भारत समेत दुनिया के ज्यादातर मुल्कों में शायद इस वक्त की सबसे बड़ी लड़ाई पहचान की है। जहां अपनी पहचान को ऊपर या दूसरे पर थोपने की कोशिशें की जा रही हैं। मैक्सिको से लेकर भारत के उत्तर पूर्व में गोरखालैंड की मांग करने वालों तक।
ऐसे में मैक्सिको के डायरेक्टर गीएर्मो डेल टोरो की फिल्म 'द शेप ऑफ वॉटर' का ऑस्कर अवॉर्ड्स में 13 नामांकन मिलना और बेस्ट फिल्म समेत चार ऑस्कर अवॉर्ड जीतना स्वभाविक है।
जिन लोगों ने ये फिल्म नहीं देखी है, उनके जहन में सवाल उठ सकता है कि इस फिल्म की कहानी क्या है?
फिल्म 'द शेप ऑफ वॉटर'
- फोटो : BBC
फिल्म की कहानी 1960 के दौर की है। जब सोवियत संघ और अमरीका के बीच शीतयुद्ध चल रहा था। फिल्म की मुख्य किरदार एलिसा (सैली हॉकिन्स) गूंगी हैं। जो बल्टीमोर की एक खुफिया हाई सिक्योरिटी सरकारी लैब में सफाई करती है।
इस लैब में एलिसा के साथ जेल्डा (ओक्टेविला स्पेंसर) भी काम करती है। जेल्डा के अलावा एलिसा पड़ोस में रहने वाले कलाकार जाइल्स (रिचर्ड जेनकिन्स) को जानती है। यही दो लोग एलिसा के अपने हैं।
फिल्म 'द शेप ऑफ वॉटर'
- फोटो : BBC
इन लोगों के अतीत की कहानी की झलक भी फिल्म में मिलती है। जिस लैब में एलिसा काम करती है, वहां एक वैज्ञानिक डॉक्टर हॉफस्टेटलर (माइकल स्टूलबर्ग) भी है। डॉक्टर हॉफस्टेटलर असल में रूसी जासूस होता है।
फिल्म का पांचवां और सबसे अहम किरदार बाकी सबसे बिलकुल अलग है। ये पांचवां किरदार है लैब के एक टैंक में रहने वाला जलीय जीव। इस किरदार को निभाया है डग जोन्स ने
ये जलीय जीव जिंदगी और भावनाओं को समझता और जानता है। फिल्म में एक संवाद है, जिसे एलिसा संकेतों के जरिए कहती है।
फिल्म 'द शेप ऑफ वॉटर'
- फोटो : BBC
इस जलीय जीव को एक नदी से आर्मी ऑफिसर (माइकल शैनन) पकड़कर बंदी बना लेता है। इस जीव के बारे में फिल्म में ये दिखाया जाता है कि वो नदी के किनारे बसे कबीलों का देवता है।
जाहिर है इस जीव को लैब में टॉर्चर किया जाता है। इस जलीय जीव से एलिसा की करीबियां बढ़ती हैं और फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है।
एलिसा फिल्म में इस जलीय जीव को बचाने की कोशिशें करती हुई नजर आती है। ये कोशिशें कभी इस जलीय जीव को अपने बाथटब में छिपाती तो कभी कहीं और