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'होमबाउंड' ने दुनिया को दिखाई बस्ती की कहानी, गांव वाले अब तक नहीं देख सके फिल्म, निर्माताओं से की यह मांग

Tue, 21 Oct 2025 08:39 PM IST
सिराजुद्दीन एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Homebound Screening: फिल्म 'होमबाउंड' की कहानी को दुनियाभर में खूब पसंद किया गया है। हालांकि यह फिल्म अभी उस गांव में नहीं दिखाई गई है, जहां से इसकी कहानी प्रेरित है।
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होमबाउंड - फोटो : एक्स
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विस्तार
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नीरज घेवान की फिल्म 'होमबाउंड' ने दुनियाभर में खूब तारीफें बटोरी हैं। इस फिल्म ने मोहम्मद सय्यूब और अमृत कुमार की दिल दहला देने वाली कहानी को वैश्विक मंच पर ला दिया है। हालांकि उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के गांव के लोग अभी भी फिल्म की स्क्रीनिंग का इंतजार कर रहे हैं।
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क्या है फिल्म की कहानी?
इस फिल्म का प्रीमियर मई में कान फिल्म समारोह में हुआ था। इसे 2026 के अकादमी पुरस्कारों के लिए भारत की आधिकारिक चयन सूची में चुना गया है। यह पिछले महीने सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म में बस्ती के बनकटी ब्लॉक के देवरी गांव के एक प्रवासी मजदूर अमृत कुमार की सच्ची कहानी दिखाई गई है, जो कोविड-19 महामारी के दौरान सूरत से घर लौटते समय एक हाईवे पर हीट स्ट्रोक से गिर पड़े थे, और उनके दोस्त मोहम्मद सय्यूब ने उनका साथ दिया था।

होमबाउंड - फोटो : सोशल मीडिया
गांव के लोगों ने नहीं देखी फिल्म
इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय समारोहों में खूब तारीफ मिली है, लेकिन देवरी के निवासियों का कहना है कि उन्होंने अभी तक फिल्म नहीं देखी है।
गांव से सबसे नजदीकी सिनेमा हॉल लगभग 25 किलोमीटर दूर है। जहां तक जाने का खर्च बहुत कम ग्रामीण उठा सकते हैं। उन्हें यह भी पता नहीं है कि यह फिल्म थिएटर में चल रही है या नहीं।

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सय्यूब के पिता की मांग
सय्यूब के पिता मोहम्मद यूनुस ने कहा 'यह कहानी हमारे बेटे के जीवन पर आधारित है। फिल्म निर्माताओं को यहां इसकी स्क्रीनिंग का प्रबंध करना चाहिए। इस सफलता का हिस्सा हमारे परिवार को भी मिलना चाहिए।
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होमबाउंड - फोटो : एक्स
गांव का हो विकास
गांव के प्रतिनिधि सुरेंद्र पटेल ने कहा कि देवरी के लोगों को इस बात पर गर्व है कि उनके बेटों की कहानी ने गांव का नाम दुनिया भर में फैलाया है। 
उन्होंने कहा, 'फिल्म की कमाई से अमृत के परिवार को और हमारे गांव के विकास को बल मिलना चाहिए। यहां एक ऐसा केंद्र भी होना चाहिए जो साहित्य और मानवता को प्रेरित करने वाली कहानियों को बढ़ावा दे।'

कम पैसे देने पर बोले घेवान
इस महीने की शुरुआत में, ऐसी खबरें आईं थीं कि 'होमबाउंड' की टीम ने कहानी के अधिकार के लिए अमृत के परिवार को 10,000 रुपये दिए थे।
घेवान ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा कि यह रकम अमृत के पिता रामचरण को उनके शुरुआती शोध के दौरान विदाई के तौर पर दी गई एक छोटी सी रकम मात्र थी।
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