दक्षिण भारत की राजनीति में एक बार फिर सिनेमा और सत्ता के बीच की दूरी कम होती दिखाई दे सकती है। तमिलनाडु में सुपरस्टार विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद अब एक और बड़े अभिनेता की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर चर्चाएं तेज हैं। यह नाम है तमिल सिनेमा के मशहूर अभिनेता धनुष का है। उन्होंने अपनी अदाकारी से तमिल सिनेमा से लेकर बॉलीवुड और हॉलीवुड तक पहचान बनाई।
अब हाल ही में धनुष की चेन्नई के बाहरी इलाके सेम्मनजेरी में फैंस क्लब महिला विंग से मीटिंग हुई। इस मीटिंग के बाद यह कयास लगने शुरू हो गए हैं कि धनुष तमिलनाडु में 2031 में होने वाले चुनावों की तैयारी में अभी से जुट गए हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, तमिलनाडु की सड़कों पर उनके पोस्टर लगना शुरू हो गए हैं। इसके अलावा यह चर्चाएं भी हो रही है कि धनुष जल्द ही किसी पार्टी के साथ भी जुड़ सकते हैं। हालांकि, अगर ऐसा होता भी है, तो धनुष कोई ऐसे पहले सितारे नहीं हैं, जो राजनीति में आ सकते हैं। इससे पहले भी कई साउथ स्टार रहे हैं, जो अभिनेता से राजनेता बन चुके हैं।
चिरंजीवी, एनटी रामाराव
- फोटो : एक्स
एनटी रामाराव
दक्षिण भारतीय सिनेमा से राजनीति में आने वाले सबसे पावरफुल चेहरों में तेलुगु फिल्मों के अभिनेता नंदमूरि तारक रामाराव यानी एनटी रामाराव का नाम सबसे ऊपर आता है। उन्होंने भगवान राम और भगवान कृष्ण जैसे किरदारों को पर्दे पर जीवंत किया। उनकी लोकप्रियता इतनी जबरदस्त थी कि दर्शकों के एक बड़े वर्ग के बीच उनकी छवि सिर्फ अभिनेता की नहीं, बल्कि सांस्कृतिक प्रतीक की बन गई थी।
फिर एनटीआर ने अपनी लोकप्रियता को राजनीति में बदलने का फैसला किया। 29 मार्च 1982 को उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी की स्थापना की। उनकी राजनीति का केंद्रीय मुद्दा तेलुगु अस्मिता और आंध्र प्रदेश के लोगों का स्वाभिमान था। 1983 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने कांग्रेस के लंबे राजनीतिक वर्चस्व को चुनौती देते हुए सत्ता हासिल कर ली। एनटी रामाराव आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने तीन अलग-अलग कार्यकालों में मुख्यमंत्री पद संभाला।
जयललिता
- फोटो : सोशल मीडिया
जयललिता
तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेत्री से मुख्यमंत्री बनने की सबसे बड़ी मिसाल जे जयललिता हैं। जयललिता ने तमिल, तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों में काम किया। वह अपने समय की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल थीं। उनकी राजनीतिक यात्रा एमजी रामचंद्रन यानी एमजीआर के साथ शुरू हुई।
1982 में जयललिता एआईएडीएमके में शामिल हुईं। बाद में वह पार्टी की प्रचार सचिव बनीं और राज्यसभा भी पहुंचीं। 1987 में एमजीआर की मृत्यु के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर जबरदस्त संघर्ष हुआ। जयललिता को कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने धीरे-धीरे पार्टी पर अपनी पकड़ मजबूत की।
1991 में वह पहली बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं। इसके बाद उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री पद संभाला और राज्य की राजनीति में एक बेहद प्रभावशाली नेता बनकर उभरीं। जयललिता ने महिलाओं, गरीबों और वंचित वर्गों को ध्यान में रखकर अनेक कल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं। उनकी 'अम्मा' ब्रांड वाली योजनाओं ने उनकी राजनीतिक पहचान को और मजबूत किया।
एमजी रामचंद्रन
- फोटो : सोशल मीडिया
एमजी रामचंद्रन
एमजीआर तमिल फिल्मों के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में से एक थे। उनकी फिल्मों में गरीबों की मदद करने वाले और अन्याय के खिलाफ लड़ने वाले नायक की छवि दिखाई देती थी। इस छवि ने उन्हें जनता के बीच असाधारण लोकप्रियता दिलाई।
वह पहले डीएमके से जुड़े, लेकिन बाद में पार्टी नेतृत्व से मतभेद होने पर 1972 में अपनी अलग पार्टी बनाई, जो आगे चलकर एआईएडीएमके के नाम से प्रसिद्ध हुई। 1977 में एमजीआर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने और 1987 में अपनी मृत्यु तक सत्ता में बने रहे। उनकी सफलता ने तमिलनाडु में सिनेमा और राजनीति के रिश्ते को स्थायी रूप से बदल दिया।
आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण
- फोटो : पीटीआई
पवन कल्याण
तेलुगु सिनेमा के पावर स्टार पवन कल्याण की राजनीतिक यात्रा दक्षिण भारत के फिल्मी सितारों के लिए एक अलग सबक देती है। पवन कल्याण ने 2014 में जनसेना पार्टी की स्थापना की। हालांकि, उनकी राजनीतिक सक्रियता इससे पहले भी रही थी। वह अपने भाई चिरंजीवी की प्रजा राज्यम पार्टी से जुड़े रहे थे।
2019 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में पवन कल्याण ने दो सीटों से चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों जगह हार गए। यह उनके राजनीतिक करियर के लिए बड़ा झटका था। हालांकि, उन्होंने राजनीति नहीं छोड़ी। फिर उन्होंने अपनी पार्टी का संगठन मजबूत करने और राजनीतिक गठबंधन बनाने पर ध्यान दिया।
