फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मां-बाप की हंसी उड़ाता कॉमेडी का पॉपकॉर्न, डिसक्लेमर ही इसका नकाब

Mon, 26 Nov 2018 12:36 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
Zakir Khan
विज्ञापन
नई पीढ़ी पर रिसर्च की पीएचडी किसी स्टैंडअप कॉमेडियन को मिलनी चाहिए तो वह हैं जाकिर खान। बचपन की यादों में स्कूल-कॉलेज की गालियों का मुलम्मा चढ़ाकर अपने मां-बाप की खिल्ली उड़ाते हुए एक घंटे से ऊपर का शो ऐसे ही बेचा जा सकता है। शो की रेटिंग नहीं है। इसका डिसक्लेमर ही इसका नकाब है।
विज्ञापन


पूरा शो है 74 मिनट का। शो की शुरूआत में ही जाकिर बम फोड़ते हैं, पापा फेसबुक पर आ गए। इसके बाद शुरू होती है एक लंबी किस्सागोई जिसमें जाकिर की दोस्त नताशा है, उसका कथित ब्वॉयफ्रेंड करन है और हैं जाकिर के मम्मी-पापा। चुटकुलों के तौर पर शुरू होने वाला शो धीरे-धीरे एक किस्से की तरफ बढ़ता है जहां जाकिर को स्कूल का एक लड़का अपने साथियों के साथ पीटता है। शो का एक संवाद काफी चुटीला है, जहां जाकिर अपने मां के चंडी बन जाने का किस्सा कहने के तुरंत बाद कहते हैं, मां और बेटे के रिश्ते को सेकुलर ही रहने देना चाहिए।
विज्ञापन

हास्य और व्यंग्य में अपनी आपबीती को मार्मिक तरीके से सुनाकर उस पर खुद ही हंसने और दूसरों को हंसाने की श्रेणी सबसे कमजोर श्रेणी मानी जाती है। यहां दर्शक समाज, सरकार या सिस्टम पर किसी तंज की उम्मीद भी नहीं करता। ये वह दर्शक वर्ग है जिसके पास खर्च करने को अतिरिक्त पैसा है और उसे रात में सोने से पहले कुछ न कुछ ऐसा अपने मोबाइल पर देखना है जो न सिनेमाघरों में मिलता है और न टीवी पर। जाकिर के दूसरे शोज के मुकाबले ये शो खोखला है और दर्शकों को ठीक से हंसने का मौका ही नहीं देता। अपनी मां और अपने पिता का मजाक उड़ाते जाकिर खान नई पीढ़ी के पॉपकॉर्न हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें