Thor Love and Thunder Review
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कॉमेडी से सराबोर थॉर की कहानी
फिल्म ‘थॉर: लव एंड थंडर’ बहुत ही अतरंगी फिल्म है। थोड़ा सरल ढंग से समझना हो तो इस तरह समझिए कि अगर गोविंदा या वरुण धवन जैसे कलाकार को सुपरहीरो बना दिया जाए और उनकी कुदरती आदतें न बदली जाएं, वैसा। इस किरदार को निभाने वाले क्रिस हेम्सवर्थ ने बीते 11 साल में इस किरदार के साथ साथ जो यात्रा की है, उसका असर दोनों पर दिखता है। क्रिस हेम्सवर्थ अब तक आठ बार थॉर का किरदार निभाते मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स में दिख चुके हैं। सोलो हीरो के तौर फिल्म ‘थॉर: लव एंड थंडर’ उनकी चौथी फिल्म है। शुरुआती दौर का थॉर जहां बहुत ही उद्दंड और मनमौजी था, निर्देशक टाइका वाइटीटी के मार्वल स्टूडियोज पहुंचने के बाद ‘थॉर: रैग्नारॉक’ में उन्होंने क्रिस के साथ मिलकर जैसा थॉर बनाने की कोशिश शुरू की थी, उसका असल परिणाम अब फिल्म ‘थॉर: लव एंड थंडर’ में सामने आया है।
Thor Love and Thunder Review
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
भगवान के खिलाफ खड़ा ताकतवर शैतान
‘एवेंजर्स’ सीरीज की फिल्मों का खास हिस्सा रहा थॉर जब ब्लिप के बाद अपना कामकाज वलकाइरी को सौंप गार्जियन्स ऑफ गैलेक्सी के साथ निकल पड़ता है तभी से इस किरदार की अगली सोलो फिल्म को लेकर संभावनाएं और आशंकाएं एमसीयू फैंस के मन में घुमड़ने लगी थीं। फिल्म ‘थॉर: लव एंड थंडर’ देखकर समझ आता है कि ये गलत भी नहीं थीं। निर्देशक टाइका वाइटीटी बहुत ही मस्तमौला इंसान हैं। शूटिंग पर वह तय स्क्रिप्ट के साथ तो पहुंचते हैं लेकिन अपने कलाकारों को इसे अपने हिसाब से करने की पूरी छूट भी देते हैं। सृजन में अनुशासन कितना जरूरी है, वह इस फिल्म को देखकर समझा जा सकता है। फिल्म ‘थॉर: लव एंड थंडर’ का डीएनए इसे वहां ले जाता है जहां ईश्वर का एक पुजारी अपने निजी नुकसान का बदला लेने के लिए भगवान के विरुद्ध हो जाता है। शुरू के ये दृश्य दर्शकों को सिहरा देते हैं। मामला उम्मीदों भरा दिखने लगता है लेकिन, इस पूरी फिल्म में बहुत हिचकोले हैं और फिल्म चूंकि बहुत रफ्तार से आगे भागती है तो कहीं कहीं ये हिचकोले तकलीफ भी देने लगते हैं।
थॉर पर भारी पड़ी माइटी थॉर
फिल्म ‘थॉर: लव एंड थंडर’ की कहानी इसके नायक थॉर की कहानी नहीं है। एमसीयू फैंस के नजरिये से देखें तो निर्देशक टाइका वाइटीटी ने बहुत ज्यादा प्रयोग करके थॉर की दुनिया ही उलट पुलट दी है। ये उलट पुलट वाले प्रयोग मार्वल स्टूडियो के कर्ताधर्ता एमसीयू के फेज 4 में कुछ ज्यादा ही कर रहे हैं। बजाय कहानियों को मजबूत करने के तमाशों पर जोर देने से मार्वल की ये काल्पनिक दुनिया अपना आकर्षण कमजोर कर रही है। लेकिन, एमसीयू के फैंस को उम्मीद है कि ‘एवेंजर्स: एंडगेम’ के बाद की कहानी जल्दी ही पटरी पर आ जाएगी। खुद केविन फाइगी भी ये उम्मीद जता चुके हैं। फिल्म ‘थॉर: लव एंड थंडर’ एमसीयू के उन फैंस को तो खूब पसंद आएगी जो थॉर को सबसे ज्यादा पसंद करते हैं लेकिन एवेंजर्स के बाकी फैन्स को फिल्म से ज्यादा कुछ उम्मीद नहीं करनी चाहिए। हां, थॉर की प्रेमिका का कहानी में लौटना दिलचस्पी जरूर जगाता है। माइटी थॉर वाकई थॉर पर इक्कीस है।
क्रिस हेम्सवर्थ पर टिकीं फैंस की निगाहें
क्रिस हेम्सवर्थ का अपना एक अलग फैन बेस भी है, उसे झटका देने का काम इस बार नताली पोर्टमैन ने किया है। हथौड़ा अब उसके पास है और वह लोहा गर्म होने के इंतजार मे है। थॉर के पास अब शक्तिशाली कुल्हाड़ी है। दोनों के निशाने पर गोर है। रास्ते में जीयूस की भी एंट्री है और वल्काइरी की भी। थॉर की सेना में गार्जियन्स ऑफ गैलेक्सी भी शामिल होते हैं। एक मल्टीस्टारर फिल्म में सबसे ज्यादा मशक्कत होती है हर कलाकार के किरदार को ठहराव देने और उसकी कहानी में जरूरत के हिसाब से उसे परदे पर प्रस्तुत करने में। गोर की शैतानी का विस्तार ठीक से न होना, माइटी थॉर बन चुकी जेन फॉस्टर के साथ उसके रिश्तों में एहसास के नए रंग ठीक से न भर पाना और रसेल क्रो जैसे सितारे की काबिलियत का ठीक से इस्तेमाल न कर पाना फिल्म ‘थॉर: लव एंड थंडर’ की कमजोर कड़ियां है।
देखें कि न देखें
फिल्म ‘थॉर: लव एंड थंडर’ देखें कि न देखें पर चर्चा करना मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स के समर्पित प्रशंसकों के लिए कोई मायने नहीं रखता। साल 2008 से इस काल्पनिक लोक का हिस्सा बने इन प्रशंसकों के लिए एमसीयू की हर फिल्म किसी सिलेबस की तरह है। उसे देखना उनकी आदत भी बन चुकी है और जरूरत भी। मार्वल स्टूडियोज की ये फिल्म इन्हीं प्रशसंकों के लिए है और इसकी कामयाबी भी इनकी पसंद नापसंद पर निर्भर करती है।