जब आपकी बहन ने पहली बार आर्मी जॉइन की और आप दोनों की राहें अलग हुईं, उस वक्त आपके दिल में क्या चल रहा था?
देखिए, हम तो कॉलेज तक हर पल साथ ही थे। मतलब जहां वो जाती थी, मैं भी उसके पीछे-पीछे। मैं उससे छोटी हूं ना तो उसकी परछाई जैसी रहती थी। लेकिन जिस दिन उसने आर्मी जॉइन किया न वो पल ऐसा था जैसे दिल का एक हिस्सा छूट गया हो। तब से हमारी राहें अलग हो गईं पर दिल का कनेक्शन तो वहीं का वहीं रहा।
कोई ऐसा किस्सा जो आपको आज भी रुला देता हो, जब आप दोनों साथ थे?
हां, एक किस्सा कभी नहीं भूल सकती। लाइब्रेरी में हम दोनों 10-12 घंटे बैठकर पढ़ाई करते थे। मेरी बहन की आदत थी कि आते ही मेरे कंधे पर हाथ रखती थी। एक बार वो नहीं थी और किसी और ने ऐसे ही मेरे कंधे पर हाथ रख दिया, तो मुझे एक पल को लगा कि मेरी बहन ही आई है। जब मुड़ कर देखा तो वो नहीं थी। वो एहसास आज भी आंखें नम कर देता है।
जब पूरी दुनिया की निगाहें आपकी बहन पर थीं, जब वो देश को ब्रीफ कर रही थीं... उस लम्हे को आप कैसे बयां करेंगी?
वो पल मेरे लिए सपना जैसा था। अचानक किसी ने कॉल किया, बोला 'टीवी ऑन करो, तुम्हारी सिस्टर आ रही है।' पहले तो यकीन ही नहीं हुआ। जब स्क्रीन पर देखा कि मेरी बहन ऑपरेशन सिंदूर की ब्रीफिंग कर रही है, तो मेरी धड़कनें तेज हो गईं।
एक तरफ गर्व था कि वो मेरी बहन है, दूसरी तरफ दिल कह रहा था, 'देखो, आज वो पूरे हिंदुस्तान के सामने खड़ी है।' और उस दिन, जो सरकार ने कहा था, 'हम बदला लेंगे', वो पूरा हुआ। डबल खुशी थी - एक देश के लिए, एक बहन के लिए।
आप दोनों में से कौन बड़ी है?
मेरी बहन मुझसे सिर्फ 15 मिनट बड़ी है। लेकिन उन 15 मिनट में भी वो हमेशा मुझे प्रोटेक्ट करने वाली बड़ी बहन ही रही है। दिलचस्प बात यह है कि हम 5 भाई-बहन हैं। एक बड़ी बहन है, फिर हम दोनों ट्विन सिस्टर्स हैं और दो ट्विन भाई भी हैं, जो हमसे छोटे हैं।
जब आपने आर्मी की बजाय ग्लैमर फील्ड चुनी, तो घरवालों का क्या रिएक्शन था? सपोर्ट था या...?
सपोर्ट? बिल्कुल नहीं था। खासकर मेरी मम्मी… उन्हें ये सब बिल्कुल भी पसंद नहीं था। उन्होंने साफ मना कर दिया था, 'तू क्यों कर रही है ये सब?' उनके लिए ये सब कुछ फालतू था। मुझे ये बात समझ में आती थी, क्योंकि मैं मुस्लिम बैकग्राउंड से आती हूं और उनके लिए ये सब नया था।
वो चाहती थीं कि मैं एक सुरक्षित करियर चुनूं, लेकिन मुझे पता था, मुझे यही करना है। और हां मुझे उनके सपोर्ट की कमी जरूर महसूस हुई, लेकिन मैंने खुद को यकीन दिलाया कि मेरा रास्ता अलग है। वक्त के साथ मम्मी ने मेरी पसंद को समझा और अब वो बहुत खुश हैं।
आपने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट का जिक्र किया था… क्या आप बता सकती हैं कि आपका वो सपना क्या है, जो आपकी आंखों में बसता है?
देखिए, आजकल बहुत लोग अपने मम्मी-पापा के लिए रोते हैं, उनके लिए कुछ करते हैं। पर हम ये भूल जाते हैं कि हमारी असली 'मां' तो हमारी धरती है। मैं चाहती हूं कि लोग सिर्फ अपनी मां के लिए नहीं, बल्कि 'मदर अर्थ' के लिए भी उतनी ही फिक्र करें। मेरा सपना है एक असली जंगल बनाना।
मैं अब तक करीब 18 लाख पेड़ लगा चुकी हूं और 3 लाख तो मैंने खुद गिने हैं। लेकिन ये सपना सिर्फ पेड़ लगाने तक नहीं रुकता, ये तो बस एक शुरुआत है। मेरा उद्देश्य है, इस जंगल को एक 'ग्रीन ओएस' बनाने का - जहां लोग सीखें, समझें और खुद को प्रकृति से जुड़ें।