फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलविदा गौरंग व्यास: 87 साल की उम्र में संगीतकार और गायक का हुआ निधन, पीएम मोदी ने जताया दुख

Thu, 03 Sep 2026 10:32 AM IST
सिराजुद्दीन एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Gaurang Vyas Passed Away: गुजरात से ताल्लुक रखने वाले संगीतकार और गायक गौरंग व्यास का 87 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनके निधन पर दुख जताते हुए पीएम मोदी ने एक पोस्ट लिखी है। 
 
विज्ञापन
गौरंग व्यास, पीएम मोदी - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अनुभवी गुजराती संगीतकार और गायक गौरंग व्यास का निधन हो गया है। वह 87 साल के थे। गौरंग व्यास के काम ने राज्य की संगीत परंपरा में अहम योगदान दिया था। इस दिग्गज संगीतकार का कल देर रात अहमदाबाद में निधन हो गया। 
विज्ञापन

गौरंग व्यास, मशहूर गुजराती संगीतकार और कंपोजर अविनाश व्यास के बेटे थे, जिन्होंने गुजराती फिल्मों और संगीत में बड़ा योगदान दिया था। अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए, गौरंग व्यास ने परिवार की संगीत विरासत को आगे बढ़ाया और गुजराती संगीत इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई।
 
पीएम मोदी ने जताया दुख
पीएम मोदी ने पोस्ट में लिखा 'गुजराती संगीत जगत के मशहूर संगीतकार गौरंग व्यास के निधन से हमें गहरा दुख हुआ है। अपने पिता अविनाश व्यास की संगीत परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, उन्होंने गुजराती संगीत के क्षेत्र में अपनी एक खास पहचान बनाई थी। उनके निधन से गुजरात ने एक प्रतिभाशाली रचनाकार को खो दिया है। गुजराती संगीत में उनके अमूल्य योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।'
विज्ञापन

 

प्रशंसकों के प्रति संवेदना के प्रति जताई संबेदना
पीएम मोदी ने आगे लिखा, 'दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना और शोक संतप्त परिवार के सदस्यों तथा उनके बड़ी संख्या में मौजूद प्रशंसकों के प्रति संवेदना। ओम शांति!

गौरंग व्यास - फोटो : सोशल मीडिया
गौरंग व्यास के मशहूर गाने
  • व्यास ने कई मशहूर गीतों की रचना और गायन किया था।
  • उन्होंने आशा भोसले, अलका याग्निक और उषा मंगेशकर जैसे कई लोकप्रिय गायकों के साथ मिलकर काम किया था। 
  • उनके मशहूर गीतों में 'आज वागदावो रुदा सरनायु ने ढोल', 'मुने एकली मेलिन' और 'गोल ना रामकड़ा' हैं।
  • उनके सबसे ज्यादा सुने जाने वाले गानों में 'ढोलिडा ढोल तू एवोरे वागड़', 'चंदो उग्यो चौकमा', 'एनी जरियाल मोजादिये', 'अनी तदिमा कंकु वेरा' और अन्य शामिल हैं।
विज्ञापन

निधन से हुआ बड़ा नुकसान
उनके निधन को न केवल संगीत जगत के लिए, बल्कि गुजरात के कला और साहित्य समुदाय के लिए भी एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।
उनके जाने से एक ऐसे संगीतकार का नुकसान हुआ है, जिन्होंने गुजरात के सबसे जाने-माने कंपोजर की विरासत को आगे बढ़ाया और साथ ही राज्य की संगीत और कलात्मक पहचान को भी समृद्ध किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें