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Sufi Songs: मशहूर शायरों ने लिखे ये सूफी गाने, बॉलीवुड में मची इनकी धूम

Tue, 29 Apr 2025 10:23 AM IST
सिराजुद्दीन एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

बॉलीवुड में कई सूफी गानों का इस्तेमाल हुआ है। यहां हम आपको उन सूफी गानों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें बड़े कवियों ने लिखा और इन्हें बॉलीवुड में लिया गया।
 
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जोधा अकबर, बजरंगी भाई जान का एक दृश्य - फोटो : यूट्यूब
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विस्तार
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लगभग हर इंसान को गाने पसंद होते हैं। बॉलीवुड की शुरूआत से पहले से लोग गाने सुनते आए हैं। हर इंसान की अलग पसंह होती है इसलिए वह गाने भी अलग-अलग तरह के सुनते हैं। गानों में एक वर्ग सूफी गानों का है। पुराने जमाने से लेकर आज तक सूफी गानों को पसंद करने वाले लोग रहे हैं। बॉलीवुड में भी कई सूफी गानों का इस्तेमाल हुआ है। आज हम आपको बताने वाले हैं कि वह कौन से सूफी गाने हैं, जिन्हें महान कवियों ने लिखा है और इन्हें बॉलीवुड में शामिल किया गया है। 
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दमादम मस्त कलंदर
दमामद मस्त कलंदर के लिरिक्स को सबसे पहले 13वीं सदी में सूफी कवि अमीर खुसरो ने लिखा था। यह कविता सूफी संत लाल शहबाज कलंदर को संबोधित करते हुए लीखी गई थी। इसके बाद 18वीं सदी में बुल्ले शाह ने इसके लिरिक्स में कुछ बदलाव कर दिए और इसे कव्वाली की शक्ल दी। इसे कई गायकों ने गाया है। सबसे आखिर में दमादम मस्त कलंदर को बॉलीवुड के गायक नुसरत फतेह अली खान ने गाया था। इस गाने के बदले हुए रूप को फिल्म 'पार्टीशन 1947' में लिया गया।
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कोयाल फिल्म का एक दृश्य - फोटो : यूट्यूब
सांसों की माला पे
'सांसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम' को सबसे पहले 16वीं सदी में मीरा बाई ने गाया था। गाने में भगवान को अपना 'प्रियतम' प्रेमी माना गया है। बाद में इस गाने को गायक नुसरत फतेह अली खान ने गाया। इसके बाद ये गाना मशहूर हो गया। इस गाने को बॉलीवुड की फिल्मों जीत (1996), कोयला (1997) और तृष्णा (2011) में लिया गया।

पिया हाजी अली
ये गाना सूफी संत पीर हाजी अली शाह बुखारी को समर्पित है। इसे एआर रहमान ने कंपोज किया है। गाने को शौकत अली ने लिखा है। इस गाने को साल 2000 में 'फिजा' फिल्म में लिया गया था। गाने को सुनकर काफी सुकून मिलता है।
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जोधा अकबर का एक दृश्य - फोटो : यूट्यूब
ख्वाजा मेरे ख्वाज 
'ख्वाजा मेरे ख्वाजा' सूफी गाने को साल 2008 में रिलीज हुई फिल्म 'जोधा अक्बर' में लिया गया। इसे काशिफ ने लिखा और एआर रहमान ने इसे कंपोज किया। एआर रहमान ने बताया कि इस गाने को उन्होंने फिल्म के लिए नहीं कंपोज किया था, बल्कि इसे उन्होंने खुद सुनने के लिए कंपोज किया था। हालांकि आज यह गाना बहुत मशहूर है, कई लोग इसका आनंद लेते हैं।

मेरे पिया घर आए
'मेरे पिया घर आए' गाने को 18वीं सदी में सबसे पहले बाबा बुल्लेशाह ने लिखा था। इसे गायक नुसरत फतेह अली खान ने गाया और ये मशहूर हो गया। इसके बाद इसे राहत फतेह अली खान, कव्वाल बहाउद्दीन खान, साबरी ब्रदर्स और बदर मिआदाद ने भी गाया। ये सूफी गाना इतना मशहूर है कि इसे हर जेनेरेशन के लोग पसंद करते हैं। इस गाने के बदले हुए रुप को फिल्म 'याराना' 1995 में लिया गया।
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बजरंगी भाई जान का एक दृश्य - फोटो : यूट्यूब
भर दो झोली मेरी या मोहम्मद
'भर दो झोली मेरी या मोहम्मद' सूफी गाने को सबसे पहले शायर पुरनम इलाहाबादी ने लिखा था। इसे पहले साबरी ब्रदर्स ने गाया। इसके बाद अदनान सामी ने गाया। अदनान सामी के द्वारा गाए गाने को साल 2015 में 'बजरंगी भाईजान' में इस्तेमाल किया गया। 

ये जो हल्का हल्का सुरूर है
'ये जो हल्का हल्का सुरूर है' सूफी गाने को अनवर फर्रुखाबादी ने लिखा था। इसे बॉलीवुड के गायक नुसरत फतेह अली खान ने गाया था। इसके बदले हुए रूप को फिल्म 'फन्ने खान' में लिया गया। इस गाने की धुन और इसके बोल आपको प्यार में डूबने पर मजबूर कर देंगे।

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