2024 के विधानसभा चुनाव में जनसेना ने तेलुगु देशम पार्टी और बीजेपी के साथ गठबंधन किया। इस चुनाव में जनसेना ने अपने हिस्से की सभी 21 विधानसभा सीटें जीत लीं। पवन कल्याण स्वयं पीठापुरम सीट से विधायक चुने गए। इसके बाद वह आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बने।
चिरंजीवी
- फोटो : इंस्टाग्राम@chiranjeevikonidela
चिरंजीवी
तेलुगु सिनेमा के मेगास्टार चिरंजीवी ने भी राजनीति में बड़ा दांव खेला था। 2008 में उन्होंने प्रजा राज्यम पार्टी की स्थापना की। उस समय माना जा रहा था कि चिरंजीवी अपनी जबरदस्त लोकप्रियता के दम पर आंध्र प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
लेकिन 2009 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को केवल 18 सीटें मिलीं। चिरंजीवी स्वयं तिरुपति से चुनाव जीत गए, लेकिन पालाकोल्लू सीट से हार गए। इसके बाद 2011 में उन्होंने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया। वह राज्यसभा सदस्य बने और केंद्र की यूपीए सरकार में पर्यटन मंत्री भी रहे।
कमल हासन
- फोटो : एक्स@ikamalhaasan
कमल हासन
तमिल सिनेमा के दिग्गज अभिनेता कमल हासन ने भी राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की। 21 फरवरी, 2018 को उन्होंने मक्कल नीधि मय्यम पार्टी की स्थापना की। अभिनेता ने भ्रष्टाचार के विरोध, सुशासन, शिक्षा और प्रशासनिक सुधार जैसे मुद्दों को अपनी राजनीति का आधार बनाया। 2019 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने चुनाव लड़ा, लेकिन कोई सीट नहीं जीत सकी।
2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कमल हासन स्वयं कोयंबटूर दक्षिण सीट से मैदान में उतरे। लेकिन उन्हें बीजेपी की वनथी श्रीनिवासन के हाथों मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद कमल हासन ने राजनीतिक गठबंधन की राह अपनाई। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन किया। 2025 में वह राज्यसभा सदस्य बने।
प्रकाश राज
- फोटो : सोशल मीडिया
प्रकाश राज
अभिनेता प्रकाश राज दक्षिण भारतीय सिनेमा के उन चेहरों में शामिल हैं जो अपने राजनीतिक और सामाजिक विचारों को खुलकर व्यक्त करते रहे हैं। प्रकाश राज ने तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी फिल्मों में काम किया है। उन्होंने विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर केंद्र सरकार और बीजेपी की नीतियों की आलोचना की है।
2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कर्नाटक की बेंगलुरु सेंट्रल सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। हालांकि, उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। प्रकाश राज ने अपनी राजनीतिक सक्रियता को किसी बड़ी पार्टी के पारंपरिक संगठन के बजाय स्वतंत्र राजनीतिक आवाज के रूप में स्थापित करने की कोशिश की।
रजनीकांत
- फोटो : Instagram
रजनीकांत
सुपरस्टार रजनीकांत का नाम दक्षिण भारत की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय रहा। उनकी लोकप्रियता केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है। देश और विदेश में उनके करोड़ों प्रशंसक हैं। 1996 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान रजनीकांत ने तत्कालीन एआईएडीएमके सरकार के खिलाफ सार्वजनिक रुख अपनाया था। उनके बयान और राजनीतिक समर्थन ने उस दौर में काफी सुर्खियां बटोरी थीं।
इसके बाद कई वर्षों तक उनकी राजनीतिक एंट्री की अटकलें लगती रहीं। 31 दिसंबर, 2017 को रजनीकांत ने राजनीति में आने की घोषणा की, लेकिन पार्टी के औपचारिक गठन में लगातार देरी होती रही। दिसंबर 2020 में उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और कोरोना महामारी के जोखिम को देखते हुए राजनीतिक पार्टी बनाने की योजना छोड़ने की घोषणा कर दी। 2021 में उन्होंने अपना रजनी मक्कल मंद्रम संगठन भी भंग कर दिया।
थलापति विजय
- फोटो : इंस्टाग्राम
विजय
तमिल सिनेमा के सुपरस्टार सी जोसेफ विजय ने 2 फरवरी, 2024 को अपनी राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम की घोषणा की थी, तब सवाल उठ रहे थे कि क्या उनकी लोकप्रियता वोटों में बदल पाएगी। विजय ने राजनीति में आने से पहले लंबे समय तक अपने प्रशंसक संगठनों को सामाजिक गतिविधियों से जोड़ा था।
उनका 'विजय मक्कल इयक्कम' संगठन शिक्षा, जनकल्याण और सामाजिक सहायता जैसे कामों में सक्रिय रहा। राजनीति में औपचारिक एंट्री के बाद विजय ने अपनी पार्टी को तमिलनाडु में एक नए राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश किया।
2026 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी टीवीके ने 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने में सफलता हासिल की। हालांकि वह अकेले बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार बनी और 10 मई, 2026 को विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने।