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विश्व फोटोग्राफी दिवस 2020: 'जब मैं और तेंदुआ एक साथ एक ही जगह और एक ही पेड़ पर पहुंच गए...'

Wed, 19 Aug 2020 09:49 PM IST
प्रतीक्षा राणावत मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला
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सौजन्य कल्याण वर्मा - फोटो : कल्याण वर्मा
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विश्व फोटोग्राफी दिवस पर सोनी बीबीसी अर्थ के प्रतिष्ठित भारतीय वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स से अमर उजाला ने बातचीत की और उनसे हासिल कीं कुछ बेहतरीन तस्वीरें, जो उनके कैमरे के जरिए प्रकृति की सबसे रहस्यमयी कहानियां बयां करती हैं। इसकी चौथी कड़ी में बात कल्याण वर्मा से। कल्याण वर्मा बेंगलुरु स्थित वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर, फिल्म-निर्माता, और संरक्षण समर्थक हैं। उन्होंने बीबीसी के लिए अनेक शो पर काम किया है जिनमें सोनी बीबीसी अर्थ का शो 'डायनेस्टी' भी शामिल है।

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क्या आप अपने 'सबसे बेहतरीन फोटोग्राफी क्षण' और उसके पीछे की कहानी के बारे में कुछ बता सकते हैं?
मुझे लगता है मेरे लिए सबसे कठिन विषय पेड़ों की तस्वीरें लेना रहा है। जब आप उन्हें देखते हैं तो वे काफी भव्य लगते हैं लेकिन तस्वीरों में उस भव्यता को कैद कर पाना बहुत मुश्किल होता है। कुछ वर्षों पहले मैं बोर्नियो में था और इस ऊंचे कम्पैशिया वृक्ष ने मेरा ध्यान खींचा।

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सौजन्य कल्याण वर्मा - फोटो : कल्याण वर्मा की खींची पसंदीदा तस्वीर
इसके लिए आखिर कौन सा तरीका काम आया?
मैं इसकी तस्वीर लेना चाहता था और मैंने कई तरीकों से कोशिश की लेकिन असफल रहा। इसलिए, आखिर में मैंने रात में आकाश की पृष्ठभूमि में इसकी तस्वीर लेने का फैसला किया और सौभाग्य से पृष्ठभूमि में बिजली की चमक ने मेरी मदद की और मैं वृक्ष को एक हल्के रंग से पेंट कर सका।

कभी ऐसा क्षण आया जब आपकी जान खतरे में पड़ गई हो?
जंगल में एक तेंदुए के साथ मेरा सामना हुआ था जो मेरे लिए सबसे जयादा डरावना था। रात का समय था और मैं पेड़ से बांधकर एक कैमरा ट्रैप लगा रहा था क्योंकि पास ही एक मरा हुआ हिरण पड़ा हुआ था और मैंने सोचा रात में कभी तेंदुआ या बाघ इसे खाने के लिए आ सकता है। मुझे एहसास ही नहीं हुआ कि जहां मैं कैमरा ट्रैप लगा रहा था उसी झाड़ पर एक तेंदुआ बैठा हुआ था।

फिर क्या हुआ?
मैं कैमरा ट्रैप लगाने की कोशिश कर रहा था तो मुझे गुर्राने की आवाज आई, मैंने ऊपर देखा तो केवल एक मीटर की दूरी पर अपना जबड़ा खोले एक तेंदुआ बैठा हुआ था। मैं सबकुछ छोड़कर अपनी जान बचाने के लिए भागा। सौभाग्य से तेंदुआ भी नीचे कूदकर विपरीत दिशा में भाग गया। आज भी उस रात के बारे में सोचकर मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

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