जॉन अब्राहिम और कावेरी दास
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कावेरी मानती हैं कि इस फिल्म में एक ऐसा किरदार है जो एक कठिन सवाल उठाता है। क्या वह देश की सेवा कर रहा है या उसे धोखा दे रहा है? उन्होंने कहा, 'हमने जब 'तेहरान' को चुना, तो उसमें सिर्फ एक कहानी नहीं देखी, बल्कि एक ऐसा विचार पाया जो आज के वक्त से बहुत जुड़ा हुआ है।'
'कहानी सबसे पहले आती है'
यह पूछा जाने पर कि वह हिंदी स्ट्रैटेजी बनाते वक्त सबसे पहले किस चीज पर ध्यान देती हैं? कावेरी ने साफ कहा, 'हमारे लिए सब कुछ कहानी से शुरू होता है। अगर कंटेंट कमजोर है तो सब्सक्राइबर या रिटेंशन कुछ मायने नहीं रखते। एक सच्ची, अच्छे इरादों से कही गई कहानी अपने आप लोगों से जुड़ जाती है।'
'अब ऑडियंस बदल चुकी है'
कावेरी का मानना है कि अब ऑडियंस की प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं। 'अब लोग सिर्फ चेहरों से नहीं, कहानियों की सच्चाई से जुड़ते हैं। स्टार पावर एक हद तक ध्यान खींच सकती है, लेकिन अगर कहानी में गहराई नहीं है तो ऑडियंस रुकती नहीं है।'
वह आगे बताती हैं, 'आज की ऑडियंस बहुत संवेदनशील और समझदार है। वह सामाजिक मुद्दों से लेकर थ्रिलर तक, हर तरह की कहानियां देखती है। उसे सिर्फ ग्लैमर या मसाला नहीं चाहिए, उसे ऐसी कहानियां चाहिए जिनमें भाव हो, सोच हो और कुछ असली हो।'
'जो सच्चा होता है, वही जुड़ता है'
जब हमने पूछा कि उनके प्रोजेक्ट्स में ऐसा क्या होता है जो लोगों को जोड़ता है, तो कावेरी ने कहा, 'हम हर शो में एक असली भावना खोजते हैं। कभी-कभी हमें चमक-धमक कम मिलती है, लेकिन जो इमोशनल गहराई होती है, वही सबसे ज्यादा असर छोड़ती है।'
उनके मुताबिक, 'जब कोई शो देखकर लोग बात करते हैं, या उससे भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं, तो वह एक्टिंग या स्टार कास्ट की वजह से नहीं होता, बल्कि उस सच्चाई की वजह से होता है जो कहानी में महसूस होती है।'