फिल्म 'सतलुज' में दिलजीज दोसांझ
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क्यों फिल्म को ओटीटी से हटाया गया?
ओटीटी कंटेंट, सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के दायरे में नहीं आता है। इसे इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 के पार्ट 3 के प्रावधानों के तहत रेगुलेट किया जाता है।
एक सरकारी अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि फिल्म 'सतलुज' के मेकर्स ने 2022 में इसके ओरिजिनल टाइटल 'पंजाब 95' के तहत सेंसर सर्टिफिकेशन के लिए अप्लाई किया था, लेकिन उन्होंने सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाए गए 127 कट्स को स्वीकार नहीं किया और फिल्म की रिलीज रोक दी।
अधिकारी के मुताबिक फिल्ममेकर्स सुझाए गए कट्स पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे थे और आखिरकार उन्होंने नए टाइटल के साथ ओटीटी पर चुपचाप फिल्म रिलीज कर दी। ओटीटी सेंसर बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। जब यह मामला सरकार के संज्ञान में आया, तो जी प्लेटफॉर्म से इसे हटाने के लिए कहा गया।
अधिकारी ने कहा, ‘यह निर्देश सुरक्षा चिंताओं के कारण दिया गया था। ओटीटी प्लेटफॉर्म से गाइडलाइंस का पालन करने के लिए कहा गया था। अगर मेकर्स फिल्म को थिएटर और ओटीटी पर रिलीज करना चाहते हैं, तो उन्हें तय नियमों का पालन करना चाहिए।’
दिलजीत दोसांझ भी हुए दुखी
हनी त्रेहान की निर्देशित फिल्म ‘सतलुज’ पंजाब के एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है। बता दें कि जसवंत सिंह ने 1984 से 1994 के बीच पंजाब में हजारों अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार की जांच की थी। 1995 में उनका अपहरण कर लिया गया था और उसके बाद वे कभी नहीं दिखे। फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालरा का किरदार निभाया है। जब फिल्म को ओटीटी से हटाया गया तो दिलजीत काफी दुखी हुए। लेकिन उन्होंने लोगों से कहा कि जहां पर भी फिल्म देखने को मिले, वह देखें। वहीं ओटीटी प्लेटफाॅर्म ने दर्शकों से पायरेसी का समर्थन न करने की बात कही है।