कोयाल फिल्म का एक दृश्य
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सांसों की माला पे
'सांसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम' को सबसे पहले 16वीं सदी में मीरा बाई ने गाया था। गाने में भगवान को अपना 'प्रियतम' प्रेमी माना गया है। बाद में इस गाने को गायक नुसरत फतेह अली खान ने गाया। इसके बाद ये गाना मशहूर हो गया। इस गाने को बॉलीवुड की फिल्मों जीत (1996), कोयला (1997) और तृष्णा (2011) में लिया गया।
पिया हाजी अली
ये गाना सूफी संत पीर हाजी अली शाह बुखारी को समर्पित है। इसे एआर रहमान ने कंपोज किया है। गाने को शौकत अली ने लिखा है। इस गाने को साल 2000 में 'फिजा' फिल्म में लिया गया था। गाने को सुनकर काफी सुकून मिलता है।
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बजरंगी भाई जान का एक दृश्य
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भर दो झोली मेरी या मोहम्मद
'भर दो झोली मेरी या मोहम्मद' सूफी गाने को सबसे पहले शायर पुरनम इलाहाबादी ने लिखा था। इसे पहले साबरी ब्रदर्स ने गाया। इसके बाद अदनान सामी ने गाया। अदनान सामी के द्वारा गाए गाने को साल 2015 में 'बजरंगी भाईजान' में इस्तेमाल किया गया।
ये जो हल्का हल्का सुरूर है
'ये जो हल्का हल्का सुरूर है' सूफी गाने को अनवर फर्रुखाबादी ने लिखा था। इसे बॉलीवुड के गायक नुसरत फतेह अली खान ने गाया था। इसके बदले हुए रूप को फिल्म 'फन्ने खान' में लिया गया। इस गाने की धुन और इसके बोल आपको प्यार में डूबने पर मजबूर कर देंगे।