वह आगे कहते हैं, “कहानी के अलावा मुझे कला, पुरातत्व, वेशभूषा, भौतिक संस्कृति तथा उपलब्ध ऐतिहासिक आंकड़ों की खोज करना बहुत भाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो किसी युग या उस युग के व्यक्तित्वों की पुनर्रचना करने के लिए किसी साहित्यिक कृति या ऐतिहासिक गल्प के पृष्ठों की पुरातात्विक खोज और उत्खनन करना मुझे अत्यधिक पसंद है। एक ऐसा कलाविद होने के नाते मुझे इस कार्य से अत्यधिक प्रसन्नता और संतुष्टि मिलती है, जो लाइट्स और कैमरा के सहारे सिनेमा के कैनवास पर चित्र बनाना चाहता है।”
चंद्र प्रकाश का मानना है कि पृथ्वीराज जैसे महान योद्धाओं की गाथाएं वर्तमान युग में भी बेहद प्रासंगिक हैं, जहां अच्छाई का बुराई के साथ सतत संघर्ष चल रहा है। वह कहते हैं, “मैं पृथ्वीराज जैसे महान चरित्रों को युवा दर्शकों की दृष्टि में प्रासंगिक बनाने हेतु नहीं चुनता। मैं सिनेमा के लिए उनको अपना विषय इसलिए बनाता हूं कि ये चरित्र हमारे समय में भी प्रासंगिक हैं और आने वाले हर युग के लिए भी प्रासंगिक रहेंगे। ये महान ऐतिहासिक चरित्रों की आकाशगंगा के ऐसे चमकते नक्षत्र हैं, जो आगामी कई पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे।“