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World Book Day 2021: ‘पृथ्वीराज’ जैसे चरित्र कई पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे: चंद्र प्रकाश

Fri, 23 Apr 2021 10:07 AM IST
स्वाति सिंह अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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चंद्र प्रकाश द्विवेदी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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इन दिनों हिंदी सिनेमा में पहले से प्रकाशित किताबों पर फिल्में बनाने का फैशन चल रहा है। लेकिन, ऐतिहासिक फिल्मों के लिए अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले निर्देशक चंद्र प्रकाश द्विवेदी का मानना है कि किताबें इतिहास का एक ऐसा झरोखा हैं जिनमें झांककर उन्हें अपनी फिल्मों के शोध में मदद मिलती है। चंद्र प्रकाश की अगली फिल्म ‘पृथ्वीराज’ भी एक महाकाव्य पुस्तक पर ही आधारित है।चंद्र प्रकाश बताते हैं, “फिल्म ‘पृथ्वीराज’ मुख्य तौर पर पृथ्वीराज रासो नामक एक मध्यकालीन महाकाव्य पर आधारित है, जिसकी रचना महाकवि चंद बरदाई ने की थी। रासो के चंद अलग-अलग संस्करणों के अलावा सम्राट पृथ्वीराज के जीवन और उनके काल को लेकर काफी साहित्यिक लेखन किया गया है। इसके अतिरिक्त रासो की कुछ टीकाएं और भाष्य भी मौजूद हैं।”
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द्विवेदी का कहना है कि पृथ्वीराज फिल्म बनाने के लिए उनको इस शूरवीर सम्राट के बारे में गहन शोध करना पड़ा। वह बताते हैं, “मैं व्यापक और गंभीर शोधकार्य में अक्सर डूब जाया करता हूं क्योंकि मुझे भारत के महानायकों और उनके कालखंडों वाली अज्ञात एवं अनछुई दुनिया में प्रवेश करने की प्रक्रिया बहुत आनंदित करती है। यह उन महान चरित्रों के साथ उन्हीं के दौर में जाकर संवाद करने जैसी प्रक्रिया है। मुझे विश्वास है कि अधिकतर लेखकों ने इस विचित्र तथ्य का अनुभव अवश्य किया होगा।”
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चंद्र प्रकाश द्विवेदी - फोटो : सोशल मीडिया
वह आगे कहते हैं, “कहानी के अलावा मुझे कला, पुरातत्व, वेशभूषा, भौतिक संस्कृति तथा उपलब्ध ऐतिहासिक आंकड़ों की खोज करना बहुत भाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो किसी युग या उस युग के व्यक्तित्वों की पुनर्रचना करने के लिए किसी साहित्यिक कृति या ऐतिहासिक गल्प के पृष्ठों की पुरातात्विक खोज और उत्खनन करना मुझे अत्यधिक पसंद है। एक ऐसा कलाविद होने के नाते मुझे इस कार्य से अत्यधिक प्रसन्नता और संतुष्टि मिलती है, जो लाइट्स और कैमरा के सहारे सिनेमा के कैनवास पर चित्र बनाना चाहता है।”

चंद्र प्रकाश का मानना है कि पृथ्वीराज जैसे महान योद्धाओं की गाथाएं वर्तमान युग में भी बेहद प्रासंगिक हैं, जहां अच्छाई का बुराई के साथ सतत संघर्ष चल रहा है। वह कहते हैं, “मैं पृथ्वीराज जैसे महान चरित्रों को युवा दर्शकों की दृष्टि में प्रासंगिक बनाने हेतु नहीं चुनता। मैं सिनेमा के लिए उनको अपना विषय इसलिए बनाता हूं कि ये चरित्र हमारे समय में भी प्रासंगिक हैं और आने वाले हर युग के लिए भी प्रासंगिक रहेंगे। ये महान ऐतिहासिक चरित्रों की आकाशगंगा के ऐसे चमकते नक्षत्र हैं, जो आगामी कई पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे।“
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