फिल्म राजा हरिश्चंद्र की कहानी
फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' की कहानी सत्यवादी हरिश्चंद्र की कहानी से प्रेरित है। यह भारत की बहुत मशहूर कहानी है। यही वजह है कि दादा साहब फाल्के ने इसी कहानी पर फिल्म बनाई।
बिना आवाज के थी पहली फिल्म
भारत की सबसे पहली फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' बिना आवाज वाली ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म थी। इस फिल्म का सबटाइटल अंग्रेजी, मराठी और हिंदी था। इस दौर में फिल्मों में ऑडियो का आविष्कार नहीं हुआ था।
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दादा साहब फाल्के पुरस्कार की शुरूआत
दादा साबह फाल्के ने कई फिल्में बनाईं। यह फिल्में काफी कामयाब रहीं। भारतीय सिनेमा में उनका योगदान बहुत ज्यादा रहा। इसी को देखते हुए साल 1969 को उनकी जन्म शताब्दी के मौके पर भारत सरकार ने भारतीय सिनेमा में अच्छा काम करने वालों को दादा साहब फाल्के पुरस्कार देने का एलान किया। ये पुरस्कार भारत सरकार की तरफ से दिया जाने वाला सबसे बड़ा पुरस्कार है। जिसको यह पुरस्कार दिया जाता है उसे 10 लाख रुपये, शॉल और स्वर्ण कमल दिया जाता है।