पठान, परम सुंदरी और पद्मावत
- फोटो : सोशल मीडिया
विवाद या पीआर स्टंट
देखा जाए तो इस साल अब तक आईं दिनेश विजन के मैडॉक की हर फिल्म को लेकर कोई न कोई विवाद जरूर उठा है और हर फिल्म सफल भी रही है। ऐसे में अब सवाल ये ही है कि क्या रिलीज से पहले फिल्मों को लेकर उठने वाले विवाद एक पीआर स्टंट होते हैं, जिन्हें कहीं न कहीं मेकर्स खुद जन्म देते हैं ताकि फिल्म को पब्लिसिटी मिली और उनसे फिल्मों को फायदा पहुंचे। क्योंकि कई मौकों पर यह देखने को मिला है कि जब भी किसी फिल्म को लेकर विवाद उठा है, तो उस फिल्म की चर्चा तो हुई ही, साथ ही फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कलेक्शन भी किया है।
ये कोई नया फॉर्मूला नहीं है, इससे पहले भी ऐसे कई उदाहरण हैं, जब फिल्मों को लेकर विवाद उठा और फिल्में बॉक्स ऑफिस पर छप्पर फाड़ कमाई कर गईं। इस लिस्ट में संजय लीला भंसाली की भी कई फिल्में शामिल हैं, जिनमें ‘गोलियों की रासलीला राम लीला’ से लेकर ‘पद्मावत’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ व ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ तक का नाम शामिल है। इसके अलावा शाहरुख खान की ‘पठान’ और शाहिद कपूर की ‘कबीर सिंह’ व रणबीर कपूर की ‘एनिमल’ भी इसी फेहरिस्त का हिस्सा हैं।
मौजूदा वक्त में ‘परम सुंदरी’ को लेकर उठे विवाद के बीच वॉचडॉग फाउंडेशन के फाउंडर निकोलस अल्मेडा ने अमर उजाला से इसको लेकर हुई बातचीत में इसे फिल्म मेकर्स की सोची-समझी एक रणनीति बताते हुए कहा, “फिल्ममेकर बार-बार यही तरीका अपनाते हैं- धार्मिक भावनाओं से खेलो, विवाद खड़ा करो और फिर फिल्म को पब्लिसिटी मिल जाती है। इसका फायदा उनकी फिल्म को भी मिलता है।”
वहीं वकील गॉडफ्रे प्रिमेंटा ने अमर उजाला डिजिटल से इसको लेकर कहा, “फिल्ममेकर अब जानबूझकर विवादों का फायदा उठाने लगे हैं। यह पहला मामला नहीं है। बार-बार ऐसा किया जाता है ताकि लोगों की जिज्ञासा बढ़े और वो टिकट खरीदें। इसे हम कमर्शियल एक्सप्लॉइटेशन ऑफ रिलीजियस सेंटीमेंट्स कहते हैं।”
फिलहाल इस बात से परहेज तो नहीं किया जा सकता कि विवाद उठने से फिल्मों को एक पब्लिसिटी जरूर मिल जाती है। जिससे कई बार कलेक्शन में भी फिल्मों को इसका फायदा मिलता है।