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इंटरव्यू: ‘एक वक्त काम नहीं था, फिर भी एक्टिंग नहीं छोड़ी’; आशा नेगी ने बताया क्यों नहीं चुना दूसरा रास्ता

सार

Asha Negi Interview: वेबसीरीज 'अली बाबा 40 भूत' फेम अभिनेत्री आशा नेगी ने अपने करियर के बारे में काफी कुछ बताया। अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि मनोंरंजन की दुनिया में आते बदलावों को उन्होंने किस तरह मैनेज किया। पढ़िए क्या बोलीं आशा...
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आशा नेगी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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टीवी एक्ट्रेस आशा नेगी इन दिनों 'अली बाबा 40 भूत' में नजर आ रही हैं। शो में उनका किरदार साइंस स्टूडेंट का है, जो शुरुआत में भूत-प्रेत जैसी चीजों को बकवास मानता है। आशा के लिए इस शो की शुरुआत ही थोड़ी अलग रही। उन्हें शूट शुरू होने से सिर्फ दो दिन पहले लॉक किया गया था। हाल ही में अमर उजाला से खास बातचीत में अभिनेत्री ने शो के अलावा अपने करियर के उतार-चढ़ाव, लंबे शूटिंग शेड्यूल और निजी जिंदगी से जुड़े कई किस्से साझा किए।
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आशा नेगी - फोटो : इंस्टाग्राम @akshaykumar
सिर्फ दो दिन पहले शो में हुईं लॉक
आशा कहती हैं, 'मुझे शो के लिए सिर्फ दो दिन पहले लॉक किया गया था। अगले दिन मेरे ट्रायल हुए। फिर छह एपिसोड की रीडिंग हुई, शाम को लुक टेस्ट हुआ और उसी दौरान शूट भी शुरू हो गया। मुझे उस वक्त सिर्फ चौथे एपिसोड की स्क्रिप्ट पता थी। मुझे आगे की कहानी पता थी, न पीछे की। सच कहूं तो मुझे खुद समझ नहीं आ रहा था कि मैंने ये सब कैसे मैनेज किया।'

'विशाल की वजह से बच गई'
वह आगे कहती हैं, 'शायद हमारे डायरेक्टर बहुत अच्छे थे और एक्टर्स ने भी बहुत मदद की। कई बार लगता है कि विशाल की परफॉर्मेंस की वजह से मैं बच गई। बाकी सब मस्ती-मजाक में हो गया। मुझे लास्ट मोमेंट पर लॉक किया गया था, तैयारी का टाइम ही नहीं मिला। कई बार सोचती हूं कि मैंने ये सब कैसे कर लिया। लेकिन यही इस काम की खूबसूरती है। कई बार पूरी तैयारी का मौका नहीं मिलता और उसी वक्त चीजों को पकड़ना पड़ता है।'

आशा नेगी - फोटो : इंस्टाग्राम @ashanegi
दो महीने ओरछा में रहकर शूटिंग
मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर ओरछा में 40 एपिसोड की शूटिंग करीब दो महीने चली। आशा कहती हैं, 'मेरे लिए मेंटल प्रिपरेशन भी उतना ही जरूरी था। 40 एपिसोड का शूट है, तो सिर्फ रीडिंग या स्क्रिप्ट की तैयारी नहीं थी। हमें करीब दो महीने एक आइसोलेटेड रीजन में रहना था। वहीं काम करना है, वहीं खाना-पीना है। वही लोग आपके परिवार और दोस्त बन जाते हैं। इसलिए उस तरह से खुद को तैयार करना भी जरूरी था।'
ओरछा उन्हें काफी पसंद आया। वह कहती हैं, 'बहुत खूबसूरत जगह है। मुझे पहले पता ही नहीं था कि मध्य प्रदेश में इतनी सारी खूबसूरत जगहें हैं। वहां पुराने महल हैं, ऐतिहासिक जगहें हैं और राम राजा मंदिर भी है। वहां जाकर मैंने सोचा कि अपनी फैमिली को जरूर लेकर आऊंगी। सबसे अच्छी बात वहां की साफ हवा और साफ पानी था। मुंबई में रहते हुए आपको ऐसी चीजें बहुत मिस होती हैं।'

ठंडी हवा में डाइट रखना हुआ मुश्किल
दो महीने तक शूटिंग के बीच डाइट संभालना भी आसान नहीं था। आशा कहती हैं, 'वहां डाइट करना थोड़ा मुश्किल था। ठंडी हवा, सुबह-सुबह की शूटिंग और आसपास का खाना देखकर डाइट पर टिके रहना मुश्किल होता था। थोड़ा बहुत हम करते थे और कभी-कभी डाइट छूट भी जाती थी।'

