किशोर नांदलस्कर के बारे में मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में जो किस्सा सबसे ज्यादा मशहूर है वह ये कि शुरू के दिनों में वह अपने घर के पड़ोस में मंदिर में सोया करते थे। घर में सदस्यों की संख्या अधिक होने के चलते उन्हें मंदिर प्रांगण में ही सुकून मिलता था। ये बात किसी ने उन दिनों के महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख को बताई तो देशमुख ने तुरंत उनके लिए घर की व्यवस्था कराई थी। मंत्रालय में जब उन्हें अपने नए फ्लैट की चाभी मिली तो वह भावुक होकर जोर जोर से रोने लगे थे।
किशोर नांदलस्कर के चर्चित नाटकों में ‘नाना करते प्यार’, ‘विच्छा माझी पुरी करा’, ‘वासूची सासू’ ‘चल आटप लवकर’, ‘भ्रमाचा भोपळा’, ‘पाहुणा’, ‘श्रीमान श्रीमती’, ‘भोळे डॅम्बीस’, ‘वन रूम किचन’ आदि शामिल हैं। मराठी सिनेमा में किशोर ने ‘सारे सज्जन’, ‘शेजारी शेजारी’, ‘हळद रुसली कुंकू हसले’ जैसी फिल्मों से शोहरत हासिल करने के बाद महेश मांजरेकर की फिल्म ‘वास्तव’ से हिंदी सिनेमा में प्रवेश किया।
‘जिस देश में गंगा रहता है’, ‘तेरा मेरा साथ है’, ‘खाकी’ ‘जान जाए पर वचन न जाए’, ‘ये तेरा घर ये मेरा घर’, ‘हलचल’, ‘सिंघम’ जैसी फिल्मों में किशोर के किरदारों को लोगों ने काफी सराहा।