बच्चे, बूढ़े और जवान-हर किसी की अगर है किसी एक खास एनीमेशन किरदार से पहचान तो वो है 1941 में वॉल्ट डिजनी के पिटारे से निकला छोटा हाथी। नाम है डंबो। डंबो यानी जो डंब है, बुद्धू है। ये नाम नहीं दरअसल उसकी बेइज्जती है। लेकिन जब जिंदगी में सब कुछ हाथ से निकल जाए तभी अपना हौसला बटोरने की चुनौती सामने होती है।
चार साल पहले डंबो की कहानी को बड़े परदे पर फिर से उतारने का एलान हुआ। जुलाई में फिल्म की शूटिंग शुरू हुई। शूटिंग खत्म होते ही वॉल्ट डिजनी ने फिल्म का ट्रेलर रिलीज कर दिया है। ट्रेलर की शुरुआत रेलगाड़ी की सीटी से होती है और परदे पर नजर आते हैं एक दड़बे की तरफ भागते दो बच्चे। फिर स्क्रीन पर नजर आता है छोटा सा, प्यारा सा डंबो। एक पंख पकड़ने की चाहत में वह उड़ने की कोशिश करता दिखता है। जी हां, डंबो की खासियत यही है कि वह उड़ सकता है।
साथ में उसके दोस्त चूहे भी है। हाथी और चूहे की दुश्मनी पर तमाम किवदंतियां हैं, चुटकुले हैं और किस्से कहानियां है। लेकिन इस फिल्म की खासियत है दोनों की दोस्ती। ट्रेलर में दिखता है कि चिड़ियाघर के मालिकान डंबो को उसकी मां से अलग कर देते हैं। डंबो कैसे अपनी मां से दोबारा मिलेगा?
इसी के संघर्ष की कहानी दिखेगी इस फिल्म में। लाइव किरदारों का एनीमेशन से मिलन हमेशा परदे पर जादू जगाता रहा है। वॉल्ट डिजनी के लिए भारत सिनेमा का बड़ा बाज़ार है और थ्रीडी व आइमैक्स में रिलीज़ हो रही डंबो का इंतज़ार बच्चों और युवाओं ने अभी से करना शुरू कर दिया है।