कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए नियमों पर रोक लगा दी है। इसमें मल्टीप्लेक्स सहित राज्य के सिनेमाघरों में सभी भाषाओं की फिल्मों के प्रदर्शन के लिए टैक्स को छोड़कर 200 रुपये की एक समान अधिकतम दर निर्धारित की गई थी।
याचिकाकर्ता के वकील ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति रवि वी होसमानी ने मंगलवार को मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया और अन्य सिनेमा मालिकों द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम रोक लगा दी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि सरकार ने टिकट की कीमतों को सीमित करने के लिए कर्नाटक सिनेमा (रेगुलेशन) अधिनियम के तहत मनमाने ढंग से एक प्रावधान पेश किया है। रोहतगी ने कहा, "अगर ग्राहक बेहतर सुविधाओं के लिए अधिक भुगतान करना चाहते हैं, तो 200 रुपये तय करने का आधार क्या है? एक समान सीमा लागू करने का कोई औचित्य नहीं है।" साथ ही उन्होंने उन्होंने बताया कि 2017 में जारी इसी तरह के एक सरकारी आदेश को उच्च न्यायालय ने निलंबित कर दिया था और बाद में राज्य ने वापस ले लिया था। इसके अलावा रोहतगी ने तर्क दिया कि कानून राज्य को टिकट की दरें तय करने का कोई अधिकार नहीं देता है और इस तरह का प्रतिबंध सिनेमा मालिकों के व्यवसाय करने के अधिकार को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
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कोर्ट ने क्या कहा?
कर्नाटक फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स (केएफसीसी) ने भी हस्तक्षेप करने की मांग की, लेकिन अदालत ने कहा कि यह मामला जनहित याचिका नहीं है और संस्था को अपने अधिकार क्षेत्र का औचित्य सिद्ध करना होगा। उच्च न्यायालय का अंतरिम रोक अगले आदेश तक लागू रहेगा।