इस रिव्यू में कलाकारों के विवरण में प्रियंका चोपड़ा का नाम सबसे पहले इसलिए लिखा गया क्योंकि फिल्म को देखने की असली वजह वही रहीं। प्रियंका ने फिल्म को लेकर तमाम इंटरव्यू भी देश विदेश में दिए। उनकी ख्वाहिश भी रही कि उनके फैंस ये फिल्म देखें और उन्हें हॉलीवुड का स्टार मान लें।
इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए नेटफ्लिक्स पर करीब 90 मिनट की ये फीचर फिल्म दर्शक इसी उम्मीद के साथ देखनी शुरू करते हैं कि प्रियंका चोपड़ा का फिल्म में धमाकेदार रोल होगा। लेकिन, जैसे क्वांटिको के पहले ही एपीसोड में प्रियंका हॉलीवुड में काम करने के लिए समझौते करने के अपने इरादे बिना लाग लपेट के दिखा देती हैं, उसी तरह इजन्ट इट रोमांटिक में भी प्रियंका का रोल बताता है कि उन्हें अमेरिकी फिल्मों में काम करना है, रोल फिर उनका फिल्म में कुछ भी क्यों न हो। प्रियंका चोपड़ा का अपने प्रशंसकों के साथ किसी धोखे से कम नहीं है ये फिल्म।
इन सारी बातों को निकाल दें तो फिल्म वाकई दमदार है। कुछ कुछ हिंदी सिनेमा जैसी लगती इजन्ट इट रोमांटिक प्लस साइड आर्किटेक्ट की कहानी है, जिसे रोमांटिक कॉमेडी फिल्मों से चिढ़ है। एक एक्सीडेंट में सिर पर चोट लगती है और वह कोमा से बाहर आने से पहले एक नई दुनिया घूम आती है। उसे समझ आता है कि प्यार में इजहार कितना जरूरी है और खुद पर यकीन करना उससे भी ज्यादा जरूरी है।
फिल्म खुद से प्यार करो का संदेश देकर खत्म होती है और फिल्म जब खत्म होती है तो एक कोरस गाने में प्रियंका फिर फिल्म ताल में शाहिद कपूर जैसा काम करती दिख जाती हैं। अच्छा खासा हीरोइन थीं प्रियंका हिंदी सिनेमा में, ये अंग्रेजी फिल्मों के ओम पुरी, नसीरूद्दीन शाह बनने की सनक उन्हें कैसे लगी होगी भला, इज इट रीयली रोमांटिक?