कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य के सिनेमाघरों में टिकट की कीमत पर लगाई गई 200 रुपये की सीमा पर रोक बढ़ा दी है। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (डीआईपीआर) के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, कर्नाटक राज्य फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स ने मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के खिलाफ एक रिट याचिका दायर की थी। इस पर मुख्य पीठ ने 23 सितंबर को दिए गए रोक को बरकरार रखा। पीठ ने 30 सितंबर के अपने आदेश में टिकट बिक्री और रिफंड पर विस्तृत निर्देश जारी किए।
सभी डेटा सुरक्षित रखें
आदेश में कहा गया है कि सभी मल्टीप्लेक्स को बेचे गए हर टिकट का रिकॉर्ड रखने का निर्देश दिया जाता है। इन रिकॉर्ड में बिक्री की तारीख, बुकिंग का तरीका, भुगतान का तरीका, जीएसटी सहित वसूली गई राशि का रिकॉर्ड रखा जाए। इसके अलावा सभी नकद लेनदेन रसीदें और प्रबंधक द्वारा हस्ताक्षरित कैश रजिस्टर भी रखे जाएं।
उपभोक्ताओं को पैसे वापस दिए जाएं
अदालत ने आगे कहा कि अगर याचिकाकर्ता आखिरी फैसले में कामयाब होते हैं, तो इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा की गई सभी राशि (जीएसटी को छोड़कर) उसी भुगतान विधि के जरिए उपभोक्ताओं को वापस की जानी चाहिए। इसके बाद 45 दिनों के भीतर लाइसेंसिंग प्राधिकरण को धनवापसी प्रक्रिया योजना प्रस्तुत की जानी चाहिए।
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कर्नाटक हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
उपभोक्ता हितों की रक्षा करना है मकसद
उपभोक्ताओं और मल्टीप्लेक्स मालिकों, दोनों की ओर से अनुपालन पर जोर देते हुए, अदालत ने कहा कि उपभोक्ता भुगतान की गई टिकट की कीमत के हकदार हैं। मल्टीप्लेक्स को जरूरत पड़ने पर धनवापसी की सुविधा के लिए सभी बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा।
अदालत ने कहा कि इन उपायों का मकसद राज्य और सिनेमा संचालकों की चिंताओं को संतुलित करते हुए उपभोक्ता हितों की रक्षा करना है।
क्या है पूरा मामला?
आपको बता दें कि कर्नाटक सरकार ने अक्तूबर में एक अधिसूचना जारी कर टिकटों की अधिकतम कीमत 200 रुपये तय की थी। सरकार की दलील थी कि इससे सभी वर्ग के लोग सिनेमा देख पाएंगे। इस पर मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ने सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि यह व्यापार करने के अधिकार और समानता के अधिकार का उल्लंघन है। उनकी दलीलों को मानते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट की एकलपीठ ने सरकार के आदेश पर रोक लगा दी।