नई पीढ़ी पर रिसर्च की पीएचडी किसी स्टैंडअप कॉमेडियन को मिलनी चाहिए तो वह हैं जाकिर खान। बचपन की यादों में स्कूल-कॉलेज की गालियों का मुलम्मा चढ़ाकर अपने मां-बाप की खिल्ली उड़ाते हुए एक घंटे से ऊपर का शो ऐसे ही बेचा जा सकता है। शो की रेटिंग नहीं है। इसका डिसक्लेमर ही इसका नकाब है।
पूरा शो है 74 मिनट का। शो की शुरूआत में ही जाकिर बम फोड़ते हैं, पापा फेसबुक पर आ गए। इसके बाद शुरू होती है एक लंबी किस्सागोई जिसमें जाकिर की दोस्त नताशा है, उसका कथित ब्वॉयफ्रेंड करन है और हैं जाकिर के मम्मी-पापा। चुटकुलों के तौर पर शुरू होने वाला शो धीरे-धीरे एक किस्से की तरफ बढ़ता है जहां जाकिर को स्कूल का एक लड़का अपने साथियों के साथ पीटता है। शो का एक संवाद काफी चुटीला है, जहां जाकिर अपने मां के चंडी बन जाने का किस्सा कहने के तुरंत बाद कहते हैं, मां और बेटे के रिश्ते को सेकुलर ही रहने देना चाहिए।