पांच मिनट में धर्मेंद्र हुए राजी
शर्मा ने बताया कि उनके पास पूरी स्क्रिप्ट नहीं थी, 'हुकूमत' के लिए 'पांच मिनट का आइडिया' था। धर्मेंद्र ने आइडिया ठीक पांच मिनट तक सुना। इसके बाद उन्होंने कहा 'इसमें जंप हैं। यह एक अच्छी फिल्म बन सकती है। खूब मेहनत से काम करो। मैं यह फिल्म कर रहा हूं।'
धर्मेंद्र ने ज्यादा पैसों की डिमांड नहीं की
अनिल शर्मा ने बताया कि अपनी हैसियत के मुताबिक धर्मेंद्र ने फिल्म साइन करते वक्त ज्यादा पैसों की डिमांड नहीं की। शर्मा के पिता ने धर्मेंद्र को कुछ ही पैसे दिए। धर्मेंद्र फिल्म को बनाने के लिए इसलिए राजी हो गए क्योंकि उन्हें कहानी अच्छी लगी।
फिल्म के लिए खुद दिए पैसे
अनिल शर्मा ने बताया कि उनकी फिल्म पैसे न होने की वजह से बीच में रुक गई। फाइनेंसर ने वादा किया था कि वह 30 लाख रुपये खर्च करेगा हालांकि उसने सिर्फ 5 लाख रुपये ही खर्च किए। जब यह बात धर्मेंद्र को पता चली तो उन्होंने मामला अपने हाथ में लिया और निर्देशक को फिल्म जारी रखने के लिए 3 लाख रुपये दिए।
साथ में की कई फिल्में
हुकूमत अनिल शर्मा के लिए अच्छी फिल्म बन गई। इसकी कामयाबी के बाद अनिल शर्मा का धर्मेंद्र के साथ अच्छा रिश्ता बन गया। दोनों ने 'एलान-ए-जंग', 'फरिश्ते', 'तहलका' और 'अपने' में साथ में काम किया।