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विश्व फोटोग्राफी दिवस 2020: जब मुझसे सिर्फ चार फिट की दूरी पर दिखा भालू और फिर हुआ ये...

Wed, 19 Aug 2020 12:07 PM IST
anand anand अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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विक्रम पोतदार - फोटो : सौजन्य विक्रम पोतदार
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विश्व फोटोग्राफी दिवस पर सोनी बीबीसी अर्थ के प्रतिष्ठित भारतीय वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स से अमर उजाला ने बातचीत की और उनसे हासिल कीं कुछ बेहतरीन तस्वीरें, जो उनके कैमरे के जरिए प्रकृति की सबसे रहस्यमयी कहानियां बयां करतीं हैं। इसकी तीसरी कड़ी में बात विक्रम पोतदार से। विक्रम पोतदान ने सोनी बीबीसी अर्थ पर प्लैनेट अर्थ 2 और डायनेस्टीज़ जैसे शो बनाने के लिए योगदान दिया है। विक्रम पोतदार पहले भारतीय वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर हैं जिन्होंने वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी के जुनून के लिए छह महाद्वीपों और दो ध्रुवीय क्षेत्रों का दौरा किया है।

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क्या आप आपके ‘सबसे बेहतरीन फोटोग्राफी क्षण’ और उसके पीछे की कहानी के बारे में कुछ बता सकते हैं?
मैं 2011 में भूरे रंग के भालूओं की तस्वीरें लेने के लिए पूर्वी रशिया के सुदुरवर्ती कामचातका में गया था। वहाँ कुरील झील नामक एक पूरी तरह दुर्गम दूरवर्ती इलाका है। कुरील झील तक पहुंचने के लिए आपको हेलिकॉप्टर से मोस्को से पेत्रोपाव्लोस्क कामचात्सकी तक उड़ान भरनी होती है जो कामचातका क्षेत्र की राजधानी है। 4-5 दिनों तक हम झील के किनारे से तस्वीरें ले रहे थे और वहां 25 फीट ऊंचा एक प्लेटफॉर्म था। लेकिन मैं कभी उस ऊंचे प्लेटफॉर्म पर नहीं गया क्योंकि एक लो एंगल और स्मूथ बैकग्राउंड (साफ पृष्ठभूमि) के लिए मैं हमेशा लो एंगल से तस्वीरें लेना पसंद करता हूँ।

फिर क्या हुआ?
मैंने देखा एक इंद्रधनुष बनना शुरू हो रहा है और मैंने इंद्रधनुष, भालू और उड़ते हुए पक्षियों को शामिल कर एक प्राकृतिक आवास वाली वाइड एंगल तस्वीर लेने का विचार किया। वो एक चमकीला और अच्छी तरह दिखनेवाला इंद्रधनुष था और भालू इंद्रधनुष के दाईं ओर था, और मैंने एक तस्वीर अपने दिमाग में बनाई कि यदि भालू इंद्रधनुष के ठीक नीचे आता है तो मुझे एक लाइफटाइम तस्वीर मिलेगी। तो, अगले कुछ सेकंड में ही भालू ने मेरी इच्छा पूरी कर दी और भालू बराबर इंद्रधनुष के नीचे था।

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विक्रम पोतदार द्वारा ली गई तस्वीर - फोटो : सौजन्य विक्रम पोतदार
उस पल की याद आती है तो क्या ख्याल आते हैं?
जैसे ही मुझे परफेक्ट तस्वीर मिल गई, भालू आगे की ओर चला गया और इंद्रधनुष भी गायब हो गया। तो, इंद्रधनुष बनते हुए देखने से लेकर, लेन्स बदलना, प्लेटफॉर्म पर जाना, एक परफेक्ट तस्वीर क्लिक करना और इंद्रधनुष का गायब हो जाना, यह सबकुछ केवल दो मिनट में हो गया। लेकिन इन दो मिनटों में मैं वह परफेक्ट तस्वीर ले सका जिसे मैंने दिमाग में तैयार किया था। मेरे साथ करीब 15 फोटोग्राफर्स थे, किसी ने भी इस प्राकृतिक आवास की तस्वीर के बारे में नहीं सोचा। और मैं खुश हूँ कि जीवन में एक बार आने वाले उस क्षण की तस्वीर मैं ले सका।

कभी ऐसा अनुभव आया क्या आपकी जान किसी एक फोटो के लिए खतरे में पड़ी हो?
मैंने शायद ही कभी ऐसी स्थिति का सामना किया होगा जहां मुझ पर हमला हुआ हो या फिर मुझे जानवरों से खतरा महसूस हुआ हो। आमतौर पर जानवर काफी शांत होते हैं और वे आपके रास्ते में नहीं आते। लेकिन यदि आपने एक सुरक्षित दूरी और उनकी निजता पर अतिक्रमण किया है और आपकी मौजूदगी से उन्हें खतरा महसूस होता है तो वे आप पर हमला करते हैं।

और, किसी जंगली जानवरी के सबसे करीब आप कभी पहुंचे तो कितना पहुंचे?
पिछले 13-14 सालों में मुझे एक या दो बार ऐसी परिस्थिति का सामना करना पड़ा। श्रीनगर से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दाचीगाम नेशनल पार्क की एक घटना है। 2014 में ऐसी ही एक ट्रिप के दौरान ऐसी ही एक घटना से मेरा सामना हुआ जहां सुबह करीब 5.30 बजे हम पार्क में गए। वहां एक संकरा रास्ता था और सितंबर के आखरी सप्ताह के दौरान ओक (शाहबलूत) वृक्ष के फलों के पकने का मौसम था और भालू इन फलों को खाने आते हैं। उस दिन हम संकरे रास्ते से जा रहे थे और अचानक कहीं से बिना किसी संकेत के मुझसे केवल चार फीट की दूरी पर एक भालू आया और उसने ज़ोर से गर्जना की। मुझे आज भी वह गर्जना याद है, वो काफी डरावनी थी। 

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