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‘छात्राें का दर्द महसूस करता हूं, खुद वहीं से आया हूं’, विनीत कुमार ने ‘हैलो बच्चों’ को बताया खास प्रोजेक्ट

Tue, 03 Mar 2026 02:59 PM IST
Poonam Kandari एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Viineet Kumar Singh Exclusive Interview: वेब सीरीज ‘हैलो बच्चों’ में अभिनेता विनीत कुमार सिंह फिजिक्स टीचर अलख पांडे से प्रेरित भूमिका में नजर आएंगे। उनके लिए यह एक भावनात्मक और जिम्मेदार भरी यात्रा रही।

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विनीत कुमार सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमर उजाला से बातचीत में विनीत ने बताया कि यह किरदार कितना चुनौतीपूर्ण था। बातचीत के दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, बदलाव की जरूरत और अपने निजी अनुभवों पर भी खुलकर बात की। पढ़िए प्रमुख अंश…

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‘हैलो बच्चों’ आपके लिए क्या मायने रखती है?
यह मेरे लिए सिर्फ एक सीरीज नहीं, बल्कि उन लाखों छात्रों की कहानी है जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करते हैं। इसमें उनके माता-पिता भी शामिल हैं, जो बच्चों की सफलता के लिए दिन-रात संघर्ष करते हैं और शिक्षक भी, जो उन्हें सही दिशा देते हैं। यह शो इन सभी की भावनाओं, उम्मीदों और संघर्षों को सेलिब्रेट करता है। एक एक्टर के तौर पर यह जर्नी मेरे लिए इसलिए भी खास है क्योंकि मैं खुद मेडिकल बैकग्राउंड से हूं और स्टूडेंट लाइफ की मेहनत और दबाव को नजदीक से जानता हूं। यह दुनिया हमेशा कहीं न कहीं मेरी जिंदगी का हिस्सा रही है। 

'हैलो बच्चों' सीरीज में विनीत कुमार सिंह - फोटो : इंस्टाग्राम@vineet_ksofficial

इस किरदार की तैयारी कैसी रही? 
इस किरदार की तैयारी गहरी रिसर्च और लगातार ऑब्जर्वेशन मांगती थी, क्योंकि यह अलख पांडे से प्रेरित है, जिन्हें लाखों बच्चे फॉलो करते हैं। कोशिश यही थी कि मेरी तरफ से कोई कसर न रह जाए। असली फीडबैक दर्शक ही देंगे जब शो देखेंगे। मेरे लिए एक व्यक्तिगत फायदा यह था कि बचपन से ही मेरे घर में टीचिंग का माहौल रहा है। मेरे पिता गणितज्ञ हैं इसलिए शिक्षकों के धैर्य, समर्पण और स्टूडेंट्स की जर्नी को मैं बहुत करीब से समझता हूं।

बचपन की कोई ऐसी घटना जो आज भी दिल में बसी हो?
मेरे घर में शिक्षा और मदद का माहौल हमेशा रहा है। एक बार पापा मंदिर गए तो उन्हें एक लड़का मिला जो फीस न दे पाने की वजह से कॉलेज नहीं जा पा रहा था। पापा उसे घर लाए और हम सबको साफ निर्देश दिया कि उसकी हर जरूरत का ध्यान रखना है। पापा ने उसे हमें पढ़ाने के लिए लगा दिया और इस तरह वो खुद भी पढ़ता था और पैसे भी कमाता था। आगे जाकर उसी एक घंटे की क्लास ने उसकी पूरी हायर एजुकेशन का खर्च संभाल लिया। जिस दिन उसे अच्छी नौकरी मिली उसने पापा के पैर छूकर धन्यवाद कहा। यह घटना मेरे लिए जीवन भर की सीख रही।


 

विनीत कुमार सिंह - फोटो : इंस्टाग्राम@vineet_ksofficial

क्या हमारे एजुकेशन सिस्टम में बदलाव जरूरी है?
यह एक बहुत जटिल विषय है और मैं इसमें विशेषज्ञ नहीं पर एक बात जरूर कहूंगा कि शिक्षा बुनियादी अधिकार है। किसी भी बच्चे की पढ़ाई सिर्फ पैसे की कमी की वजह से रुक जाए वो सही नहीं। हमारा सिस्टम ऐसा होना चाहिए जो बच्चों को आगे बढ़ने में मदद करे, न कि उनके सपनों के रास्ते में रुकावट बने।

भारत में कोचिंग इंस्टिट्यूट्स और शिक्षा व्यवस्था को लेकर बहस रहती है। आप इसे कैसे देखते हैं?
समय के साथ शिक्षा का स्वरूप लगातार बदलता रहा है। इंटरनेट आने से पहले यह सोचना मुश्किल था कि कोई छात्र घर बैठकर पढ़ सकता है। लेकिन कोविड के दौरान यह जरूरी हो गया। स्कूल बंद थे और पढ़ाई को किसी नए तरीके से आगे बढ़ना था। उस समय ऑनलाइन टीचर्स की अहमियत बहुत बढ़ी। उन्होंने ऐसे समय में भी बच्चों की पढ़ाई को जारी रखा, जब कोई और विकल्प नहीं था। मेरा मानना है कि शिक्षा व्यवस्था को समय के अनुसार खुद को अपग्रेड करते रहना चाहिए। जैसे हम फोन अपग्रेड करते हैं, वैसे ही शिक्षा का सिस्टम भी नए समय और जरूरतों के हिसाब से आगे बढ़ना चाहिए। 

 

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विनीत कुमार सिंह - फोटो : इंस्टाग्राम@vineet_ksofficial

एक पिता के रूप में आपकी जिंदगी कैसे बदल गई है?
पिता होना बेहद खूबसूरत अहसास है। इसके साथ भावनात्मक पल भी आते हैं। हाल ही में जब मैं बाहर से लौटा तो मेरे बेटे ने मुझे पहचाना ही नहीं, क्योंकि पिछली बार मेरी दाढ़ी थी। इस बार मैंने शेव कर रखी थी तो वह मेरे पास नहीं आया। यह पल मेरे लिए बहुत गहरा था। अब काम जल्दी खत्म करके घर जाने का मन पहले से ज्यादा होता है। हम उसे स्क्रीन से दूर रखते हैं, इसलिए वीडियो कॉल भी कम करता हूं, ताकि उसे न लगे कि पापा फोन के अंदर रहते हैं। कोशिश यही रहती है कि जितना भी समय मिल सके, उसके साथ बिताऊ। मेरी असली खुशी वहीं है।

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