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Danish Iqbal: 'धुरंधर 2' के बड़े साहब को रिलीज से पहले सता रहा था इस बात का डर, बोले- पैकअप होते देर नहीं लगती

Thu, 26 Mar 2026 10:26 PM IST
Jyoti Raghav एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Danish Iqbal Interview: फिल्म 'धुरंधर 2' में बड़े साहब का रोल एक्टर दानिश इकबाल ने निभाया है। इस किरदार के लिए उनकी खूब तारीफ हो रही है। हाल ही में अमर उजाला के साथ खास बातचीत में उन्होंने कई दिलचस्प बातें साझा कीं।
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दानिश इकबाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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फिल्म 'धुरंधर 2-द रिवेंज' सिनेमाघरों में सजी हुई है और अपने बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से चौंका रही है। इस फिल्म में दानिश इकबाल को 'बड़े साहब' के किरदार में देखा गया है। यह रोल उन्होंने बड़ी खूबसूरती से निभाया है। इसमें कई चुनौतियां भी आईं। दानिश इकबाल ने दाऊद के रोल पर कई चौंकाने वाली बातें कहीं। अमर उजाला से इक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होंने क्या कहा? पढ़िए कुछ अंश

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दानिश इकबाल - फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म की शूटिंग जब खत्म हुई, आप घर बैठे तो फिल्म रिलीज होने से पहले दिमाग में क्या ख्याल आया?
दानिश इकबाल: 'यही आया कि बड़े साहब को लेकर इतना हउआ क्रिएट हो गया था। मुझे डर था कि पता नहीं सीन कैसे एडिट हुआ है और मेरा परफॉर्मेंस कैसा है। अगर लोगों की उम्मीद पर खरा नहीं उतरा तो हमारी इंडस्ट्री में पैकअप होते देर नहीं लगती। आप बहुत जल्दी डिब्बे में डाल दिए जाते हो। मुझे इसी का डर था। हम शूट करके आ जाते हैं तो पता नहीं चलता कि क्या बना होगा। आप हमेशा खुद पर डाउट करते रहते हैं न, तो वह डाउट मेरे अंदर भी था। मगर, जब मैंने देखा तो इंटरनेट पर चीजें आने लगीं। मैसेज आने लगे। फिर मेरे दिल की धड़कन बहुत तेज हो गई। ऐसा लगने लगा कि ऐसा क्या देख लिया इन लोगों ने कि इतना दीवानगी हो गई सबको। ऐसा क्या हो गया उस सीन में? मुझे पता है कि वह सीन ज्यादा फैला हुआ नहीं है। मैं जब दर्शकों के साथ बैठकर देख रहा था और दर्शकों की प्रतिक्रिया आई तो लगा कि मैं कितना भी क्रिटिसाइज कर लूं लेकिन, आपको यह तो मानना पड़ेगा कि दर्शक अगर पसंद कर रहे हैं तो आपने कुछ न कुछ तो किया ही है'।

आपका यह किरदार ऐतिहासिक हो जाएगा। आप जिस तरीके से वायरल हुए, लोग आपको सर्च करने लगे। आप पिछले 30 साल से इंडस्ट्री में हैं? शुरुआत कैसे हुई?
दानिश इकबाल:  'कहीं यह छप गया था कि मैंने 30 साल काम किए हैं। मगर, 30 साल मैंने इंडस्ट्री में नहीं काम किया है। 30 साल हो गए मुझे जब मैंने थिएटर शुरू किया था। बहुत यंग एज में मैंने शुरू किया था। पहला नाटक 1994 में किया था। प्ले का नाम था 'गंगा'। अगर वहां से जोड़ेंगे तो 30 साल से ज्यादा ही हो गया। बॉलीवुड में 20 साल हो गए होंगे। मैंने 2003 में पहला सिनेमा किया था'।

