एक गजट नोटिफिकेशन के जरिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने दिसंबर 1991 में अधिसूचित किए गए नियमों में संशोधन किया। इसमें सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए फिल्मों को मंजूरी देने के नियम और सिद्धांत निर्धारित किए गए थे। इन नियमों के अनुसार केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को कंटेंट के नेचर, टाइप के हिसाब से यू/ए7+, यू/ए12+ और यू/ए16+ के साथ ही किसी फिल्म को सर्टिफिकेशन देने की अनुमति है।
नई रेटिंग के हिसाब से सर्टिफिकेशन
हालिया नोटिफिकेशन में कहा गया है, ‘सात साल या उससे ज्यादा उम्र के बच्चे या फिर सात साल से कम उम्र के बच्चे पैरेंट्स के गाइडेंस में ही सही कंटेंट को देखेंगे, जब ऐसी फिल्मों को सर्टिफिकेशन दिया जाएगा तो उन्हें यू/ए 7+ रेटिंग में रखा जाएगा। वहीं तेरह साल या उससे अधिक उम्र के बच्चे और तेरह साल से कम उम्र के बच्चे भी पैरेंट्स के गाइडेंस में ही सही कंटेंट देखेंगे, ऐसी फिल्म को जब सर्टिफिकेशन दिया जाएगा तो उसे यू/ए 13+ रेटिंग में रखा जाएगा। इसी तरह सोलह साल या उससे ज्यादा उम्र के बच्चे या सोलह साल से कम आयु बच्चे भी पैरेंट्स के गाइडेंस में ही सही कंटेंट को देखेंगे, इसके लिए किसी फिल्म को यू/ए16+ रेटिंग दी जाएगी, इसी कैटीगिरी में इसे रखा जाएगा।
पिछले साल से जारी हैं कोशिश
पिछले वर्ष ही सीबीएफसी अपने सर्टिफिकेशन सिस्टम को बेहतर किया था, अपडेट किया था। इस कोशिश का मकसद सोशल वैल्यू को बढ़ाना और उम्र के अनुसार ही सही कंटेंट दर्शकों तक पहुंचाना था। सीबीएफसी पूरे सर्टिफिकेशन को मॉर्डनाइज भी करना चाहती थी।