फिर इसके लिए क्या प्लानिंग की? इस सवाल के जवाब में संदेश कहते हैं, “एक दिन, जब हमने नए सिरे से एक बार फिर सारी योजना बनाई तो सबकुछ एकदम सही रहा और जैसे ही मैंने कैमरा ट्रैप बॉक्स खोला और हमें घास पर चलते हुए एक बाघ की तस्वीर मिल गई। यही वो चीज थी, वो क्षण था जिसका हम इंतज़ार कर रहे थे और यह क्षण हमेशा के लिए कैमरे में कैद कर लिया गया था। जब भी मैं उस तस्वीर को देखता हूं, तो इससे मुझे उस एक शॉट हासिल करने के लिए उन तमाम विफलताओं की याद आ जाती हैं जिनसे हमें गुजरना पड़ा था।”
तो संदेश ने क्या कभी अपनी यात्रा के दौरान अपनी जान पर खतरा महसूस किया? वह बताते हैं, “यदि जंगल से तुलना करें तो हाइवे पर गाड़ी चलाते वक्त या अपने शहर में सड़क पार करते वक्त जान के लिए खतरे वाली घटनाएं ज़्यादा होती हैं। चाहे यहां हो या वहां हर किसी को सभी जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए और हालांकि हम इस तरह की स्थितियों से बचने की कोशिश करते हैं लेकिन फिर भी ऐसी स्थितियां कभी कभी खड़ी हो ही जाती हैं।”
संदेश कडूर द्वारा क्लिक की गई तस्वीर
- फोटो : संदेश कडूर
अपनी बात आगे बढ़ाते हुए वह कहते हैं, “क्लाउडेड लेपर्ड से जुड़ी एक स्टोरी पर काम करते समय मुझ पर एक मच्छर द्वारा हमला हुआ, जिसके कारण मुझे सेरीब्रल मलेरिया हो गया। यह मेरे द्वारा अनुभव किया गया मौत के सबसे करीब होने का एहसास था और मैं सभी को सबसे छोटे जंगली जीवों से भी सुरक्षित रहने की सावधानी बरतने के लिए कहूंगा और अक्सर वो सबसे छोटी चीज़ें ही हैं जिनका असर सबसे ज्यादा होता है।”