फिल्म की रिसर्च किस तरह से हुई?
हमने सात महीने पूरे देश में घूमकर रिसर्च की है। कई कोर्ट केस पढ़े और ढेर सारी पुलिस एफआईआर देखी। अगर कोई हमारी फिल्म के किसी सीन पर सवाल करे तो हम उसी समय उसे प्रमाण दिखा सकते हैं।
पिछली बार आपकी फिल्म कई जगह बैन की गई थी। क्या बार ऐसी रुकावटों के लिए तैयार हैं?
हर राजनीतिक पार्टी और सरकार की अपनी सोच और अपनी पसंद होती है। हम फिल्ममेकर हैं, किसी सरकार से लड़ने की स्थिति में नहीं आते। बस इतना कहेंगे कि हमारी फिल्म को बैन करके वो असल में उन पीड़ितों की आवाज दबा रहें हैं, जिनकी कहानियां हम सामने लाए हैं। हमारा काम सिर्फ सच को सामने लाना है।
फिल्म 'द केरल स्टोरी 2' के प्रोड्यूसर विपुल शाह
- फोटो : एक्स (ट्विटर)
कइयों का मानना है कि आपकी फिल्में प्रोपेगेंडा होती हैं। इस आरोप को कैसे देखते हैं?
आपने ‘अंगूर खट्टे हैं’ वाली कहावत तो सुनी ही होगी। बस वही वाली बात है। अब जिसकी ऐसी सोच है, उसे क्या समझाया जाए? वो जैसा मानना चाहता है, मानता रहे। लेकिन सच यह है कि ऐसा कहीं नहीं होता। किसी भी सरकार के पास इतना समय नहीं होता कि वो किसी एक फिल्म की मेकिंग में आकर शामिल हो जाए।
आलोचकों से क्या कहना चाहेंगे?
एक आर्टिस्ट को हमेशा अपनी बात खुलकर कहनी चाहिए। उसे लोगों की राय और आलोचना से डरना नहीं चाहिए? हमारे लिए सबसे जरूरी यह होता है कि हमारी फिल्म में एक भी सीन झूठा न हो। इसके बाद जिसे पसंद आए वो तारीफ करे। जिसे पसंद न आए वो आलोचना करे। हां, आलोचना भी तर्क के साथ करें।