड़' है। 02 फरवरी को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में किताब का विमोचन किया गया।