दानिश इकबाल - फोटो : अमर उजाला
आपको फ्रेंच फिल्म कैसे मिली?
दानिश इकबाल: 'मेरी पढाई इंग्लैंड में हुई है। वहां से मैंने मास्टर्स की है। विदेश के एक्टर और डायरेक्टर्स से मेरा दुआ-सलाम है। बाहर की फिल्म इंडिया में शूट होती है, तो बहुत छोटी से कम्युनिटी है हमारी। एक-दूसरे को पता रहता है। कास्टिंग के लिए कॉल्स आते हैं कि ये कैरेक्टर है। मैंने तीन-चार बाहर के प्रोजेक्ट्स किए हुए हैं। करता रहता हूं मैं बाहर के प्रोजेक्ट।

आपने 'अरण्यक' में भी काम किया है। रवीना टंडन के साथ काम करके कैसा लगा?
दानिश इकबाल: 'बहुत अच्छा लगा। वे बड़ी खूबसूरत और सुलझी हुई हैं। कमाल की एक्ट्रेस हैं। उन्हें देखते ही 'मोहरा' का गाना याद आया। 'अरण्यक' की शूटिंग में काफी मजा आया। हमने पहाड़ों के बीच शूट किया था'।

फिल्म 'धुरंधर 2' - फोटो : एक्स (ट्विटर)
फिल्म में 'बड़े साहब' को बिस्तर पर लेटा देखा गया। एक डॉन जो बूढ़ा हो चुका है। बीमार है। बोलते वक्त जुबान लड़खड़ाती है। मगर, फिर भी पूरे तेवर हैं। इस किरदार के लिए एक्स्ट्रा मेहनत करनी पड़ी?
दानिश इकबाल: 'मेहनत तो किसी भी किरदार के लिए करनी पड़ती है। कुछ आसान किरदार आपके पास आ जाते हैं। कुछ ऐसे कैरेक्टर होते हैं, जो आपके पास आसानी से नहीं आते। इस उम्र का जो दाउद इब्राहिम है, मेरे अंदर बहुत आसानी से नहीं घुसा। काफी वक्त लगा। घर के कुछ बुजुर्गु, आसपास के बुजुर्गों को मैं देखता था। मॉर्निंग वॉक करने जाता था तो देखता था कि कोई लाठी लेकर चल रहा है, किसी के पास स्टिक है। मैंने अपनी ऑब्जर्वेशन बढ़ाई। कुछ लोगों से बात भी करता था कि इस उम्र में आवाज कैसे निकलती है। फिर, उस किरदार की अथॉरिटी भी है। एक बब्बर शेर जैसा इंसान बीमार है। कहते हैं न कि हाथी मरकर भी सवा लाख का होता है। बीमारी में भी उसका दिमाग ऐसा चल रहा है। उसके आसपास लोग खड़े हैं, बातें मान रहे हैं। मेहनत लगी इस किरदार को करने में, लेकिन मजा आया'।

आपका मेकअप कमाल का था। इसकी प्रक्रिया कैसी होती थी?
दानिश इकबाल: 'चीजें बनती दिक्कत से हैं। बिगड़ती बहुत जल्दी हैं। इस मेकअप को बनाने में सात-आठ घंटे लग जाते थे। उतरता थोड़ा जल्दी था। जब इस प्रोसेस से गुजर रहा था तब चैलेंज था। जैसे-जैसे मेरा मेकअप होता जाता था तो मैं किरदार में मेंटली घुसता चला जाता था। फाइनली जब मैं खुद को आइने में देखता था तो लगता था कि कोई और व्यक्ति आइने में है। मेरा ट्रांसफॉर्मेशन हो जाता था। मुझे अब भी याद है, जब मैंने उस लोकेशन पर एंट्री ली तो मुझे देखकर सब हतप्रभ थे। सबको लगा कौन आ गया। उस किरदार को करके बड़ा मजा आया'।
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सात-आठ घंटे मेकअप में लगता था। फिर शूटिंग का वक्त..., कुल मिलाकर 11-12 घंटे तो आप खाना नहीं खा पाते होंगे?
दानिश इकबाल: 'लिक्विड आप खा सकते हो। जूस और सूप आप स्ट्रॉ से पी सकते हैं। फिर, यह हमारी जॉब का हिस्सा है'। 

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