आशा नेगी - फोटो : सोशल मीडिया
टीवी के शुरुआती दिनों में सेट पर ही रहती थीं आशा
आशा नेगी ने 2011 में टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी। उस समय शूटिंग के घंटे तय नहीं होते थे। आशा बताती हैं, 'यार, मुझे बस यही लगता है कि उस वक्त हम बच्चे थे। हम 22-22 साल के थे, इसलिए सब हो जाता था। अब तो सोच भी नहीं सकती कि ऐसा कैसे कर लेते थे। मुझे याद है, एक बार किसी इवेंट में जाना था और मैंने चार दिन की छुट्टी मांगी थी। लेकिन लगातार सेट पर रहना पड़ता था। वहीं नहाना, वहीं रहना, बारिश के सीन चल रहे हैं तो वो भी वहीं। अब तो सोच भी नहीं सकती कि मैं ये सब कैसे कर लेती थी।'

अब 12 घंटे बाद ही जवाब दे देती हैं बॉडी
आशा नेगी ने 2011 में टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी। 'पवित्र रिश्ता' से पहचान बनाने वालीं आशा नेगी के उस शुरुआती दौर में शूटिंग के घंटे तय नहीं होते थे।
वह कहती हैं, 'अब अगर किसी दिन 12-13-14 घंटे से ऊपर हो जाता है तो मैं रोने लग जाती हूं कि नहीं हो रहा मुझसे। एक बार शूट के आखिरी दौर में मेरी हालत बहुत खराब हो गई थी। रात को शूट खत्म हुआ और सुबह फिर जल्दी बुला लिया गया। उस वक्त मैं बस यही कह रही थी कि नहीं हो पाएगा मुझसे। मैं रोती हुई अंदर कमरे में चली जाती थी।'
फिर वह विशाल से अपनी तुलना करते हुए हंसती हैं, 'लेकिन विशाल को देखो, ये आराम से कर रहा होता था। इसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता था। मैं सोचती थी कि यार, ये कैसे कर लेता है?'

आशा नेगी - फोटो : इंस्टाग्राम @ashanegi
काम नहीं था तो खुद पर काम किया
करियर में एक वक्त ऐसा भी आया, जब आशा के पास काम नहीं था। वह कहती हैं, 'एक वक्त ऐसा भी था जब कुछ भी वर्क नहीं कर रहा था। मैंने वो फेलियर वाला फेज भी देखा है। लेकिन मुझे लगता है कि लो फेज आपको ज्यादा सिखाते हैं। जब सब अच्छा चल रहा होता है तो शायद आप उतना नहीं सीखते, जितना उस वक्त सीखते हैं जब चीजें आपके हिसाब से नहीं हो रही होतीं।'
वह आगे कहती हैं, 'उस लो फेज में भी मेरे दिमाग में ऐसा कोई प्लान नहीं आया कि शायद मैंने गलत फैसला कर लिया या मुझे कुछ और ट्राई करना चाहिए। आज भी लोग कहते हैं कि आप कोई साइड बिजनेस क्यों नहीं करते, लेकिन मुझे लगता है कि मैं बस यही कर सकती हूं। मुझे और कुछ नहीं आता। इसलिए जब वो वक्त आया तो मैंने सोचा कि अगर अभी काम नहीं है तो खुद पर काम कर लेती हूं।'
'जब मैं बॉम्बे आई थी तो मेरी एक्टिंग वही थी जो हमने टेलीविजन में सीखी थी। उस वक्त मैंने वर्कशॉप कीं। नेटफ्लिक्स और अमेजन जैसे प्लेटफॉर्म आ रहे थे, तो अच्छा सिनेमा भी देखने लगी। अगर उस वक्त काम नहीं था तो कम से कम मैं कुछ सीखकर तो निकलूं। आज पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि अच्छा किया मैंने।'
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आशा नेगी - फोटो : सोशल मीडिया
मां चाहती थीं आर्मी में जाएं
माता-पिता के साथ वक्त बिताने को लेकर आशा कहती हैं, 'मुझे लगता है कि उनके साथ रहने पर मैं अपनी वही सिंपल लाइफ में वापस चली जाती हूं। यहां आप इतने उलझे रहते हो, लेकिन घर जाकर एक ब्रेक मिल जाता है। मैं करीब एक हफ्ता वहां रहती हूं और फिर वापस आ जाती हूं। मुझे वो जिंदगी बहुत पसंद है।'
मां की इच्छा का जिक्र करते हुए वह हंसती हैं, 'मम्मी चाहती थीं कि मैं आर्मी में जाऊं। वो तो नहीं जा पाई। हां, लेकिन जो अनुशासन और स्ट्रिक्टनेस आर्मी में होती है, वो मेरी जिंदगी में जरूर है। तो आर्मी में भले ही नहीं जा पाई, लेकिन अपने किरदारों के जरिए उस दुनिया को थोड़ा जी लिया।'

हॉरर के बाद अब एक्शन करना है
आशा अब एक्शन करना चाहती हैं। वह कहती हैं, 'एक्शन अभी बाकी है। मैं प्रॉपर एक्शन करना चाहती हूं। ऐसा कुछ जो थोड़ा चैलेंजिंग हो। उसके लिए तो मैं 1-2 महीने पहले से ट्रेनिंग शुरू कर दूंगी। मैंने अभी तक ऐसा कुछ ट्राई नहीं किया है। हॉरर भी मैंने पहले नहीं किया था, वो अब हो गया। तो अब लगता है कि एक्शन भी करना है।'
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